World Organ Donation Day: एक इंसान बचा सकता है 8 लोगों की जिंदगी, एक्सपर्ट से जानिए कैसे

World Organ Donation Day: 28 साल के वीरु कुमार तब दिल्ली में बीएसएफ में तैनात थे. करीब 6-7 साल से लिवर की बीमारी से जूझ रहे थे. बीएसएफ अस्पताल से उन्हें रेफर कर दिया गया. उन्हें आईएलबीएस में भर्ती कराया गया. वह आईयूसी में एडमिट थे. अब डॉक्टरों के पास सिर्फ एक ही रास्ता बना था कि किसी तरह से उन्हें कोई डोनर मिल जाए और लिवर डोनेट कर दे. इसी दौरान उसी हॉस्पिटल में एक फैमिली अपने ब्रेन डेड पेशेंट के ऑर्गन्स डोनेट करने के लिए तैयार हो गई. जिसके बाद तुरंत बाद वीरु कुमार की लिवर ट्रांसप्लांट कर दिया गया और उन्हें नई जिंदगी मिल गई. वीरु अब 40 साल के हो गए चुके हैं और गुवाहाटी में बीएसएफ में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
इसी तरह मेरठ की अपूर्वा को भी लिवर की बीमारी हो गई थी. महज 25 साल की उम्र में ही उनको इस बीमारी ने ऐसा बना दिया कि वह जिंदगी मौत के बीच झूलने लगीं. इसी बीच किसी तरह वह डॉ अंकुर गर्ग के संपर्क में आईं और डॉ अंकुर ने एक ब्रेन डेड पेशेंट की फैमिली से ऑर्गन डोनेट करने का आग्रह किया. जिसके लिए वह लोग तैयार हो गए इस तरह अपूर्वा का लिवर ट्रांसप्लांट हो गया. जिसके बाद उन्हें नई जिंदगी मिल गई. आज अपूर्वा शादीशुदा हैं और उनके दो बच्चे भी खुशहाल जीवन जी रहे हैं.
इन दो कहानियों के जरिये समझा जा सकता है कि ऑर्गन डोनेशन से कितनी जिंदगियों को बचाया जा सकता है. लेकिन देश दुनिया में इसको लेकर पर्याप्त जागरूकता नहीं होने के कारण इस ओर बहुत कम लोग ही ध्यान दे पाते हैं.
सबसे अधिक ऑर्गन डोनर कहां
सनार इंटरनेशनल हॉस्पिटल में एचपीबी सर्जरी व लिवर ट्रांसप्लांट डिपार्टमेंट के एचओडी सीनियर कंसल्टेंट डॉ अंकुर गर्ग बताते हैं कि दुनिया में अभी ऑर्गन डोनेशन का रेशियो महज 0.5 व्यक्ति प्रति मिलियन है. मतलब एक मिलियन लोगों में से सिर्फ 0.5 प्रतिशत लोग ही ऑर्गन डोनेट करते हैं. ऑर्गन डोनेशन के मामले में सबसे आगे स्पेन है. यहां का ऑर्गन डोनेशन का रेशियो 50 व्यक्ति प्रति मिलियन है. वहीं यूएस में यह आंकडा प्रति मिलियन 30-32 है.
दो तरह से कर सकते हैं ऑर्गन डोनेट
डॉ अंकुर बताते हैं कि ऑर्गन डोनेशन को लेकर कई तरह की सामाजिक जटिलताएं हैं. जिसकी वजह से तमाम लोगों के ऑर्गन जो किसी के काम आ सकते हैं, वह बेकार हो जाते हैं. डॉ अंकुर की मानें तो एक डोनर 8 लोगों को नई जिंदगी दे सकता है. वह कहते हैं कि किसी भी इंसान की दोनों किडनियां दो लोगों के काम आ सकती हैं इसी तरह लिवर दो लोगों के काम आ सकता है वैसे ही हार्ट, लंग्स, पेनक्रियाज, इंस्टाइंस भी जरूरतमंद मरीजों को डोनेट किया जा सकता है.
किन लोगों के अंग होते हैं डोनेट
डॉ अंकुर गर्ग कहते हैं कि दो तरह के लोगों के ऑर्गन्स डोनेट किए जाते हैं. एक तो जो भी मरीज अस्पताल में ब्रेन डेड हो जाते हैं उनके परिजनों की सहमति से उनके ऑर्गन्स डोनेट कराए जाते हैं जिससे किसी दूसरे जरूरतमंद इंसान की जिंदगी बचाई जा सके. हालांकि जागरूकता के अभाव में तमाम लोग इसके लिए राजी नहीं होते हैं. भारत में अभी भी ब्रेन डेड पेशेंट के ऑर्गन्स बेकार हो जाते हैं. लेकिन लोग ऑर्गन डोनेशन के लिए जल्दी तैयार नहीं होते. डॉ अंकुर कहते हैं इसी को देखते हुए हमने ‘जिंदगी फिर से’ नाम का एक अभियान चलाया है. जिससे लोगों को इसके बारे में जागरूक किया जा सके. एक दूसरी प्रक्रिया में ब्लड रिलेशन के लोग एक दूसरे को अपने ऑर्गन्स डोनेट कर सकते हैं. अमूमन ब्रेन डेड मरीजों के ऑर्गन्स डोनेट करने के लिए 10 से 12 घंटे का समय पर्याप्त माना जाता है.
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Tags: Health News, Life style, Organ Donation
FIRST PUBLISHED : August 13, 2023, 07:43 IST