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बिना किसी बड़ी बीमारी के फेल हो रही किडनी, 15 से 35 साल के युवा हो रहे शिकार, वजह जान चौंक जाएंगे आप!

Last Updated:October 28, 2025, 08:20 IST

Kidney Dysfunction: किडनी खराब होने के पीछे बड़े कारण होते हैं लेकिन कई बार इन कारणों के बिना ही ये डैमेज होने लगती है. दिल्ली के स्पेशलिस्ट डॉक्टर ने इसके पीछे की वजह बतायी और सावधानी रखने की सलाह भी दी.

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नई दिल्ली. ज्यादा पानी पीने से किडनी हेल्दी रहती है, ये तो आपने सुना होगा, लेकिन पानी ही लोगों की किडनी खराब भी कर रहा है, यह सुनकर शायद आप चौंक जाएंगे. अस्पतालों में अब किडनी से जुड़ी एक नई बीमारी तेजी से बढ़ रही है, जिसने डॉक्टरों के होश उड़ा दिए हैं. इस बीमारी को क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD of unknown) कहा जाता है, जिसमें मरीज को न डायबिटीज होती है, न ही हाई ब्लड प्रेशर और न ही किडनी में पथरी या गांठ होती है.

इन सबके बावजूद लोगों की किडनी फेल हो रही है. डॉक्टर जांच में पा रहे हैं कि ऐसे मरीजों की किडनी सिकुड़कर छोटी हो रही है. शुरुआती स्टडी में यह बात सामने आई है कि कुछ हिस्सों का पानी ही लोगों की किडनी खराब कर रहा है.

बिना बीमारी के हो रही किडनी खराबइस पर अपोलो इंद्रप्रस्थ हॉस्पिटल के वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट और किडनी विशेषज्ञ डॉ. जयंत कुमार ने बताया कि आमतौर पर किडनी खराब होने का कारण डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर होता है, जो 50 से 80 वर्ष की उम्र के लोगों में देखा जाता है. लेकिन अब बिना इन बीमारियों के भी लोगों की किडनी खराब हो रही है.

ये है संभावित वजहडॉ. जयंत के मुताबिक, बिना ब्लड प्रेशर और डायबिटीज के, 15 से 40 साल तक के युवाओं में किडनी खराब होने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. जब ऐसे मरीजों की जांच की जाती है, तो उनकी किडनी सिकुड़ी और छोटी मिलती है. इसके बाद केवल डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प बचता है. डॉक्टरों का कहना है कि तमाम जांचों में यह पाया गया है कि कुछ जगहों का पानी दूषित है.

जांच की जरूरतइसमें या तो अधिक फर्टिलाइजर का इस्तेमाल किया जा रहा है या फिर भारी मेटल मिले हुए हैं, जो शरीर में जाकर सीधे किडनी को नुकसान पहुंचा रहे हैं. कई गांवों में 15-20 लोग किडनी के मरीज हैं, जो पानी की खराब गुणवत्ता की ओर इशारा करता है. इसके लिए सरकार को जरूरी कदम उठाने चाहिए और उन इलाकों की जांच करनी चाहिए, जहां किडनी के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं.

ये तीन जांच जरूर करवा लेंडॉ. जयंत के अनुसार, क्रॉनिक किडनी डिजीज ऑफ अननोन के लक्षण शुरुआत में पहचानना मुश्किल होता है. ज्यादातर मरीज जब डॉक्टर के पास आते हैं, तब तक वे किडनी फेल के पांचवें स्टेज पर पहुंच चुके होते हैं. इसलिए जरूरी है कि समय-समय पर ये तीन जांचें जरूर करवाएं – किडनी अल्ट्रासाउंड, किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT), यूरिन रूटीन टेस्ट.

इन तीनों जांचों से किडनी में हो रही गड़बड़ी का शुरुआती पता लगाया जा सकता है और समय रहते इलाज शुरू किया जा सकता है. इससे मरीज डायलिसिस और किडनी ट्रांसप्लांट जैसी बड़ी प्रक्रियाओं से बच सकता है. हालांकि बीमारी का सही समय पर पकड़ में आना जरूरी है.

Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की … और पढ़ें

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October 28, 2025, 08:20 IST

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बिना किसी बड़ी बीमारी के फेल हो रही किडनी, 15 से 35 साल के युवा हो रहे शिकार!

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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