Rajasthan

Jail Products: सुनकर पक्का उड़ेंगे आपके होश, आखिर जेल में ये क्या कर रहे कैदी? प्रशासन ने बेच डाला सब सामान

बीकानेर. बीकानेर जेल में बैठे बंदी भी मसाले और कपड़े सहित कई घरेलू सामान बना रहे है. इसके लिए जेल में कपड़ा निर्माण इकाई बनाई गई है. जहां जेल बैठे कैदी सात से आठ घंटे काम कर रहे है. अब इन कैदियों के हाथ से बने उत्पाद को दूसरी जेलों में भी भेजा जाएगा. जेल में तैयार इन उत्पादों को बाद में आम लोगों को भी बेचा जाएगा.

लगाई गई प्रदर्शनी   जिला एवं सत्र न्यायाधीश अतुल कुमार सक्सेना ने बताया कि जेल में बैठे बंदी अपने हाथों से उत्पाद बना रहे है. इनमें  लोहे का पीढ़ा, हैंडमेड पेंटिंग, मसाले, इको फ्रेंडली पेन, कपड़े, कुर्ते, लोहे के चूल्हे, दरियां, फिनायल और सिंक झाड़ू आदि प्रदर्शन एवं विक्रय के लिए रखा गया. इसके लिए प्रदर्शनी भी लगाई गई.

अधिकारियों ने बेचे बंदियों द्वारा बनाए गए सामान केंद्रीय कारागृह के बंदियों द्वारा बनाए गए उत्पादों की प्रदर्शनी ‘आशायें’ का उद्घाटन जिला एवं सत्र न्यायाधीश अतुल कुमार सक्सेना, जिला कलक्टर नम्रता वृष्णि तथा पुलिस अधीक्षक कावेंद्र सागर ने किया. लगभग दो घंटे में प्रदर्शनी का समूचा समान विक्रय हो गया. पुलिस विभाग के कैलाश सांदू, कुलदीप और धीरेन्द्र सहित अन्य अधिकारियों ने बंदियों द्वारा बनाए गए उत्पाद क्रय किए.

 कपड़े तैयार करने के लिए बंंदियों को प्रशिक्षणबीकानेर मंडल कारागार में एक हजार से ज्यादा बंदी हैं. इनमें सजायाफ्ता बंदियों की संख्या 600 से अधिक है. खादी व सूत के कपड़े बनाने के लिए पहले चरण में 8 बंदियों को लगाया गया है. खादी के कपड़े बनाने के लिए बंंदियों को प्रशिक्षण दिया गया है. इन्हें खादी व सूत के कपड़े बनाने में महारत हासिल है. कपड़े बनाने के बदले में बंदियों को 159 रुपए प्रतिदिन पारिश्रमिक मिलता है.

कैदियों को स्वालंबी बनाने का प्रयासइस अवसर पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सक्सेना ने कहा कि केंद्रीय कारागृह प्रशासन की ओर से बंदियों के हुनर को पहचानते हुए उन्हें स्वालंबी बनाने का प्रयास किया गया है. यह उनके पुनर्वास के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण साबित होगा. उन्होंने कहा कि कारागृह प्रशासन द्वारा किया जा रहे नवाचार समाज के लिए नजीर है.

घरेलू सामान हो रहा तैयार वे बताते है कि सिंक झाड़ू 24 रुपए, फिनायल 22 रुपए, 5 लीटर फिनायल 110 रुपए लीटर, हैंडमैड पेंटिंग 622 रुपए, धनिया पाउडर 130 रुपए किलो, हल्दी पाउडर 207 रुपए किलो, मिर्च पाउडर 197 रुपए किलो, सूती सफेद कपड़ा 80 रुपए प्रति मीटर, कुर्ता फूल आस्तीन 221 रुपए प्रति नग, दरी 1057 रुपए प्रति नग, लोहे का चूल्हा 778 रुपए प्रति नग, लोहे का पीढ़ा 356 रुपए प्रति नग मिल रहा है.

मुख्यधारा से जुड़ेंगे बंदी कारागृह अधीक्षक सुमन मालीवाल ने कहा कि सभी बंदियों को इसके लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया. इसकी आमदनी का 25 प्रतिशत हिस्सा उनके पीड़ित पक्ष को मिलेगा. समाज में लौटने पर यह बंदी कौशल के साथ मुख्यधारा से जुड़ेंगे.

Tags: Bikaner news, Jail story, Life imprisonment, Local18

FIRST PUBLISHED : December 21, 2024, 14:21 IST

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