vht most thrilling match 5 रन बाकी, 4 विकेट जेब में फिर कैसे हार गई टीम, सितारे मुंह ताकते रह गए

नई दिल्ली. क्रिकेट को अनिश्चितताओं का खेल यूँ ही नहीं कहा जाता. जयपुर के मैदान पर खेला गया विजय हजारे ट्रॉफी का मुकाबला इसका जीता-जागता उदाहरण बन गया, जहाँ आख़िरी ओवरों में सितारों से सजी मुंबई टीम को जीत के लिए सिर्फ़ 5 रन चाहिए थे और 4 विकेट हाथ में थे. स्टेडियम में मौजूद दर्शक, टीवी के सामने बैठे करोड़ों फैंस और खुद मुंबई का ड्रेसिंग रूम सभी को जीत लगभग तय लग रही थी लेकिन तभी पंजाब के दो गेंदबाज़ों ने ऐसा जादू चलाया कि मैच का पूरा नक़्शा पलट गया. मयंक मार्कंडे और हरप्रीत बरार की शानदार गेंदबाज़ी ने इतिहास रच दिया और मुंबई को एक ऐसी हार का सामना करना पड़ा, जिसे विजय हजारे ट्रॉफी के सबसे रोमांचक मुकाबलों में हमेशा याद रखा जाएगा.
27 ओवर का खेल बाकी और रन चाहिए 16 और पास में हों 5 विकेट तो कोई भी शख्स बल्लेबाजी करना वाली टीम की जीत पर ही दांव लगाएगा पर होनी को कुछ और ही मंजूर था क्योंकि पंजाब ने पासा पलट दिया और स्पीड और स्पिन का ऐसा बिछाया जिसमें मुंबई के बल्लेबाज फंसते चले गए.
मुंबई की जीत लगभग तय थी!
जयपुर में खेले गए इस मुकाबले में पंजाब ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए चुनौतीपूर्ण 216 रन का स्कोर खड़ा किया लक्ष्य का पीछा करने उतरी मुंबई की टीम, जो सितारों से सजी मानी जा रही थी, ने मैच पर धीरे-धीरे पकड़ बना ली. मिडिल ओवर्स में कुछ विकेट गिरने के बावजूद रन रेट नियंत्रण में रहा और आख़िरी ओवरों में हालात पूरी तरह मुंबई के पक्ष में नज़र आ रहे थे. जब स्कोरबोर्ड पर जीत के लिए सिर्फ 5 रन और चार विकेट बाकी दिखे, तब शायद ही किसी दर्शक ने पंजाब की जीत की कल्पना की हो.
पलटा मैच का रुख
क्रिकेट अक्सर वहीं करवट लेता है, जहाँ कोई उम्मीद नहीं करता पंजाब के कप्तान ने दबाव भरे उस पल में गेंद मयंक मार्कंडे और हरप्रीत बरार को सौंपी और दोनों गेंदबाज़ों ने अविश्वसनीय प्रदर्शन कर दिखाया. मयंक मार्कंडे ने अपनी विविधताओं से बल्लेबाज़ों को पूरी तरह बांध दिया.हरप्रीत बरार ने सटीक लाइन और लेंथ के साथ रन बनाने के सभी रास्ते बंद कर दिए. एक के बाद एक विकेट गिरते चले गए और देखते ही देखते मुंबई का मजबूत दिख रहा बल्लेबाज़ी क्रम बिखर गया.
आख़िरी ओवर का हाई वोल्टेज ड्रामा
जैसे-जैसे विकेट गिरते गए, स्टेडियम में सन्नाटा और रोमांच दोनों बढ़ते चले गए. पंजाब के खिलाड़ी पूरी ऊर्जा के साथ मैदान पर थे, जबकि मुंबई के ड्रेसिंग रूम में बेचैनी साफ झलक रही थी. आख़िरकार वह पल आ ही गया जब मुंबई की आख़िरी उम्मीद भी टूट गई और टीम जीत की दहलीज़ से खाली हाथ लौट गई. पंजाब ने असंभव सी लगने वाली जीत दर्ज कर ली. मंयक ने मैच के अंतिम ओवर में ओंकार तारमेले को बोल्ट करके मैच को पंजाब की छोली में डाल दिया.
मार्कंडे और बरार बने जीत के हीरो
इस मुकाबले में पंजाब की जीत के सबसे बड़े नायक रहे मयंक मार्कंडे और हरप्रीत बरार. दबाव के क्षणों में दोनों ने न सिर्फ़ संयम दिखाया बल्कि अपने अनुभव और कौशल से मैच को पूरी तरह पलट दिया. उनकी गेंदबाज़ी ने यह साबित कर दिया कि सीमित ओवरों के क्रिकेट में आख़िरी गेंद तक खेल ज़िंदा रहता है. दोनों स्पिन गेंदबाजों ने 4-4 विकेट लिए और ये तेय किया कि उनकी टीम जीत का सेहरा पहनकर मैदान से लौटेंगे.



