कुशल निशानेबाज-तैराक थे रेंजर प्रताप, दो साल पहले मिली थी पोस्टिंग, डंपर ने छीनी जिंदगी तो उजड़ा परिवार का सहारा

प्रतापगढ़. छोटी सादड़ी के सुकुड़ा गांव में अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई के दौरान जान गंवाने वाले वन विभाग के रेंजर प्रताप सिंह चूंडावत की मौत ने एक परिवार को ऐसा दर्द दिया है, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है. 40 वर्षीय प्रताप सिंह परिवार के इकलौते कमाने वाले थे. कुछ समय पहले ही उन्होंने अपने पिता को खोया था और अब उनकी मौत के बाद पत्नी आशा कुंवर, 13 वर्षीय बेटी गुंजन और 8 वर्षीय बेटे अनिरुद्ध के सिर से परिवार का सबसे बड़ा सहारा छिन गया. करीब दो साल पहले छोटी सादड़ी में पोस्टिंग पाने वाले प्रताप सिंह ड्यूटी के साथ वन्यजीव संरक्षण में भी सक्रिय रहे. बाघ, तेंदुआ, अजगर और मगरमच्छ जैसे वन्यजीवों के रेस्क्यू में उनकी भूमिका रही. वे कुशल निशानेबाज होने के साथ अच्छे तैराक भी थे. स्वतंत्रता दिवस पर उत्कृष्ट कार्य के लिए उनका नाम राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए भेजे जाने की बात भी सामने आई है.
सोमवार रात करीब 11:30 बजे प्रताप सिंह अपनी टीम के साथ छोटी सादड़ी के घाटी वाले बालाजी क्षेत्र के चक सुखड़ स्थित वनखंड में अवैध खनन और मिट्टी परिवहन की सूचना पर पहुंचे थे. टीम ने मौके पर जेसीबी, ट्रैक्टर और मिट्टी से भरा डंपर देखा. कार्रवाई के दौरान डंपर को जब्त किया गया. कर्मचारी सुरेश मेघवाल डंपर में बैठे थे, जबकि प्रताप सिंह अपनी बुलेट बाइक से आगे रेंज कार्यालय की ओर लौट रहे थे. इसी दौरान डंपर चालक ने वाहन तेज गति से आगे बढ़ा दिया. आरोप है कि रेंजर को बाइक समेत करीब 50 मीटर तक घसीटते हुए ले जाया गया. गंभीर रूप से घायल प्रताप सिंह को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
डंपर चालक की तलाश में तीन टीमें जुटीं
घटना के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है. एसपी विशाल जांगिड़ के अनुसार मामले में कुछ लोगों को डिटेन कर पूछताछ की जा रही है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है. आरोपी डंपर चालक की तलाश में पुलिस की तीन टीमें लगाई गई हैं और अलग-अलग स्थानों पर दबिश दी जा रही है. पुलिस ने मौके से जेसीबी और ट्रैक्टर जब्त किए हैं. जांच में डंपर की भूमिका और उससे जुड़े लोगों की भी पड़ताल की जा रही है. पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया. घटनास्थल से फॉरेंसिक टीम ने भी साक्ष्य जुटाए हैं. डंपर चालक वाहन लेकर अपने गांव के आसपास पहुंचा और मिट्टी खाली करने के बाद फरार हो गया. जेसीबी मालिक हरीश ठाकुर समेत तीन लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है. मिट्टी उठवाने वाले व्यक्ति से भी पूछताछ की जा रही है.
दो साल में वन्यजीवों के बीच बनाई पहचान
प्रताप सिंह की छोटी सादड़ी में करीब दो साल पहले पोस्टिंग हुई थी. इस दौरान उन्होंने वन क्षेत्र की निगरानी के साथ वन्यजीव रेस्क्यू अभियानों में भी सक्रियता दिखाई. बाघ, तेंदुआ, अजगर और मगरमच्छ जैसे वन्यजीवों के रेस्क्यू में उनकी भागीदारी रही. वे निशानेबाजी में कुशल थे और तैराकी में भी दक्ष बताए जाते हैं. उत्कृष्ट कार्य को देखते हुए स्वतंत्रता दिवस पर राज्य स्तरीय सम्मान के लिए उनका नाम प्रस्तावित किए जाने की जानकारी सामने आई है.
पिता के बाद बच्चों के सिर से उठा साया
प्रताप सिंह चित्तौड़गढ़ जिले के मेड़ी के अमराणा गांव के रहने वाले थे. परिवार में पत्नी आशा कुंवर, बेटी गुंजन और बेटा अनिरुद्ध हैं. वे परिवार के इकलौते कमाने वाले थे. हाल ही में पिता के निधन का दुख झेल चुके प्रताप सिंह अब खुद परिवार को छोड़ गए. राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया. घटना के बाद परिवार और ग्रामीणों के बीच शोक का माहौल है.
शहीद का दर्जा देने की मांग
प्रताप सिंह की मौत के बाद उन्हें शहीद का दर्जा देने की मांग उठी है. चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी ने शोक व्यक्त करते हुए दोषियों पर कठोर कार्रवाई और प्रताप सिंह को शहीद का दर्जा देने की मांग की. एडीएम विजयेश पंड्या ने बताया कि शहीद दर्जे की मांग सरकार को भेजी जा रही है. डीएफओ सुरेश अग्रवाल के अनुसार विभाग की ओर से भी सरकार को पत्रावली भेजी जाएगी. वन विभाग और सामाजिक संगठनों की ओर से भी इस मांग को उठाया जा रहा है.
खाली पद और संसाधनों की कमी भी सवालों के घेरे में
प्रतापगढ़ जिले में करीब 1319 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र है. विभागीय जानकारी के मुताबिक यहां रेंज स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी लंबे समय से बनी हुई है. कई पद खाली हैं और फील्ड स्टाफ के पास पर्याप्त सरकारी वाहन भी नहीं हैं. वन्यजीव और सांप रेस्क्यू जैसे कामों के लिए कर्मचारियों को निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता है. ऐसे में रेंजर की मौत ने अवैध खनन के साथ-साथ वनकर्मियों की सुरक्षा और संसाधनों के सवाल को भी फिर सामने ला दिया है.
जुलाई 2025 में भी वन कर्मियों को कुचलने का किया गया था प्रयास
जुलाई 2025 में भी आरामपुरा वन क्षेत्र में अवैध बजरी खनन रोकने गई वन विभाग की टीम पर वाहन से कुचलने के प्रयास का मामला सामने आया था. इसके बावजूद सीमावर्ती इलाकों में लाल मिट्टी और बजरी के अवैध कारोबार की शिकायतें जारी रहीं. अब प्रताप सिंह की मौत के बाद पुलिस कार्रवाई के साथ यह भी सवाल अहम है कि अवैध खनन पर प्रभावी रोक और फील्ड में तैनात वनकर्मियों की सुरक्षा के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं.



