न्यू ईयर पर घूमने का बना रहे हैं प्लान, इस हिल स्टेशन की यात्रा होगी यादगार, जानें यहां के टॉप टूरिस्ट स्पॉट – Rajasthan News

Last Updated:December 29, 2025, 06:28 IST
New Year Celebration: राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू अपनी प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए पर्यटकों की पहली पसंद बना हुआ है. नक्की झील की बोटिंग और बाजार, गुरुशिखर का आध्यात्मिक महत्व, सनसेट प्वाइंट का मनमोहक दृश्य और देलवाड़ा जैन मंदिर की अद्भुत शिल्पकला सैलानियों को खासा आकर्षित करती है. प्रकृति, आस्था और रोमांच का यह संगम माउंट आबू को एक संपूर्ण पर्यटन स्थल बनाता है.
हिल स्टेशन माउंट आबू का हृदय स्थल मानी जाने वाली नक्की झील राजस्थान का एक प्रसिद्ध टूरिस्ट स्पॉट है. राज्य की सबसे ऊंचाई पर बनी इस झील में शिकारा बोट और पेडल बोट के जरिए सैलानी प्राकृतिक वादियों के बीच बोटिंग का आनंद ले सकते हैं. झील के आसपास टहलते हुए पर्यटक कई खूबसूरत व्यू पॉइंट भी देख सकते हैं. नक्की झील से पैदल दूरी पर टॉड रॉक, रघुनाथ मंदिर और हनीमून प्वाइंट जैसे दर्शनीय स्थल स्थित हैं. प्राकृतिक सुंदरता और शांति का यह संगम पर्यटकों को खास आकर्षित करता है.

नक्की झील पर अब पर्यटक बोटिंग के साथ-साथ आसपास के बाजारों में खरीदारी का भी आनंद ले सकते हैं. यहां के मार्केट में कई यूनिक और एंटिक आइटम उपलब्ध हैं, जो सैलानियों को खूब आकर्षित करते हैं. खान-पान के शौकीनों के लिए भी नक्की झील के आसपास कई विकल्प मौजूद हैं. नक्की लेक के परिक्रमा पथ पर बने अनेक दर्शनीय स्थल पर्यटकों को खासा पसंद आते हैं. झील, बाजार और घूमने की जगहों का यह संगम नक्की झील को माउंट आबू का प्रमुख आकर्षण बनाता है.

अरावली पर्वतमाला की सबसे ऊंची चोटी माउंट आबू से मात्र 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यह स्थान समुद्रतल से 1722 मीटर यानी करीब 5650 फीट की ऊंचाई पर बना हुआ है. यहां एक प्रसिद्ध व्यू प्वाइंट और भगवान दत्तात्रेय का मंदिर स्थित है. इस ऊंचे स्थान से अरावली पर्वतमाला के बेहद सुंदर और मनमोहक नजारे देखने को मिलते हैं. चारों ओर फैली पहाड़ियों और हरियाली का दृश्य पर्यटकों को खासा आकर्षित करता है और यह स्थान माउंट आबू यात्रा का अहम हिस्सा माना जाता है.
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गुरुशिखर पर्यटन के साथ-साथ धार्मिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण स्थल है. यहां आने के लिए पर्यटकों को किसी प्रकार की प्रवेश फीस नहीं देनी पड़ती है और पूरे क्षेत्र में नि:शुल्क भ्रमण किया जा सकता है. मान्यता है कि इसी स्थान पर ऋषि दत्तात्रेय ने कई वर्षों तक तपस्या की थी. आज भी यहां भगवान दत्तात्रेय की गुफा और धुना मौजूद है. इस पवित्र स्थल पर दर्शन के लिए हर वर्ष देशभर से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं, जिससे गुरुशिखर की धार्मिक महत्ता और बढ़ जाती है.

माउंट आबू की नक्की लेक से करीब 2 किलोमीटर दूर स्थित सनसेट प्वाइंट पर पर्यटक शाम के समय परिवार और दोस्तों के साथ डूबते सूरज के मनमोहक नजारे का आनंद ले सकते हैं. यहां प्रवेश के लिए मेन गेट पर फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से टिकट लेना होता है, जिसके बाद करीब 1 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है. चाहें तो पर्यटक घुड़सवारी करते हुए भी सनसेट प्वाइंट तक पहुंच सकते हैं. सनसेट रोड पर कई स्थानों पर घुड़सवारी की सुविधा उपलब्ध है, जो सैर को और रोमांचक बना देती है.

माउंट आबू के देलवाड़ा में स्थित जैन मंदिर को राजस्थान का ताजमहल भी कहा जाता है, क्योंकि इसकी स्थापत्य कला की तुलना ताजमहल से की जाती है. मंदिर की बारीक नक्काशी और अद्भुत कलाकृतियां न केवल जैन समाज बल्कि देशभर से आने वाले पर्यटकों को भी खासा आकर्षित करती हैं. सफेद संगमरमर से बने इस मंदिर समूह का निर्माण 11वीं से 13वीं शताब्दी के बीच हुआ था. उत्कृष्ट शिल्पकला और धार्मिक आस्था का यह संगम देलवाड़ा जैन मंदिर को माउंट आबू का प्रमुख दर्शनीय स्थल बनाता है.
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December 29, 2025, 06:28 IST
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न्यू ईयर पर चाहिए सुकून और रोमांच, राजस्थान का यह हिल स्टेशन है बेस्ट ऑप्शन



