वॉरियर ऑफ इंडिया: गोली खाकर भी नहीं डिगे! जैश कमांडर को किया ढेर, पढ़िए शौर्य चक्र विजेता नीरज अहलावत की कहनी

वॉरियर ऑफ इंडिया: राजस्थान की वीरधरा में हमेशा ऐसे शूरवीर जन्मे हैं, जिन्होंने संकट की घड़ी में देश की रक्षा को खुद से ऊपर रखा है. ऐसे ही एक जांबाज भारतीय सैनिक थे शौर्य चक्र विजेता नीरज कुमार अहलावत, जिन्होंने अपनी जान पर खेल कर आतंकवादियों को मौत के घाट उतारा था. आज हमारी वॉरियर ऑफ इंडिया की खास सीरीज में इसी बहादुर सैनिक की कहानी हम आपको बताने वाले हैं.
सिपाही नीरज कुमार अहलावत ने जम्मू-कश्मीर के खतरनाक इलाकों में आतंकियों के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन में अद्म्य साहस और वीरता का परिचय देते हुए आतंकियों को जहन्नुम का रास्ता दिखा दिया था. उनकी वीरता ने पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया था. अपनी इसी बहादुरी के लिए उन्हें शांति काल में दिया जाने वाला भारतीय सेना का तीसरा सर्वोच्च वीरता सम्मान शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था.
बचपन से ही निडर और देशभक्ति के जज्बे से भरे थे नीरज
झुंझुनूं जिले के बुहाना उपखंड के मनोहरपुरा गांव में जन्मे नीरज कुमार बचपन से ही साहसी और निडर माने जाते थे. इनकी माता का नाम विनोद देवी है. स्कूल के दिनों से ही उनका मन रोमांच और देश सेवा की ओर खिंचता था. पढ़ाई के साथ-साथ उनके भीतर एक सपना पल रहा था, भारतीय सेना की वर्दी पहनकर देश की रक्षा करने का. इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की और आखिरकार देश की सेना में भर्ती होकर अपने गांव का नाम रोशन किया.
जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से हुआ आमना-सामना
नीरज कुमार जम्मू-कश्मीर में 34वीं बटालियन, राष्ट्रीय राइफल्स (RR) में तैनात थे. 20 जून 2020 का वह दिन उनके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घड़ी बन गया. कुलगाम जिले में आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली और एक बड़ा ऑपरेशन शुरू हुआ. स्थिति बेहद संवेदनशील थी, आतंकी आम नागरिकों को ढाल बनाकर भागने की कोशिश कर रहे थे. गोलियों की बरसात में भी नीरज के कदम नहीं डगमगाए. उन्होंने धैर्य रखा, सही मौके का इंतजार किया और जैसे ही आतंकियों की हरकत में चूक दिखी, नीरज ने सटीक फायरिंग कर जैश-ए-मोहम्मद के खतरनाक कमांडर तैयब को मौके पर ही ढेर कर दिया. यह भारतीय सेना के लिए बड़ी सफलता थी, क्योंकि तैयब लंबे समय से सुरक्षा बलों की हिट-लिस्ट में शामिल रहा था.
गोली लगी फिर भी दुश्मन से भिड़े रहे
पहले आतंकी को मार गिराने के बाद दूसरा आतंकी बौखला गया और उसने नीरज पर नजदीक से तीव्र फायरिंग शुरू कर दी. गोलियां लगीं, खून बहने लगा फिर भी नीरज ने अपनी पोज़ीशन नहीं छोड़ी. उन्होंने अद्भुत साहस दिखाते हुए उस आतंकी को भी घायल कर दिया और उसकी अत्याधुनिक M-4 असॉल्ट राइफल को बेकार कर दिया. उनकी इस वीरता की वजह से क्षेत्र में बड़ा आतंकी हमला होने से बच गया और आम नागरिकों की जान भी सुरक्षित रही. संकट, दर्द और जान के खतरे के बीच भी नीरज की हिम्मत जरा भी नहीं टूटी.
इसलिए दिया गया था शौर्य चक्र
सिपाही नीरज अहलावत को आतंकियों से आमना-सामना करते हुए दिखाए गए असाधारण साहस, युद्ध कौशल और ड्यूटी के प्रति समर्पण के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया. यह सम्मान उन वीरों को दिया जाता है जो शांति काल में भी जान पर खेलकर देश की रक्षा करते हैं. नीरज की वीरता ने साबित कर दिया कि राजस्थान की यह मिट्टी सिर्फ शहीद मेजर पीरू सिंह और शैतान सिंह जैसे महान योद्धाओं को ही नहीं, बल्कि आज भी ऐसे जांबाज सिपाही को जन्म दे रही है, जो हर परिस्थिति में राष्ट्र की रक्षा के लिए तैयार खड़े रहते हैं.



