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जब इंदिरा गांधी के लिए नतमस्तक हो गया था वेनेजुएला, 18 घंटे में ही दिख गई भारत की ताकत, जानिए 58 साल पुराना किस्सा

लातिन अमेरिकी देश वेनेजुएला इन दिनों भारी उथल-पुथल और गहरे संकट के दौर से गुजर रहा है. वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिका सेना उठाकर ले गई और अब वहां डेल्सी रॉड्रीगेज़ को देश की कमान सौंपी गई है. इस दक्षिण अमेरिकी देश के साथ भारत के पुराने संबंध रहे हैं, जो इंदिरा गांधी के दौर में शुरू हुई थी. 10 अक्टूबर 1968 को तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री जब वेनेजुएला गई तो वहां उनका स्वागत देखने वाला था.

दोपहर के ठीक 12:45 बजे जब इंदिरा गांधी का प्लेन वेनेजुएला के सिमोन बोलीवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर लैंड किया तो वहां उत्साह की लहर दौड़ गई. हवाई अड्डा लोगों से खचाखच भरा था. वेनेजुएला के राष्ट्रपति राउल लियोनी और उनके कैबिनेट मंत्री स्वागत के लिए तैयार खड़े थे. जैसे ही इंदिरा गांधी विमान से उतरीं, सैन्य बैंड ने पहले भारतीय राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ बजाया, फिर वेनेजुएला का राष्ट्रीय गान. हवा में दोनों देशों के झंडे लहरा रहे थे, और भीड़ में उत्सव का माहौल था.

काराकस स्थित भारतीय दूतावास ने इंदिरा की यात्रा पर एक किताब भी प्रकाशित किया था. इसमें बताया गया है कि यह यात्रा इंदिरा गांधी के लंबे लैटिन अमेरिकी और कैरेबियन दौरे का हिस्सा थी, जो 23 सितंबर को कोलंबिया से शुरू हुई थी. ब्राजील, चिली, उरुग्वे और अर्जेंटीना भी उनके कार्यक्रम में शामिल थे. इस कारण वेनेजुएला में वह सिर्फ 18 घंटे ही रुक सकीं. फिर भी ये घंटे गर्मजोशी और भावनात्मक जुड़ाव से भरे थे.

इंदिरा गांधी ने तोड़ डाले प्रोटोकॉल

इंदिरा गांधी काले चेक वाली, सुनहरे धागों से बुनी हुई हरी रंग की साड़ी में नजर आईं. गले में मोतियों की माला, कलाई पर घड़ी और चेहरे पर मुस्कान… वे चमक रही थीं. जैसे ही वे सीढ़ियों से उतरीं, भीड़ ने तालियां बजानी शुरू कर दीं. वेनेजुएला के लोग भारत की स्वतंत्रता संग्राम से काफी प्रेरणा थे. वे अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाए. बच्चे, महिलाएं और भारतीय प्रवासी फूलों के गुलदस्ते लेकर खड़े थे. इंदिरा ने राष्ट्रपति लियोनी से प्रोटोकॉल तोड़ने की अनुमति मांगी और खुद भीड़ के पास जाकर गुलदस्ते स्वीकार किए.

सरकारी कार में सवार होने से पहले एक और खूबसूरत पल आया. एक छोटी भारतीय लड़की, एम. राव ने उन्हें गुलदस्ता भेंट किया. इंदिरा रुक गईं, मुस्कुराईं और उसे गले लगा लिया. राव यूनेस्को अधिकारी की बेटी थी. फिर जैसे ही उनकी कार रवाना हुई, एयरपोर्ट पर मौजूद भारतीयों ने सहज ही भारतीय राष्ट्रीय गान गाना शुरू कर दिया. हवा में भावुकता की लहर दौड़ गई.

वेनेजुएला-भारत के बीच बनीं पुल

काराकास पहुंचकर इंदिरा का पहला पड़ाव नेशनल पैंथियन था. वह वहां विदेश मंत्री के साथ सिमोन बोलीवर की समाधि पर पहुंचीं. वही बोलीवर, जिन्होंने स्पेनिश उपनिवेशवाद से वेनेजुएला को मुक्त कराया था. इंदिरा ने श्रद्धांजलि स्वरूप पुष्पांजलि अर्पित की. यहां भी भीड़ उमड़ी थी… लोग तालियां बजा रहे थे, ऑटोग्राफ मांग रहे थे.उस दिन बाद में दिए भाषण में इंदिरा ने कहा, ‘मैं लैटिन अमेरिका और अपने देश के बीच प्यार के पुल बनाने आई हूं.’

इंदिरा भारत और वेनेजुएला के लोगों के बीच घनिष्ठ संबंधों की इच्छा जताईं. राष्ट्रपति लियोनी ने जवाब में कहा कि दोनों देशों की वास्तविकताएं और उद्देश्य समान हैं… गरीबी से लड़ाई, आर्थिक असमानता का मुकाबला और विदेशी हस्तक्षेप से मुक्ति. दोनों ने संयुक्त घोषणापत्र जारी किया, जिसमें काराकास में भारतीय दूतावास खोलने, व्यापार, संस्कृति, तकनीक और विज्ञान में सहयोग की घोषणा की गई. उन्होंने विकसित देशों में धन के ध्रुवीकरण और विकासशील दुनिया की स्थिरता पर चिंता जताई.

वेनेजुएला यात्रा को लेकर इंदिरा ने क्या बताया?

भारत लौटकर इंदिरा गांधी ने लोकसभा में अपनी यात्रा का जिक्र किया. ‘यह भावुक अनुभव था कि भारत को इतने सम्मान और स्नेह से देखा जा रहा है,’ उन्होंने कहा. ‘दक्षिण अमेरिका हमें हमसे ज्यादा जानता है. महात्मा गांधी, रवींद्रनाथ टैगोर और जवाहरलाल नेहरू के नाम हर जगह जाने-पहचाने हैं.’ उन्होंने जोर देकर कहा कि दक्षिण अमेरिकी और कैरेबियन देशों से घनिष्ठ संबंध बनाना भारत के हित में है.

यह यात्रा उस दौर की याद दिलाती है जब भारत नया-नया आजाद हुआ था और अपने जैसे दूसरे देशों से रिश्ते जोड़ रहा था. औपनिवेशिक अनुभवों और स्वायत्तता की साझा आकांक्षाओं पर आधारित. कोल्ड वॉर की ध्रुवीकृत दुनिया से अलग, ये संबंध दक्षिण-दक्षिण सहयोग के शुरुआती बीज थे. आज दशकों बाद भारत-वेनेजुएला संबंध भले कम चर्चा में हों, लेकिन उनकी जड़ें गहरी हैं. दिल्ली के चाणक्यपुरी में सिमोन बोलीवर मार्ग या पश्चिम बंगाल के किसी गांव में एक प्राइमरी स्कूल… ये छोटे-छोटे निशान उस ऐतिहासिक 18 घंटों की गवाही देते हैं. एक दौर था जब दो दूर के देशों के बीच प्यार के पुल बन रहे थे.

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