उदयपुर में जैन समाज का अनूठा आयोजन, 1000 बच्चों ने एक साथ लिया उपनयन संस्कार, आत्मज्ञान और सदाचार का संकल्प

Last Updated:November 04, 2026, 18:55 IST
Udaipur News: मुनि आदित्य सागर महाराज ने अपने प्रवचन में उम्मीद के महत्व को समझाते हुए कहा कि जैसे शरीर को जीवित रहने के लिए सांस की जरूरत होती है, वैसे ही जीवन को सार्थक बनाने के लिए उम्मीद और संभावनाओं का बने रहना जरूरी है. संकट चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, व्यक्ति को अपनी उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए. यदि एक बार सफलता नहीं मिलती है.
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उदयपुर: जिंदगी में कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएं, जब तक इंसान के मन में उम्मीद बाकी है, तब तक उसके लिए कामयाबी के रास्ते खुले रहते हैं. उम्मीद ही वह ताकत है, जो मुश्किल समय में भी आगे बढ़ने का हौसला देती है. इसी संदेश के साथ उदयपुर के सेक्टर-11 स्थित आदिनाथ भवन में जैन समाज का अनूठा उपनयन संस्कार आयोजित किया गया. इस आयोजन में करीब 1000 बच्चों और युवाओं ने आत्मज्ञान, धर्म और सदाचार की शिक्षा ग्रहण की. मुनि आदित्य सागर महाराज के सान्निध्य में हुए इस कार्यक्रम में धार्मिक परंपराओं के साथ बच्चों को जीवन जीने का सही तरीका भी समझाया गया.
आदिनाथ दिगंबर जैन चैरिटेबल ट्रस्ट और विशुद्ध वर्षायोग समिति के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस आयोजन की शुरुआत सुबह धार्मिक मंत्रोच्चार के साथ हुई. मुनिश्री के सान्निध्य में शांतिधारा और अभिषेक किया गया. इसके बाद उपनयन संस्कार की प्रक्रिया पूरी हुई.आयोजन में उदयपुर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए.खास बात यह रही कि इस संस्कार के जरिए बच्चों और युवाओं को केवल धार्मिक परंपराओं से नहीं जोड़ा गया, बल्कि उन्हें अपने जीवन में अनुशासन और अच्छे संस्कार अपनाने की सीख भी दी गई.
धार्मिक व सामाजिक कार्यों में सेवा भाव से भाग लेना कार्यक्रम के दौरान युवाओं ने अपने माता-पिता के पैर छूकर उनका सम्मान करने और जीवनभर उनके बताए अच्छे रास्ते पर चलने का संकल्प लिया. इसके साथ ही सभी ने पांच प्रमुख संकल्प भी लिए. इनमें मांसाहार और तामसिक भोजन का त्याग, धूम्रपान और किसी भी तरह के नशे से दूर रहना, माता-पिता की आज्ञा और सम्मान को प्राथमिकता देना, रोजाना मंदिर जाकर देव दर्शन करना और धार्मिक व सामाजिक कार्यों में सेवा भाव से भाग लेना शामिल रहा.
सोच इंसान को आगे बढ़ने की प्रेरणा देतीमुनि आदित्य सागर महाराज ने अपने प्रवचन में उम्मीद के महत्व को समझाते हुए कहा कि जैसे शरीर को जीवित रहने के लिए सांस की जरूरत होती है, वैसे ही जीवन को सार्थक बनाने के लिए उम्मीद और संभावनाओं का बने रहना जरूरी है.संकट चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, व्यक्ति को अपनी उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए. यदि एक बार सफलता नहीं मिलती है तो अगली कोशिश की संभावना हमेशा बनी रहती है. यही सोच इंसान को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है.
संस्कार और सकारात्मक जीवनशैली से जोड़ने की एक अनूठी पहल चातुर्मास कमेटी अध्यक्ष अशोक शाह ने बताया कि उपनयन संस्कार को सामान्य तौर पर जनेऊ धारण करने की परंपरा माना जाता है, लेकिन इसका उद्देश्य इससे कहीं बड़ा है.इसके जरिए नई पीढ़ी को गलत आदतों से दूर रखकर अच्छे संस्कारों से जोड़ने का प्रयास किया गया. वहीं ट्रस्ट अध्यक्ष पारस चित्तौड़ा ने बताया कि आयोजन में बच्चों और युवाओं को धर्म, आत्मज्ञान, माता-पिता के सम्मान और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का महत्व समझाया गया. इस तरह यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को संस्कार और सकारात्मक जीवनशैली से जोड़ने की एक अनूठी पहल बना.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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Udaipur,Rajasthan
First Published :
November 04, 2026, 18:55 IST



