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गेहूं की पत्तियां पीली होने पर क्या करें? | Wheat Leaf Yellowing Treatment and Solutions 2026.

Last Updated:January 04, 2026, 13:34 IST

Wheat Farming Tips: गेहूं की पत्तियों का पीलापन फसल की पैदावार को कम कर सकता है. यूरिया और जिंक सल्फेट के छिड़काव या गोमूत्र व जीवामृत जैसे प्राकृतिक उपायों को अपनाकर किसान इस समस्या को दूर कर सकते हैं और अपनी आय बढ़ा सकते हैं.

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नागौर: वर्तमान समय में नागौर सहित अनेक क्षेत्रों में किसानों की गेहूं की फसल में एक आम लेकिन गंभीर समस्या देखने को मिल रही है, जिसे गेहूं की पत्तियों का पीला पड़ना कहा जाता है. शुरू में यह समस्या साधारण लगती है, लेकिन यदि समय रहते इसका समाधान नहीं किया गया तो धीरे-धीरे पूरा पौधा कमजोर हो जाता है और उत्पादन में भारी गिरावट आती है. अक्सर किसान इसे सामान्य ठंड या मौसम का प्रभाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि इसका वास्तविक कारण पोषक तत्वों की कमी या जड़ों की कमजोरी होती है.

गेहूं की पत्तियों का पीलापन आमतौर पर नीचे की पुरानी पत्तियों से शुरू होता है और धीरे-धीरे ऊपर की नई पत्तियों की ओर फैलता है. इससे पौधे की प्रकाश संश्लेषण करने की क्षमता घट जाती है, जिससे दाने सही तरह से नहीं भरते और बालियां कमजोर रह जाती हैं. यदि इस अवस्था में उचित उपचार न किया जाए तो किसानों को कम वजन वाले दाने और कम उपज का सामना करना पड़ता है. इसके प्रमुख कारणों में नाइट्रोजन और जिंक की कमी, लगातार पड़ने वाली ठंड, मिट्टी में अधिक नमी और असंतुलित खाद प्रबंधन शामिल है.

रासायनिक उपचार से पाएं त्वरित राहतयूरिया और जिंक का संतुलित छिड़काव गेहूं की पत्तियों के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है. यदि फसल में पीलेपन के लक्षण दिखाई दें, तो 100 लीटर पानी में 2 किलो यूरिया और 500 ग्राम जिंक सल्फेट मिलाकर घोल तैयार करें और फसल पर छिड़काव करें. मात्र 7 से 10 दिनों में पत्तियों का रंग दोबारा हरा होने लगता है. यदि छिड़काव संभव न हो, तो सिंचाई के समय पानी के साथ यूरिया और जिंक देना भी फायदेमंद होता है, जिससे पौधों को तुरंत नाइट्रोजन और जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व मिल जाते हैं.

हर्बल और प्राकृतिक देसी उपायगोमूत्र और नीम का अर्क गेहूं की फसल के लिए एक रक्षा कवच की तरह काम करता है. 10 लीटर गोमूत्र में 1 किलो नीम की पत्तियां उबालकर छान लें और इसे 100 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें, इससे पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. इसके अलावा पुरानी छाछ और गुड़ का घोल भी मिट्टी के सूक्ष्म जीवों को सक्रिय करता है. सिंचाई के साथ प्रति एकड़ 200 लीटर जीवामृत का प्रयोग करने से जड़ों का विकास बेहतर होता है और पौधा मिट्टी से पोषक तत्वों को अधिक कुशलता से सोख पाता है.

सिंचाई और बेहतर प्रबंधनगेहूं की फसल में सिंचाई का प्रबंधन पीलापन रोकने में अहम भूमिका निभाता है. फसल में 10 से 12 दिन के अंतराल पर आवश्यकतानुसार सिंचाई अवश्य करें, लेकिन खेत में जलभराव की स्थिति से बचें क्योंकि अधिक नमी भी जड़ों को नुकसान पहुंचाकर पीलापन बढ़ाती है. समय पर सही पहचान और चाहे रासायनिक हो या हर्बल, उचित उपचार अपनाकर किसान अपनी फसल की हरियाली वापस ला सकते हैं और बेहतर उत्पादन सुनिश्चित कर सकते हैं.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें

Location :

Nagaur,Nagaur,Rajasthan

First Published :

January 04, 2026, 13:34 IST

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गेहूं की फसल में पीलेपन का पक्का समाधान: इस प्रयोग से बढ़ाएं पैदावार,…

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