क्या पोप लियो के लंग्स कैंसर की सर्जरी से ठीक हो जाएगी बीमारी? आम लोगों को हो जाए तो क्या करें, डॉक्टर से जानिए इलाज

Lungs Cancer : रविवार को खबर आई कि पोप लियो को लंग्स कैंसर है. मंगलवार को रोम के जेमेली अस्पताल में उनके दाहिने लंग्स के लोअर लोब की सफल सर्जरी कर ट्यूमर को निकाल दिया गया है. पोप लियो ईसाई धर्म के सबसे बड़े धर्मगुरु हैं. पूरी दुनिया में उनके अनुयायी हैं. इसलिए पोप की सेहत को लेकर पूरी दुनिया को चिंता है. उनकी जो बीमारी थी, उसका नाम लंग्स एडिनोकार्सिनोमा है. यह लंग्स के कुछ लोब्स में ट्यूमर के रूप में बढ़ने लगते हैं. लंग्स एडिनोकार्सिनोमा एक प्रकार का नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर है. यह लंग्स के अंदर बारीक-बारीक वायु कोष्ठक यानी एल्वियोलाई या म्यूकस पैदा करने वाली ग्रंथियों की कोशिकाओं में शुरू होता है. पोप लियो की सर्जरी के बाद इसे ठीक होने की बात कही गई है लेकिन अगर यही बीमारी आम लोगों को हो जाए तो इसमें किस तरह का इलाज है और क्या किया जाना चाहिए, इसे लेकर न्यूज 18 ने मैक्स हेल्थकेयर में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रिंसपल कंसल्टेंट डॉ. श्रीनिकेत मोहन राघवन से बात की.
क्या होती है लंग्स एडिनोकार्सिनोमा
पहले यह जानते हैं कि लंग्स एडिनोकार्सिनोमा बीमारी होती क्या है. इंसान के शरीर में दो लंग्स होते हैं. दाएं लंग्स में 3 लोब्स होते हैं. सुपिरियर यानी ऊपरी, मिडिल यानी मध्य और इंफिरियर यानी निचला हिस्सा. जब मेडिकल रिपोर्ट में यह कहा जाता है कि लोअर लोब में ट्यूमर था तो इसका मतलब होता है कि कैंसर फेफड़े के सबसे नीचे वाले हिस्से में पनप रहा है. इस लोब्स में बहुत ही बारीक-बारीक करीब 5 से 10 करोड़ एल्वियोलाई होते हैं. ये वायु कोष्ठक होते हैं. यानी इनमें जब हम सांस लेते हैं तो ऑक्सीजन जाती है और खून में मिलकर हार्ट में पहुंच जाती है. दूसरी ओर यहीं खून से लाया गया कार्बन डायऑक्साइड नाक के माध्यम से बाहर चला जाता है. इस तरह फेफड़े के ये लोब्स शरीर के मुख्य श्वसन तंत्र के रूप में काम करते हैं. जब लोअर लोब में ट्यूमर या एडिनोकार्सिनोमा विकसित होता है तो यह उस हिस्से के टिशूज को नष्ट करने लगता है. इससे आसपास की खून की छोटी-छोटी नलियां और वायुमार्गों को सिकोड़ देता है जिससे फेफड़े की गैस-एक्सचेंज क्षमता कम हो जाती है. इस कारण ऑक्सीजन की कमी, लगातार खांसी, छाती में जकड़न या दर्द जैसी समस्याएं होने लगती हैं. यदि समय पर इलाज न हो तो यह कैंसर ट्यूमर के जरिए लिंफ नोड्स और शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकता है.
लंग्स कैंसर की सर्जरी कैसी की जाती है
अब सवाल है कि पोप लियो की जो सर्जरी हुई है वह कितना कारगर है. डॉ. श्रीनिकेत मोहन राघवन ने बताया कि पोप को जो लंग्स एडिनोकार्सिनोमा हुआ था, वह किस स्टेज में था और उनकी पूरी स्थिति क्या थी, यह तो सटीकता के साथ उनके डॉक्टर ही बता पाएंगे लेकिन अगर यह किसी आम इंसान में होता है तो उसके लिए कॉमन प्रोसीड्योर है. जो मीडिया रिपोर्ट्स आए हैं उनके अनुसार पोप की रोबोटिक लोबेक्टोमी सर्जरी हुई है. यह अत्याधुनिक मीनीमल इनवेसिव तकनीक है जिसमें बेहद बारीक कुछ छेद किए जाते हैं. इनकी मदद से सर्जिकल टूल्स और कैमरे अंदर जाते हैं. इस आधुनिक तकनीक के जरिए फेफड़े के उस प्रभावित हिस्से यानी लोअर लोब को पूरी तरह से बाहर निकाल लिया जाता है जहां ट्यूमर या कैंसर होता है. इसके साथ ही, सर्जरी के दौरान उस लोब से जुड़े आसपास के लिम्फ नोड्स को भी निकालना और साफ करना बहुत जरूरी होता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों में न फैले. रोबोटिक सर्जरी के माध्यम से सटीक स्थान पर ट्यूमर को निकाला जा सकता है. इसी दौरान लिंफ नोड्स के कुछ सैंपल भी निकालकर जांच के लिए भेजा जाता है. अगर जांच में लिंफ नोड्स में कैंसर के ट्यूमर नहीं बने हैं तो यही इलाज अंतिम होता है. यानी सर्जरी के बाद कुछ नहीं करना होता है. सिर्फ फॉलो अप के लिए आना पड़ता है. अगर इस सैंपल में कैंसर के ट्यूमर है तो फिर कीमोथेरेपी या टारगेटेड थेरेपी या जो भी संभव है वो थेरेपी दी जाती है.
