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राजस्थान में रिजका की खेती से डबल मुनाफा पाने के तरीके

Last Updated:November 14, 2025, 14:04 IST

रिजका की खेती राजस्थान के किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प बनती जा रही है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ के अनुसार, रिजका की उन्नत किस्में जैसे टाइप-9, आरएल-88, और सरसा-8 उच्च उत्पादन क्षमता, रोग प्रतिरोधक क्षमता और बेहतर हरे चारे की आपूर्ति के लिए जानी जाती हैं. सही बीज उपचार, जैसे राइजोबियम कल्चर से उपचारित बीजों का उपयोग और उचित सिंचाई व्यवस्था से किसानों को मुनाफा दुगना हो सकता है.Agriculture News

राजस्थान के कई जिलों में रबी फसलों की बुवाई के साथ रिजका की खेती तेजी से बढ़ रही है. पशुओं में चारे के रूप में उपयोग होने वाली यह फसल किसानों के लिए किसी एटीएम बैंक से कम नहीं है. पशुपालन क्षेत्र में लगातार रिजका की मांग बढ़ती जा रही है, कृषि विशेषज्ञ दिनेश जाखड़ ने बताया कि उन्नत तकनीकों का उपयोग कर इस खेती में किसान डबल मुनाफा कमा सकते हैं. इसके अलावा, इसकी खेती में उन्नत किस्मों का ही उपयोग करना चाहिए.

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रिजका की बुवाई से पहले बीज का राइजोबियम कल्चर से उपचार करना बहुत जरूरी है. यह कल्चर मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिरीकरण की प्रक्रिया को बढ़ाता है, जिससे पौधे अधिक हरे-भरे, मजबूत और पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं. राइजोबियम से उपचारित बीजों में अंकुरण बेहतर होता है और बाद में पौधों की विकास दर सामान्य से अधिक रहती है, इसके अलावा, इससे चारे की गुणवत्ता में भी सुधार आता है.

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एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ ने बताया कि रिजका की खेती के लिए दोमट या मध्यम किस्म की उपजाऊ मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. इसके अलावा, खेत में जल निकास की उचित व्यवस्था होनी चाहिए क्योंकि पानी का ठहराव फसल की जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है. बुवाई का उपयुक्त समय नवंबर माह माना जाता है. इसके अलावा, बुवाई करते समय हल्की नमी वाली जमीन में कूड़ या ड्रिल विधि का उपयोग करना किसानों के लिए फायदेमंद होता है. इससे बीज मिट्टी में समान रूप से फैलते हैं और पौधों का विकास बेहतर होता है.

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रिजका की सिंचाई व्यवस्था भी इसकी पैदावार को प्रभावित करती है. पहली सिंचाई बुवाई के 20 से 25 दिन बाद और इसके बाद 20–25 दिन के अंतराल पर करें। गर्मी के मौसम में सिंचाई का अंतराल कम करना पड़ सकता है. फसल में खरपतवार नियंत्रण भी जरूरी है क्योंकि शुरुआती अवस्था में खरपतवार पौधों की वृद्धि को प्रभावित करते हैं. इसके अलावा, समय पर गुड़ाई-निराई से पौधे मजबूत बनते हैं और उत्पादन में बढ़ोतरी होती है.

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ऐसे में, इस तरीके से यदि किसान रिजका की खेती करते हैं, तो उन्हें मुनाफा दुगना मिलता है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट के मुताबिक, इससे पशुपालकों को उच्च गुणवत्ता वाला हरा चारा मिलता है और डेयरी उत्पादन में भी सुधार देखने को मिलता है. इसकी मांग लगातार बढ़ती जा रही है, पशुपालक अपने पशुओं को स्वस्थ बनाने के लिए रिजका खिला रहे हैं, जिससे दुग्ध उत्पादन में भी वृद्धि होती है.

First Published :

November 14, 2025, 14:04 IST

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