इकलौता कमाने वाले बेटे की मौत, 105 साल की दादी, मां-बाप और बेटियों के लिए ग्रामीण बने सहारा, ऐसे जुटाए 24 लाख

Last Updated:October 04, 2026, 10:40 IST
Nagaur Example of Humanity: नागौर के परबतसर के बडू गांव में 38 वर्षीय रामदेव चोटिया के अचानक निधन के बाद परिवार पर आर्थिक संकट आ गया. रामदेव परिवार में कमाने वाले इकलौते सदस्य थे. उनके पीछे 105 वर्षीय दादी, 75 वर्षीय माता-पिता, पत्नी सीमा देवी और 11 व 6 साल की दो बेटियां हैं. परिवार की स्थिति सामने आने के बाद उगमाराम बडारडा ने मदद की मुहिम शुरू की. सोशल मीडिया और व्यक्तिगत संपर्क के जरिए लोगों से सहयोग की अपील की गई. इसके बाद भामाशाहों और परिचितों ने फोन-पे के माध्यम से आर्थिक मदद भेजना शुरू किया. महज दो दिन में करीब 24 लाख रुपए जुट गए. समाज की इस मदद से परिवार को मुश्किल समय में आर्थिक सहारा मिला है.
नागौर: परबतसर के बडू गांव में 38 वर्षीय रामदेव चोटिया के अचानक निधन के बाद उनके परिवार पर बड़ा संकट खड़ा हो गया. परिवार में कमाने वाले रामदेव ही थे. उनके जाने के बाद बुजुर्ग माता-पिता, 105 वर्षीय दादी, विधवा पत्नी और दो छोटी बेटियों के सामने आगे की जिंदगी को लेकर मुश्किलें खड़ी हो गईं. ऐसे समय में गांव और आसपास के लोगों ने परिवार की मदद के लिए हाथ बढ़ाया. सहयोग की यह मुहिम महज दो दिन में बड़ी मदद में बदल गई और करीब 24 लाख रुपए परिवार के लिए जुटाए गए.
रामदेव चोटिया का 25 सितंबर 2026 को अचानक निधन हो गया. उनके निधन की खबर जैसे ही लोगों तक पहुंची, सोशल मीडिया और व्यक्तिगत संपर्क के जरिए परिवार की आर्थिक स्थिति की जानकारी सामने आने लगी. लोगों ने बताया कि रामदेव अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे. उनके निधन के बाद परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी उठाने वाला कोई सदस्य नहीं बचा. परिवार की स्थिति की जानकारी मिलने के बाद उगमाराम बडारडा बडू गांव पहुंचे और चोटिया परिवार से मुलाकात की. उन्होंने परिजनों को ढांढस बंधाया और परिवार की जरूरत को देखते हुए सहयोग की मुहिम शुरू करने का फैसला लिया.
परिवार के समाने आन पड़ी थी ये समस्याएं
रामदेव के परिवार में 105 वर्षीय दादी, 75 वर्षीय माता-पिता, पत्नी सीमा देवी और 11 व 6 वर्ष की दो बेटियां हैं. रामदेव की मां लंबे समय से गठिया की बीमारी से पीड़ित हैं. परिवार में बुजुर्गों की देखभाल के साथ बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा के खर्च की जिम्मेदारी भी अब बड़ा सवाल बन गई है. रामदेव की पत्नी सीमा देवी के सामने भी पति के निधन के बाद परिवार संभालने की चुनौती है. बताया गया कि ससुराल पक्ष में भी सास-ससुर और सगे सालों का सहारा नहीं है. ऐसे में परिवार के लिए आर्थिक मदद की जरूरत और बढ़ गई.
दो दिन में करीब 24 लाख की मिली मदद
उगमाराम बडारडा की अपील के बाद लोग लगातार परिवार की मदद के लिए आगे आने लगे. अलग-अलग स्थानों से भामाशाहों और परिचितों ने विभिन्न माध्यम से बताए गए खातों में राशि भेजी. देखते ही देखते सहयोग का सिलसिला तेज हो गया और महज दो दिन में करीब 24 लाख रुपए की राशि जुट गई. इस मुहिम ने यह भी दिखाया कि किसी परिवार पर अचानक आई विपत्ति के समय समाज किस तरह उसके साथ खड़ा हो सकता है. फिलहाल जुटाई गई आर्थिक मदद रामदेव के परिवार के लिए बड़ा सहारा बनी है. परिवार के सामने अब बच्चों की परवरिश, बुजुर्गों की देखभाल और भविष्य के खर्च की जिम्मेदारी है. ऐसे में लोगों की यह मदद परिवार को मुश्किल दौर से निकलने में आर्थिक संबल दे सकती है.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
और पढ़ेंLocation :
Nagaur,Rajasthan
First Published :
October 04, 2026, 10:40 IST