पोप लियो. Photo: REUTERS
क्या सर्जरी के बाद बीमारी खत्म
डॉ. श्रीनिकेत मोहन राघवन बताते हैं कि अगर किसी की रोबोटिक लोबेक्टोमी सर्जरी की जाती है तो इसका मतलब है कि बीमारी अभी स्टेज 1 और स्टेज 2 में ही है. इसमें ट्यूमर 4 सेंटीमीटर से छोटे होते हैं. ट्यूमर बढ़कर सबसे पहले लिंफ नोड्स तक फैलता है. इसलिए लिंफ नोड्स में कैंसर के होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है. रोबोटिक लोबेक्टोमी सर्जरी के दौरान सबसे संभावित ट्यूमर वाले लिंफ नोड्स की पैथलैब में जांच की जाती है. अगर लिंफ नोड्स में कैंसर वाला ट्यूमर नहीं बना है तो सर्जरी के बाद ही बीमारी को खत्म मानी जाती है लेकिन अगर इसमें कैंसर ट्यूमर है तो फिर इसके बाद आगे का इलाज किया जाता है. इसलिए सर्जरी के बाद बीमारी के खत्म होने की संभावना इस बात पर निर्भर करती है कि लिंफ नोड्स में बीमारी फैली है या नहीं.
किन लोगों में एडिनोकार्सिनोमा का रिस्क ज्यादाडॉ. श्रीनिकेत कहते हैं कि कैंसर में ऐसा कोई नियम नहीं है कि 100 फीसदी ऐसे लोगों को कैंसर होगा या नहीं होगा. आमतौर पर लंग्स एडिनोकार्सिनोमा नॉन-स्मोकर में होते हैं. यानी जो लोग स्मोकिंग नहीं करते हैं उनमें होते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि स्मोकिंग करने वाले लोगों में न हो. स्मोकिंग या तंबाकू जनित पदार्थों का सेवन अन्य तरह के लंग्स कैंसर की सबसे बड़ी वजह है.
एडिनोकार्सिनोमा के क्या है लक्षणज्यादातर एडिनोकार्सिनोमा बिना लक्षण वाले होते हैं. अगर कुछ मरीजों में दिखता भी है तो हल्की खांसी, सांस लेने में तकलीफ या चलने में दिक्कत जैसे लक्षण आते हैं.
शुरुआती स्टेज में कैसे पता करेंडॉ. श्रीनिकेत बताते हैं कि शुरुआती स्टेज में कैंसर का पता लगाना मुश्किल है. आमतौर पर जब मरीज किसी और चीज के लिए जांच करा रहे हो तब इसका पता चलता है.
क्या लगातार खांस लंग्स कैंसर हैलगातार खांसी हो तो डॉक्टर से जरूर दिखाएं. इस बात के ज्यादा चांस है कि ये खांसी टीवी या कोई इंफेक्शन हो लेकिन सौ में से एक कैंसर भी निकल सकता है. इसलिए जांच जरूरी है.
कब बजती है खतरे की घंटीजब शरीर में कुछ भी असामान्य हो और दवा से ठीक न हो तो यह खतरे की घंटी हो सकती है. जैसे खांसी हो, चलने में दिक्कत हो या सांस लेने में परेशानी हो अगर दवा से ठीक नहीं हो रहा तो कैंसर का खतरा हो सकता है. डॉ. श्रीनिकेत बताते हैं कि शरीर में किसी भी तरह का बदलाव जो पहले से नहीं हो रहा है, उन स्थिति में चौकन्ना हो जाना चाहिए. जैसे बिना वजह वजन कम होना, स्किन पर तिल का रंग बदलना, दाने या चकत्ते का ठीक नहीं होना, शरीर की नियमित प्रक्रिया में बदलाव आदि.
क्या लंग्स कैंसर ठीक होता हैडॉ. श्रीनिकेत बताते हैं कि बिल्कुल ठीक हो सकता है बशर्ते आप सही समय पर डॉक्टर के पास पहुंचे. अगर शुरुआती स्टेज में डॉक्टर के पास चले जाएंगे तो इसका पूरा इलाज है. इसलिए डरे नहीं, शरीर में कुछ भी गड़बड़ दिखे तो डॉक्टर के पास आए.
कैंसर न हो, इसके लिए क्या करेंडॉ. श्रीनिकेत के मुताबिक कैंसर न हो, इसके लिए सबसे बेस्ट तरीका है अपनी लाइफस्टाइल और खान-पान की आदतों में सुधार. तंबाकू मिली हुई किसी भी चीज का सेवन न करें. सिगरेट, बीड़ी, तंबाकू, गुटखा, पान-मसाला आदि का किसी भी हाल में सेवन न करें. रोज एक्सरसाइज करें. पैकेज्ड फूड, प्रोसेस्ड फूड, मीठा पेय आदि का कम से कम सेवन करें. रोज हरी पत्तीदार सब्जियों, फल, सीड्स आदि का सेवन करें. जितना संभव हो सके कुदरती चीजें का सेवन करें. पर्याप्त नींद लें. तनाव न लें और खुश रहें.



