‘हर एक हिसाब यहीं होगा…’ अरविंद केजरीवाल की हार पर विवेक अग्निहोत्री ने कसा तंज

Last Updated:February 08, 2025, 23:17 IST
Vivek Ranjan Agnihotri on Arvind Kejriwal Defeat: दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) को करारी हार झेलनी पड़ी. पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल अपनी सीट नहीं बचा पाए. अरविंद केजरीवाल की हार पर निर्देश…और पढ़ें
विवेक अग्निहोत्री अपने बेबाक बयानों के लिए मशहूर हैं. (फोटो साभार: Ians)
हाइलाइट्स
अरविंद केजरीवाल दिल्ली विधानसभा चुनाव में हारे.विवेक अग्निहोत्री ने अरविंद केजरीवाल की हार पर तंज कसा.भाजपा ने दिल्ली में 48 सीटें जीतीं.
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (आप) को दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा. उन्हें भाजपा ने करारी शिकस्त दी. आप 22 सीटों पर सिमट गई, जबकि भाजपा 48 सीटें जीतने के बाद दिल्ली में सरकार बनाने को तैयार है. फिल्ममेकर विवेक रंजन अग्निहोत्री ने इंस्टाग्राम के स्टोरीज सेक्शन पर एक पोस्ट शेयर करके अरविंद केजरीवाल की हार पर तंज कसा है. उन्होंने लिखा, ‘हर सवाल का जवाब यहीं होगा. हर हिसाब-किताब यहीं होगा.’
विवेक रंजन ने दिल्ली विधानसभा की एक पुरानी तस्वीर भी शेयर की, जिसमें अरविंद केजरीवाल खड़े दिखाई दिए. नई दिल्ली विधानसभा सीट से अरविंद केजरीवाल को हार का सामना करना पड़ा है. वह नई दिल्ली सीट से 3,186 वोटों से हार चुके हैं. यहां से भाजपा के प्रत्याशी प्रवेश सिंह वर्मा ने जीत हासिल की है. विवेक रंजन सोशल मीडिया पर अक्सर नए-नए पोस्ट फैंस के साथ शेयर करते रहते हैं. उन्होंने इससे पहले दिल्ली विधानसभा चुनाव के दिन 5 फरवरी को एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें उन्होंने मतदाताओं के सामने एक कविता पेश करते हुए उनसे अपील की थी कि वे वोट डालने से पहले उनकी ‘रोशनी’ नाम की कविता को जरूर सुनें.
(फोटो साभार: Instagram@vivekagnihotri)
विवेक इंस्टाग्राम पर शेयर की गई कविता में ‘रोशनार्थी’ शब्द का इस्तेमाल करते नजर आए. उन्होंने मतदाताओं से कहा कि दिल्ली में विधानसभा चुनाव है. इसके साथ ही, उन्होंने ‘रेवड़ियां बांटने’ या ‘मुफ्त सुविधाओं’ की ओर भी इशारा किया था. विवेक अग्निहोत्री ने प्रदूषण का भी जिक्र किया था. विवेक रंजन अपनी कविता में ‘गोधूली बेला’, ‘रोशनार्थी’, सेठ जैसे शब्दों के साथ मतदाताओं के सामने अपनी ‘रोशनी’ कविता सुनाते नजर आए थे- ‘आजकल बहुत जल्दी ही गोधूली बेला में अंधेरा बढ़ने लगा है, धीरे-धीरे दिन का उजाला भी छटने लगा है, जहां थी थोड़ी रोशनी की उम्मीद, अब कोहरा बढ़ने लगा है. अब रोशनी सीधे नहीं आती. हर वक्त नहीं आती, ज्यादा देर नहीं आती. आती है तो एक ट्रेन के डब्बों से छरहराती रोशनी जैसी, जो पकड़ने में पकड़ नहीं आती. तुम चाहो या ना चाहो, रोशनी के अभाव को मानना ही पड़ेगा.’ विवेक अग्निहोत्री ने अपनी कविता में आगे बताया था कि यह समय लाभ लेने वालों या ‘रोशनार्थियों का युग’ है, इसलिए जनता को जागरूक रहना पड़ेगा.
First Published :
February 08, 2025, 23:17 IST
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