बहीखाते गायब, कैश अनलिमिटेड! ट्रस्ट में इतना पैसा आया कहां से? ED ने खोली काले नेटवर्क की परत, छिपे थे कट्टरपंथी लिंक

Last Updated:December 04, 2025, 19:24 IST
Rajasthan News : राजस्थान में अलफुर्कान एजुकेशनल ट्रस्ट के जरिए चले मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का ED ने बड़ा पर्दाफाश किया. ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष सादीक़ खान पर कैश दान का दुरुपयोग कर विदेशी और कट्टरपंथी नेटवर्क से संपर्क बनाने के आरोप हैं. ट्रस्ट की फंडिंग, विदेशी यात्राओं और कई संगठनों से जुड़े लिंक जांच के दायरे में हैं. ED अब इस पूरे नेटवर्क के पैसों और वैचारिक कनेक्शन की गहराई से जांच कर रही है.
शंकर आनंद/जयपुर. राजस्थान में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए ED ने बीकानेर के अलफुर्कान एजुकेशनल ट्रस्ट (AET) के पूर्व अध्यक्ष मोहम्मद सदीक उर्फ़ सादिक़ खान को गिरफ्तार किया है. यह कार्रवाई सिर्फ एक ट्रस्ट या एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि उस पूरे तंत्र पर चोट मानी जा रही है, जिसके जरिए धार्मिक दान, विदेशी संपर्क और कैश नेटवर्क का इस्तेमाल संदिग्ध व कट्टरपंथी गतिविधियों में किया जा रहा था. जयपुर ज़ोनल ऑफिस की टीम ने उन्हें PMLA, 2002 के तहत गिरफ्तार कर 04 दिसंबर 2025 को स्पेशल PMLA कोर्ट में पेश किया, जहां कोर्ट ने 06 दिसंबर 2025 तक की ED कस्टडी मंज़ूर की है.
ED की शुरुआती जांच में खुलासा हुआ कि सादीक़ ने AET ट्रस्ट और मस्जिद-ए-आयशा के संचालन के नाम पर सार्वजनिक दान का भारी दुरुपयोग किया. ट्रस्ट के नाम पर बड़े पैमाने पर कैश में चंदा लिया जाता था, लेकिन उसका कोई रिकॉर्ड तैयार नहीं किया जाता. सारी नकद राशि उनके व्यक्तिगत कब्जे में रहती थी और उसे निजी, संदिग्ध और अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल किया जा रहा था. यही पैसा उनकी लगातार विदेशी यात्राओं का जरिया बना, जिन यात्राओं का कोई वैध वित्तीय आधार नहीं मिला.
पैसे का खेल कैसे चलता था- दान से लेकर कट्टरपंथ तकED के अनुसार ट्रस्ट में आने वाला चंदा पूरी तरह कैश में लिया जाता था. न रिसीट, न बहीखाता, न ऑडिट- पूरा सिस्टम सादीक़ के हाथ में चलता था. फिर इस कैश का उपयोग ऐसे कामों में होता था जिनका ट्रस्ट के उद्देश्य से कोई लेना-देना नहीं था. इन्हीं पैसों से उन्होंने बांग्लादेश, नेपाल, क़तर और ओमान जैसे देशों की यात्राएँ कीं. ED को संदेह है कि इन यात्राओं का मकसद धार्मिक-सामाजिक संबंध नहीं, बल्कि ऐसे नेटवर्क से संपर्क बनाना था जो कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने का काम करते हैं. बांग्लादेश यात्रा के दौरान सादीक़ मो. सलीम उर्फ़ सौरभ वैद्य से मिले, जिसे बाद में MP ATS ने हिज्ब-उत-तहरीर की गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया था. यह संपर्क ED के अनुसार इस नेटवर्क की गंभीरता को साबित करता है.
फंडिंग की जड़ तक पहुंची जांच- तीन राज्यों की संस्थाएँ रडार पर
दिल्ली ब्लास्ट के बाद जिस तरह अल फलाह यूनिवर्सिटी (फरीदाबाद) और महाराष्ट्र की इशातुल उलूम संस्था जांच एजेंसी के रडार पर आई थीं, अब उसी कड़ी में तीसरा नाम राजस्थान के बीकानेर स्थित अलफुर्कान एजुकेशनल ट्रस्ट का जुड़ गया है. ED को कई शिक्षण संस्थानों की फंडिंग में संदिग्ध विदेशी संपर्क, बांग्लादेशी नेटवर्क और कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े लिंक मिले हैं. AET का सीरिया कनेक्शन भी जांच का हिस्सा है और एजेंसी यह पता लगा रही है कि ट्रस्ट के जरिए किस स्तर पर चरमपंथी विचारधाराओं को वैचारिक या वित्तीय समर्थन दिया गया.
इतना पैसा आया कहां से और जाता कहां था?ED की अब तक की जांच के मुताबिक- ट्रस्ट में आने वाला दान पूरी तरह कैश में था. नकद रकम का कंट्रोल अकेले सादीक़ के पास था. ट्रस्ट की गतिविधियों पर खर्च होने की बजाय पैसा निजी उपयोग और संदिग्ध यात्राओं में लगता था. विदेशी संपर्क बढ़ाने का मकसद जांच में अभी स्पष्ट नहीं, लेकिन लिंक बेहद संवेदनशील पाए गए हैं. ED ने सादीक़ की कस्टडी लेकर अब उस पूरे नेटवर्क का पीछा शुरू किया है जिससे पैसा ट्रस्ट तक आता था और फिर कहां जाता था. एजेंसी का मानना है कि यह मामला सिर्फ फंडिंग का नहीं, बल्कि वैचारिक और आपराधिक गठजोड़ के बड़े खेल का हिस्सा है. आगे की कार्रवाई में और गिरफ्तारियाँ संभव हैं.
About the AuthorAnand Pandey
नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
Location :
Jaipur,Rajasthan
First Published :
December 04, 2025, 19:24 IST
homerajasthan
ट्रस्ट में इतना पैसा आया कहां से? ED ने खोली कट्टरपंथी लिंक का काला नेटवर्क!



