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कैंसर वाला दर्द किस तरह का होता है, कान या गले में एक साथ दर्द हो तो क्या यह cancer है? डॉक्टर से जानिए कब हैं टेंशन की बात

Pain in Ear to Throat : कान में हल्का दर्द होता है तो आमतौर पर लोग उसे नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन कान से गले तक खिंचाव, चुभन या हल्का दर्द ईएनटी से जुड़ी कई छोटी-बड़ी समस्याओं का संकेत हो सकता है. मेडिकल साइंस में इसे रेफर्ड पेन भी कहा जाता है, जहां दर्द का कारण गला या जबड़ा होता है लेकिन इसका असर कान तक महसूस होता है. आखिर इसकी क्या-क्या वजहें हो सकती हैं. क्या यह दर्द कैंसर की वजह से तो नहीं है. यह कब चिंता की बात हो जाती है. इसी विषय पर हमने मैक्स अस्पताल में ईएनटी कैंसर डिपार्टमेंट के कंसल्टेंट डॉ. रवि शंकर से बात की.

कैंसर में किस तरह का दर्द होता है

कैंसर स्पेशलिस्ट डॉ. रवि शंकर ने बताया कि कान से गले तक का दर्द कब कैंसर वाला दर्द है, इसे आमतौर पर खुद से पहचान करना थोड़ा मुश्किल है. इसकी वजह यह है कि कैंसर कई तरह के होते हैं और दर्द किस जगह हो रहा है और किस तरफ हो रहा है, यह कैंसर के लक्षणों में ध्यान देना बहुत जरूरी है. कैंसर स्पेशलिस्ट कई सारे लक्षणों और मरीज की हिस्ट्री से इस बात का पता लगाने की कोशिश करते हैं कि क्या यह दर्द कैंसर वाला है. मोटे तौर पर कहा जाए तो कॉमन कैंसर में अगर गले या कान का दर्द लंबे समय से हो रहा है और पेन किलर दवा खाने के बाद भी यह ठीक नहीं हो रहा है तो यह कैंसर के लक्षण हो सकते हैं. कान या गले में कैंसर वाला दर्द आमतौर पर डीप पेन होगा या शार्प शूटिंग वाला पेन होगा. डीप पेन का मतलब है कि अगर यह कान या गले में है तो ऐसा महसूस होगा जैसे यह स्किन के एकदम अंदर है. जैसे हड्डियों, मांसपेशियों, जोड़ों या आंतरिक अंगों में महसूस होता है. यह दर्द एक गहरा, भारी, लगातार बना रहने वाला या अंदर ही अंदर कसमसाने वाला दर्द होता है. क्योंकि जब कोई ट्यूमर शरीर के किसी अंदरूनी अंग पर दबाव डालता है, आंतों को प्रभावित करता है या हड्डियों तक फैलने लगता है तो मरीज को यह गहरा और भारी दर्द महसूस होता है. दूसरा अगर यह दर्द शार्प शूटिंग वाला हो. यानी यह दर्द ऐसा महसूस होता है जैसे शरीर के किसी हिस्से में अचानक से बिजली का झटका लगा हो, कोई सुई चुभो रहा हो या कोई तेज करंट दौड़ गया हो. यह बहुत तेज होता है और अचानक एक जगह से शुरू होकर नसों के रास्ते दूसरी जगह तक भागता हुआ महसूस होता है.

कितने समय के बाद चिंता की बात

डॉ. रवि शंकर कहते हैं कि अगर यह दर्द लगातार 15 से 20 दिनों से ज्यादा हो रहा है तो यह कैंसर का लक्षण हो सकता है. सबसे खास बात यह है कि कैंसर वाला दर्द दवा से ठीक नहीं होता जब तक कि कैंसर वाली दवा न ली जाए. इसलिए नाक-कान या गले में 15-20 दिनों से ज्यादा से दर्द हो रहा है तो न केवल सचेत होने की जरूरत है बल्कि तुरंत कैंसर स्पेशलिस्ट से दिखाने की जरूरत है.

गले के कैंसर के अन्य लक्षण क्या है

गले के कैंसर के कई और अन्य लक्षण होते हैं. कैंसर स्पेशलिस्ट इन सबको कोरिलेट करते हैं. आमतौर पर सिर और गले के कैंसर के लक्षण देखे जाते हैं. हेड एंड नेक कैंसर के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि इसकी शुरुआत कहां से हुई है. यह मुंह, गला, साइनस और लार ग्रंथियों से आमतौर पर शुरू हो सकता है. इसमें गर्दन में बिना दर्द वाली गांठ महसूस होना, मुंह, चेहरे, गर्दन या होंठों पर ऐसा घाव या छाला होना जो ठीक न हो रहा हो, खांसने पर खून आना, आवाज में भारीपन या बदलाव होना, दांत ढीले होना, निगलते समय दर्द होना, लगातार नाक बंद रहना या नाक से खून बहना, कान में दर्द होना और बिना किसी कारण के तेजी से वजन कम होना जैसे लक्षण दिख सकते हैं. अगर ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए.

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क्या यह दर्द सिर्फ कैंसर में ही होता

जी नहीं. जरूरी नहीं कि ये दर्द कैंसर वाला ही हो. कुछ और भी हो सकता है. डॉ. रवि शंकर बताते हैं कि यह टॉन्सिल वाला दर्द भी हो सकता है लेकिन यह दर्द 10-15 दिनों में ठीक हो जाएगा. क्योंकि लोग इस दर्द में कहीं न कहीं से दवा लेंगे. दवा से यह ठीक हो जाएगा. अगर कान, गला, सिर आदि में कहीं ट्यूमर हो गया तो इससे भी इस तरह का दर्द हो सकता है.

जरूरी नहीं है कि यह कैंसर भी हो

टॉन्सिल भी हो सकता है लेकिन यह 10 से 15 दिन में ठीक हो जाता है. कुछ न कुछ दवा करेंगे तो यह ठीक हो जाएगा. अगर यूश्टेशियन ट्यूब में इंफेक्शन में होगा तो जीभ में दर्द नहीं होगा. यह सिर्फ कान में दर्द है. कोई अन्य टूयूमर से भी दर्द हो सकता है. यह ट्यूमर बिना कैंसर वाला भी हो सकता है. अगर जबड़े में किसी तरह की सूजन है तो भी इसी तरह से दर्द हो सकता है. कान और गले में एक साथ दर्द होने के पीछे कैंसर के अलावा कई सामान्य और गैर-कैंसरी कारण हो सकते हैं. अगर किसी तरह का इंफेक्शन है तो भी यह दर्द हो सकता है. इनमें टॉन्सिलाइटिस, फैरिंजाइटिस, साइनसाइटिस जैसी बीमारी शामिल है. इसके अलावा जबड़े के जोड़ की समस्या (TMJ disorder), अकल दाढ़ का निकलना या दांत में गंभीर इंफेक्शन भी कान और गले तक दर्द फैला सकता है. लेकिन ध्यान रखिए ये दर्द ऐसे होते हैं जो दवा खाने के बाद ठीक हो जाते हैं लेकिन कैंसर वाला दर्द ठीक नहीं होगा. वजह चाहे जो भी हो, इन स्थितियों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

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