वर्ल्ड फेमस वेडिंग डेस्टिनेशन उदयपुर! लाखों से शुरू हुआ शादी का कारोबार, कैसे पहंचा बिलियन तक

उदयपुर. आज जब उदयपुर में एक के बाद एक अरबपतियों की शादियां हो रही है और पूरा शहर शाही ठाठ-बाट से चमक रहा है, तो इस चकाचौंध के पीछे एक दूरदर्शी शख्स का 40 साल पुराना सपना छिपा है. वे कोई और नहीं बल्कि स्व. श्रीजी अरविंद सिंह मेवाड़ हैं. मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के प्रमुख रहे अरविंद सिंह मेवाड़ ने 1980 के दशक में ही उदयपुर को “विश्व का सबसे बड़ा डेस्टिनेशन वेडिंग हब” बनाने का सपना देख लिया था. उस समय लोगों ने इसे मजाक ही समझा. सवाल उठे कि कोई अपने घर-गांव छोड़कर उदयपुर क्यों शादी करने आएगा? होटल वाले हंसे, व्यापारी चिढ़े, समाज ने आलोचना की. लेकिन श्रीजी अडिग रहे. उन्होंने कहा था कि मेरे बाद लोगों को मेरी सोच की गहराई समझ आएगी.
उदयपुर में डेस्टिनेशन वेडिंग्स का चलन धीरे-धीरे उभरना शुरू हुआ. उस समय शादियों का औसत बजट 10-20 लाख तक का हुआ करता था. बड़े होटल्स और हेरिटेज प्रॉपर्टीज में शादियां होती थीं, लेकिन संख्या बेहद कम थी. स्थानीय वेडिंग प्लानर्स, फ्लोरिस्ट्स, डेकोरेटर्स और फोटोग्राफर्स के लिए यह एक नया क्षेत्र था, जिसमें संभावनाएं तो थीं, लेकिन आकर्षण और मांग सीमित थी. आज उनके पुत्र डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ गर्व से कहते हैं कि पिताजी ने 40 साल पहले जो सपना देखा था, वह आज साकार हो रहा है. पिछले 15 सालों में उदयपुर ने जो उड़ान भरी है, वह दुनिया देख रही है. आज यहां शादी का कारोबार अरबों रुपये का हो चुका है. लाखों रुपये से शुरू हुआ यह सफर अब बिलियन डॉलर इंडस्ट्री बन गया है.
ग्लोबल वेडिंग डिप्लोमेसी का केन्द्र बन चुका है उदयपुर
लक्ष्यराज सिंह आगे बताते हैं कि पिताजी की सोच थी कि विदेशों में बसे भारतीय अपनी जड़ों से जुड़ें. डेस्टिनेशन वेडिंग के जरिए वे मेवाड़ की संस्कृति, परंपरा और आतिथ्य को महसूस करें. आज यही हो रहा है. अमेरिका, दुबई, लंदन से लोग आते हैं, चार दिन मेवाड़ी राजसी अंदाज में रहते हैं और जाते-जाते खुद को मेवाड़ी कहने लगते हैं. यह केवल शादी नहीं, वेडिंग डिप्लोमेसी है. उदयपुर अब केवल डेस्टिनेशन वेडिंग कैपिटल ही नहीं, बल्कि ग्लोबल वेडिंग डिप्लोमेसी का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है. एक शादी से हजारों लोगों को रोजगार मिलता है. जिसमें फूल वाले, टेंट वाले, बैंड-बाजा, डिजाइनर, फोटोग्राफर, होटल, ट्रांसपोर्ट से लेकर छोटे-छोटे कारीगर तक शामिल हैं. पर्यटन को भी साल भर ऑक्सीजन मिलती है.
दुनियाभर में भारतीय संस्कृति का लहरा रहा है परचम
स्व. अरविंद सिंह मेवाड़ आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन इस सप्ताह उदयपुर में हो रही एक और भव्य विदेशी-अरबपति शादी के बीच उनके पुत्र लक्ष्यराज सिंह की आंखें नम हैं. वे कहते हैं कि इस चमक-दमक में पिताजी की कमी सबसे ज्यादा खल रही है. वे देखते तो कितना खुश होते. आज उदयपुर उनके पदचिन्हों पर चलकर इतिहास रच रहा है. एक सपना जो कभी नामुमकिन लगा था, आज सच होकर दुनिया को बता रहा है. मेवाड़ की शान और भारतीय संस्कृति का परचम लहरा रहा है.



