इस 140 देशों में फैली संस्था का नेतृत्व कर रहीं महिलाएं, 1937 में हुई थी स्थापना, आज 8 हजार से भी अधिक केंद्र

Last Updated:March 08, 2025, 14:48 IST
Womens day special : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, 140 देशों में फैला, महिलाओं द्वारा संचालित सबसे बड़ा संगठन है. 101 वर्षीय दादी रतनमोहिनी मुख्य प्रशासिका हैं.X

ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय
हाइलाइट्स
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी 140 देशों में फैला संगठन हैसंस्था की मुख्य प्रशासिका 101 वर्षीय दादी रतनमोहिनी हैंसंस्थान के 8 हजार से अधिक केंद्र हैं
सिरोही : अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर दिया जाता है. आज हम आपको एक ऐसी महिलाओं द्वारा संचालित हो रही एक ऐसी संस्था के बारे में बताने जा रहे हैं, जो अध्यात्म के साथ ही महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सरोकार के क्षेत्र में काम कर रही है. हम बात कर रहे हैं 140 देशों में फैली प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की.
संस्थान की वरिष्ठ सदस्य और अंतरराष्ट्रीय मोटिवेशनल स्पीकर बीके ऊषा दीदी ने लोकल-18 से खास बातचीत में बताया कि इस संस्थान से जुड़ी महिलाएं न केवल खुद का जीवन बदलने का काम कर रही है, बल्कि लाखों लोगों के जीवन में बदलाव, उम्मीद और आशा की नई किरण बन रही हैं. सम्भवत: यह विश्व का सबसे बड़ा एकमात्र महिलाओं द्वारा संचालित संगठन हैं, जिसकी छोटे स्तर से लेकर मुख्य प्रशासिका तक नेतृत्व का काम महिलाएं कर रही है. वर्तमान में 101 वर्षीय राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी इस संस्था की मुख्य प्रशासिका हैं.
5 हजार से अधिक केंद्रों का संचालन करती है महिलाएंआज संस्थान में 50 हजार से अधिक महिला सदस्य समर्पित होकर संस्थान में सेवाएं दे रही हैं. संस्था के 140 देशों में 8 हजार से अधिक केंद्र हैं. वर्ष-1937 में उस जमाने के हीरे-जवाहरात के प्रसिद्ध व्यापारी दादा लेखराज कृपलानी ने नारी सशक्तिकरण की नींव रखी थी. नारी उत्थान को लेकर उनका दृढ़ संकल्प ही था कि उन्होंने अपनी सारी जमीन-जायजाद बेचकर एक ट्रस्ट बनाया और उसमें संचालन की जिम्मेदारी नारियों को सौंप दी. लोगों में परिवारवाद का संदेश न जाए, इसलिए बेटी तक को संचालन समिति में नहीं रखा.
माउंट आबू में है संस्थान का मुख्यालयवर्ष 1950 में संस्थान का अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय राजस्थान के सिरोही जिले के माउंट आबू में बनाया गया. जहां से बहुत ही छोटे स्तर पर विधिवत भारत सहित विश्वभर में सेवाओं की शुरुआत की गई. पहले संगठन का नाम ओम मंडली था. 1950 में बदलकर इसे प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय किया गया. उस वक्त मात्र 350 लोग ही इसके समर्पित सदस्य थे.
सारी जिम्मेदारी सम्भालती है बहनें, पुरुष सदस्य केवल सहयोगीसंगठन की सारी अहम जिम्मेदारियों को बहनें संभालती हैं और पुरुष सदस्य उनके सहयोगी के रूप में साथ निभाते हैं. संस्थान में डॉक्टर, इंजीनियर, साइंटिस्ट, वकील, प्रोफेसर, जज, आईएएस से लेकर सिंगर तक जुड़े हुए हैं, जिन्होंने बाकायदा प्रोफेशनल डिग्री लेने के बाद आध्यात्म की राह अपनाई और आज समर्पित रूप से संस्थान में सेवाएं दे रही हैं.
20 लाख नियमित विद्यार्थीसंस्थान की 50 हजार ब्रह्माकुमारी बहनें दुनियाभर के सेवा केंद्रों पर समर्पित रूप से तन-मन-धन के साथ अपनी सेवाएं दे रही हैं. 20 लाख से अधिक लोग इसके नियमित विद्यार्थी हैं, जो संस्थान के नियमित सत्संग मुरली क्लास को अटेंड करते हैं. दो लाख से अधिक ऐसे युवा जुड़े हुए हैं, जो बालब्रह्मचारी रहकर संस्थान से जुड़कर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे और सेवा के लिए राजयोग एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन के तहत 20 प्रभागों की स्थापना की है.
योग, नशामुक्ति, यौगिक खेती के जागरूकता अभियानसंस्थान की ओर से कई सामाजिक सरोकार के कार्यक्रम चलाकर समाज में अच्छे परिवर्तन लाने का काम किया जा रहा है. इनमें नशामुक्ति, जैविक-यौगिक खेती, पर्यावरण संरक्षण, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, युवा जागृति, महिला सशक्तिकरण, पौधारोपण जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं. संस्थान द्वारा चलाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय शिवशक्ति लीडरशिप इनिशिएटिव की इंडिया फोकल पर्सन डॉ. सविता ने महिलाओं को आगे लाने के लिए चलाए जा रहे शिवशक्ति लीडरशिप कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि संस्थान की ओर से आगामी दिनों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवार्ड हासिल कर चुकी महिलाओं को एक मंच पर लाया जाएगा.
Location :
Sirohi,Rajasthan
First Published :
March 08, 2025, 14:48 IST
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इस 140 देशों में फैली संस्था का नेतृत्व कर रहीं महिलाएं, 1937 में हुई स्थापना



