‘हम यहीं रहना चाहते हैं…’ पहलगाम हमले के बाद अटारी बॉर्डर बंद, पाकिस्तान से आए हिंदू परिवारों ने सुनाया दर्द

Last Updated:April 26, 2025, 10:02 IST
भारत सरकार ने अटारी बॉर्डर बंद करने का ऐलान किया, जिससे पाक विस्थापित हिंदू परिवारों पर असर पड़ा है. जोधपुर में रह रहे परिवारों को भारत छोड़ने का आदेश दिया गया है. सदौरी देवी का परिवार भी प्रभावित है.X

सदौरी देवी के परिवार ने अपना सामान बांध वापस अपने वतन लौटने
हाइलाइट्स
अटारी बॉर्डर बंद होने से पाक विस्थापित हिंदू परिवार चिंतित हैं.भारत सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकों को 48 घंटे में भारत छोड़ने का आदेश दिया.बच्चों ने कहा कि वे भारत में ही रहना चाहते हैं.
जोधपुर. कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने अटारी बॉर्डर बंद करने का ऐलान कर दिया. इसका सबसे ज्यादा असर राजस्थान में रह रहे पाक विस्थापित हिंदू परिवारों पर पड़ रहा है. जो पाकिस्तान से विस्थापित होकर भारत आए थे. दो दिन पहले भारत सरकार की ओर सभी वीजा लेकर आए पाकिस्तानी नागरिकों को 48 घंटे में भारत छोड़ने का आदेश दिया था. बात अगर जोधपुर की करे तो यहां पर जो, पाक विस्थापितों रहते हैं उनके लिए बड़ी चुनौती और परेशानी बन गई है. इन्हीं में से एक है सादोरी देवी 55 साल की उम्र में ये 13 लोगों के परिवार के साथ एक महीने पहले यहां बसने की उम्मीद से जोधपुर आई थी लेकिन अब इन्हें डर है कि कहीं ये अपने परिवार से दूर ना हो जाए.
सदौरी बाड़मेर की सीमा से लगे पाकिस्तान के सांगड़ की रहने वाली हैं. उन्होंने बताया कि उनका 13 लोगों का परिवार 27 मार्च को यही सोच कर आया था कि जोधपुर में कुछ दिन ठहर जाएंगे, तब तक परिवार के बाकी लोगों को भी वीजा मिल जाएगा. वीजे के बाद वे भी यहां आ जाएंगे. लेकिन पहलगाम आतंकी हमले के बाद माहौल तनावपूर्ण है. अब परिवार जल्द से जल्द पाकिस्तान के लिए रवाना हो रहा है.
राजस्थान में रह रहे बड़ी संख्या में पाक विस्थापितबता दें कि पाकिस्तान से प्रताड़ित होकर भारत आए सबसे ज्यादा विस्थापित पश्चिमी राजस्थान में रह रहे हैं. इसमें बात की जाए तो जोधपुर, बाड़मेर व जैसलमेर सहित कई जिलों में बड़ी संख्या में पाक विस्थापित निवास कर रहे हैं. जोधपुर की बात करें तो यहां बड़ी संख्या में ऐसे परिवार जोधपुर में चौखा, राजीव गांधी आवासीय योजना, सुंदर बालाजी, गंगाणा, काली बेरी, मंडोर इत्यादि क्षेत्र में अस्थाई रूप से कच्ची बस्ती में रह रहे हैं. इनमें से अधिकांश को भारतीय नागरिकता नहीं मिली है, इसी वजह इन परिवारों को डर है कि कहीं उन्हें भी भारत छोड़ने को मजबूर न कर दिया जाए.
बच्चे नहीं जाना चाहते पाकिस्तानइसर ने बताया कि उनका इतिहास जोधपुर के बालेसर गांव से है. बालेसर में वंशावली भी है और पुश्तैनी जमीन भी है लेकिन दादा पाकिस्तान के सांगड़ में खेती-बाड़ी करते थे और बंटवारे के बाद वहीं रह गए. दादा से यहां के किस्से सुना करते थे. पाकिस्तान के हालातों को देखते हुए यहां रहने आए थे. इसर की पत्नी भागी ने बताया कि वu बड़े बेटे मनीष, अमेश, दिव्या, चंपा व विराम के साथ भारत आई हैं. उनका मन यहीं रहने का है, लेकिन बड़े बेटे मनीष की पत्नी पाकिस्तान में रह गई है. उनका वीजा लग गया होता तो हम कभी पाकिस्तान लौटने की नहीं सोचते. लेकिन अभी के हालातों में जल्द से जल्द वापस लौटना होगा.
भारतीय नागरिकता की आस में हजारों पाक हिंदू परिवारसीमांत लोक संगठन के हिंदू सिंह सोढा ने बताया कि यहां 3 हजार पाक विस्थापित रह रहे हैं. जब तक उन्हें भारतीय नागरिकता नहीं मिल जाती तब तक वह पाकिस्तानी नागरिक ही कहलाएंगे. भारत सरकार के इस आदेश के बाद सभी दहशत में हैं. सोडा ने बताया कि कई पाक विस्थापितों के कॉल आए हैं, वे कह रहे हैं कि स्थानीय अधिकारी फोन करके यह कह रहे हैं कि उनको पाकिस्तान लौटना होगा. ऐसे में हमने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि इन हिंदू परिवारों को शिथिलता मिलनी चाहिए. यह लंबे समय से भारत में रह रहे हैं, वहां जाकर उनकी जान जोखिम में आ जाएगी. मगर अब इस तरीके से उनको पाकिस्तान जाना पड़ रहा है तो दुख और दर्द उनके मन में भी है. मगर जो घटना हुई है उसकी निंदा वो भी करते हैं, मगर जिस तरीके से उस घटना का शिकार दिए हुए हैं तो कहीं ना कहीं दर्द उनके मन में आज भी देखने को मिलता है.
Location :
Jodhpur,Jodhpur,Rajasthan
First Published :
April 26, 2025, 09:53 IST
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‘हम यहीं रहना चाहते हैं…’ पाकिस्तान से आए हिंदू परिवारों ने सुनाया दर्द



