Tech

बच्चों के स्मार्टफोन में पेरेंटल कंट्रोल क्यों जरूरी है और कैसे लगाएं.

आजकल हर बच्चे के हाथ में स्मार्टफोन है. सुबह स्कूल जाते समय, दोपहर में खेलते हुए, या शाम को ट्यूशन से लौटते वक्त, फोन हमेशा साथ रहता है. हम मम्मी-पापा को लगता है कि बच्चा बस गेम खेल रहा है या दोस्तों से चैट कर रहा है, लेकिन बाहर की दुनिया में खतरे भी तो कम नहीं हैं.कभी-कभी एक छोटी सी गलती या अजनबी का धोखा बच्चे को मुश्किल में डाल देता है. ऐसे में अगर हम पहले से थोड़ी सावधानी रखें, तो बड़ा हादसा टल सकता है. फोन में पेरेंटल कंट्रोल लगाना बिल्कुल वैसा ही है जैसे बच्चे को स्कूल जाते समय ‘सड़क पार करते समय इधर-उधर देखना’ सिखाना.

यह कोई जासूसी नहीं, बल्कि प्यार और जिम्मेदारी है. सेट करने मे बस कुछ मिनट लगते हैं और बदले में सुकून मिलता है कि अगर कुछ गलत हुआ तो हम तुरंत पता लगा सकेंगे और मदद कर सकेंगे. ठीक वैसे ही जैसे उस अमेरिकी पिता ने अपनी बेटी को बचाया.

अमेरिका के टेक्सास में क्रिसमस के दिन एक डरावनी घटना हुई. 15 साल की एक लड़की अपने कुत्ते को घुमाने निकली थी. अचानक एक 23 साल का आदमी चाकू दिखाकर उसे जबरन अपनी गाड़ी में ले गया. लड़की घर नहीं लौटी तो माता-पिता बहुत परेशान हो गए.पिता ने तुरंत अपनी बेटी के फोन में लगे पेरेंटल कंट्रोल का इस्तेमाल किया.

इस फीचर से वे बेटी के फोन की लोकेशन ट्रैक कर सके. लोकेशन से पता चला कि फोन करीब 3 किलोमीटर दूर एक सुनसान जंगली इलाके में है. पिता फौरन वहां पहुंचे. वहां एक लाल पिकअप ट्रक में बेटी और कुत्ता थे, और आरोपी लड़की के साथ गलत व्यवहार कर रहा था.

फोन में पेरेंटल कंट्रोल सेटिंग क्यों है जरूरी?यह सब सिर्फ इसलिए संभव हुआ क्योंकि फोन में पेरेंटल कंट्रोल लगा था, जो लोकेशन दिखाता है. इस घटना से साफ है कि बच्चों के फोन में सेफ्टी फीचर लगाना कितना जरूरी है. इससे न सिर्फ बच्चे सुरक्षित रहते हैं, बल्कि इमरजेंसी में मदद मिल सकती है.

आइए अब जानते हैं कि फोन में पेरेंटल लॉक कैसे लगाएं, ताकि बच्चे सेफ रहें और उनकी एक्टिविटी ट्रैक की जा सकें. ज्यादातर फोन एंड्रॉयड या आईफोन होते हैं. दोनों में आसान तरीके हैं.

एंड्रॉयड फोन में (Google Family Link से):

अपने और बच्चे के फोन में Google Family Link ऐप डाउनलोड करें.
पैरेंट्स के फोन में अपना Google अकाउंट लॉगइन करें.
बच्चे के फोन में उसका गूगल अकाउंट बनाएं या लॉगइन करें (13 साल से कम उम्र के लिए पैरेंट्स कंट्रोल करते हैं).
ऐप में बच्चे के डिवाइस को लिंक करें.
अब आप लोकेशन ट्रैक कर सकते हैं, स्क्रीन टाइम लिमिट सेट कर सकते हैं, ऐप्स ब्लॉक कर सकते हैं, और बच्चे की एक्टिविटी देख सकते हैं.

आईफोन में (Screen Time और Find My से):

बच्चे के फोन में Settings > Screen Time पर जाएं.
Turn On Screen Time चुनें, फिर This is My Child’s iPhone चुनें.
पासकोड सेट करें (बच्चे को न बताएं).
Content & Privacy Restrictions ऑन करें. यहां ऐप लिमिट, कंटेंट ब्लॉक और प्राइवेसी सेटिंग्स करें.
लोकेशन के लिए Find My ऐप ऑन करें और Family Sharing से अपना अकाउंट जोड़ें. इससे रीयल-टाइम लोकेशन दिखेगी.

ये फीचर फ्री हैं और आसानी से लग जाते हैं. इससे बच्चे गलत कंटेंट से दूर रहते हैं, ज्यादा समय फोन पर नहीं बिताते, और जरूरत पड़े तो लोकेशन से मदद मिल सकती है. जैसे उस अमेरिकी पिता को मिली. माता-पिता को चाहिए कि बच्चों से इस बारे में बात करें और नियम बनाएं. इससे बच्चे सुरक्षित और जिम्मेदार बनेंगे.

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj