वॉरियर्स ऑफ इंडिया: हेलीकॉप्टर क्रैश में भी निभाया धर्म, ये है शहीद मेजर विकास भांभू की जांबाज कहानी, जो दिल छू लेती है!

सीकर. राजस्थान की वीर भूमि ने भारत माता की रक्षा के लिए हमेशा ऐसे सपूत जन्मे हैं, जिन्होंने अपने साहस, कर्तव्य और बलिदान से इतिहास रचा है. ऐसे ही एक जांबाज भारतीय सैनिक थे शहीद मेजर विकास भांभू. इन्हें अरुणाचल प्रदेश के सियांग जिले में भेजा गया था, आज हमारी Warrior of India की खास सीरीज में इसी बहादुर सैनिक की कहानी हम आपको बताने वाले हैं.
हनुमानगढ़ जिले के रामपुरा उर्फ़ रामसरा गांव में जन्मे शहीद मेजर विकास भांभू भी ऐसे ही अमर योद्धा थे, भारतीय सेना में 14 वर्षों की सेवा के दौरान उन्होंने हर चुनौती को दृढ़ निश्चय और वीरता से पूरा किया. 21 अक्टूबर 2022 को अरुणाचल प्रदेश में हेलीकॉप्टर क्रैश में शहीद होने तक वे देश के लिए समर्पण की ऐसी मिसाल बन गए, जिसे सदियों तक याद किया जाएगा.
बचपन से ही था भारतीय सेना का जुनून
मेजर विकास भांभू बचपन से ही तेज दिमाग, अनुशासित और पढ़ाई में अव्वल रहे, उनके पिता भागीरथ भांभू बताते हैं कि विकास घंटों तक पढ़ते थे. उन्हें IIT की तैयारी करने के लिए कहा गया, लेकिन विकास ने स्पष्ट कहा—“मैं सिर्फ भारतीय सेना में ही जाऊंगा.” 12वीं कक्षा के साथ ही उन्होंने एनडीए की परीक्षा दी और चयनित होकर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने.
सेना में शामिल होते ही विकास भांभू ने अपना पराक्रम और प्रतिभा दिखा दी, जो भी टास्क मिले, वे पूरे जोश और समझदारी से पूरे किए. हर कोर्स में टॉपर रहने के कारण सेना ने उन्हें एविएशन ब्रांच में पायलट बनाने का निर्णय लिया. पायलट ट्रेनिंग के दौरान हुए चार बड़े कॉम्पिटिशन में भी वे चारों में टॉपर रहे. उनकी कार्यशैली और क्षमता के कारण वे सेना में जांबाज अधिकारी माने जाते थे.
मिशन के दौरान दिखाई अदम्य वीरता
21 अक्टूबर 2022 की सुबह अरुणाचल प्रदेश के सियांग जिले में उनके हेलीकॉप्टर को टोही मिशन पर भेजा गया, मेजर विकास और उनके को-पायलट मेजर मुस्तफ़ा बोहरा मिशन पूरा कर वापस लौट रहे थे कि अचानक हेलीकॉप्टर में आग लग गई. स्थिति भयावह थी… हेलीकॉप्टर घने आबादी वाले इलाके की ओर बढ़ रहा था. लेकिन भारतीय सेना के इन वीरों ने अपनी जान की परवाह किए बिना हेलीकॉप्टर को भीड़ से दूर पहाड़ी क्षेत्र की ओर मोड़ दिया, ताकि किसी भी नागरिक की जान जोखिम में न आए. इस निर्णय ने उनकी वीरता की पराकाष्ठा दिखा दी, हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया, लेकिन दोनों अधिकारियों ने अपने प्राणों की कुर्बानी देकर कई निर्दोष लोगों की जान बचा ली.
मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित
शहादत से कुछ समय पहले विकास ने अपने पिता को व्हाट्सऐप पर “GOOD BYE” लिखा था. पिता को तब अंदेशा नहीं था कि यह विदा हमेशा के लिए होगी. विकास की पत्नी श्रेया और छोटी बेटी ख्वाइश आज भी उनकी यादों में जी रही हैं, अपने अदम्य साहस, सर्वोच्च परंपरा और कर्तव्यपालन के लिए मेजर विकास भांभू को मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया. राष्ट्रपति भवन में उनकी पत्नी को यह सम्मान प्रदान किया गया, और पूरा राजस्थान गर्व से भर उठा. मेजर विकास भांभू की शहादत सिर्फ एक सैनिक का बलिदान नहीं, बल्कि उस परंपरा का विस्तार है जो राजस्थान के हर गांव में बसती है. जहां जन्म लेते ही बच्चे मातृभूमि के लिए जीना और मरना सीखते हैं. उनकी कहानी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी. उनकी वीरता, कर्तव्यनिष्ठा और साहस भारत माता की अमिट गाथाओं में सदैव स्वर्णिम अक्षरों में अंकित रहेगी.



