जहरीली हवा से कम हो सकता है नवजात का वजन? गर्भवती महिलाएं इन बातों का रखें ध्यान

Last Updated:October 17, 2026, 06:53 IST
सर्दियों में बढ़ता स्मॉग गर्भवती महिलाओं और गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए खतरा बन सकता है. फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल की डॉ. गार्गी अग्रवाल के मुताबिक, प्रदूषण से बच्चे का वजन कम होने और समय से पहले प्रसव का जोखिम बढ़ सकता है. जानिए, N95 मास्क, एयर प्यूरीफायर और नियमित जांच से कैसे करें बचाव.
फरीदाबाद: सर्दियों की शुरुआत के साथ ही दिल्ली-NCR और उत्तर भारत में स्मॉग और वायु प्रदूषण की समस्या बढ़ने लगती है. प्रदूषित हवा का असर गर्भवती महिलाओं के साथ गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी पड़ सकता है. Local18 ने फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल में ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी डिपार्टमेंट की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. गार्गी अग्रवाल बताती है कि प्रदूषण के बेहद बारीक कण सांस के जरिए शरीर में पहुंचकर खून और गर्भनाल तक पहुंच सकते हैं. इससे बच्चे के विकास पर असर पड़ने का खतरा रहता हैं.
बच्चे का वजन कम होने का खतरा
डॉ. गार्गी अग्रवाल बताती हैं कि स्मॉग में मौजूद बेहद छोटे कण सांस के जरिए खून में पहुंच सकते हैं. कुछ अध्ययनों में इन कणों के प्लेसेंटा यानी गर्भनाल तक पहुंचने के संकेत मिले हैं. लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण में रहने वाली गर्भवती महिलाओं में बच्चे का वजन कम होने और समय से पहले प्रसव का खतरा बढ़ सकता है.
शुरुआती तीन महीने क्यों हैं अहम?
डॉ. गार्गी अग्रवाल बताती हैं कि गर्भावस्था के शुरुआती तीन महीने बच्चे के अंगों के विकास के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होते हैं. इस दौरान प्रदूषण के अधिक संपर्क में आने से बच्चे के विकास पर असर पड़ने की आशंका रहती है. हालांकि, गर्भावस्था के दूसरे और तीसरे चरण में भी प्रदूषण से बचाव जरूरी है, क्योंकि इस दौरान बच्चे का विकास जारी रहता है.
बच्चे के विकास पर पड़ सकता है असर
डॉ. गार्गी अग्रवाल बताती हैं कि लंबे समय तक प्रदूषित हवा में सांस लेने से गर्भ में पल रहे बच्चे की वृद्धि प्रभावित होने और जन्म के समय वजन कम होने का खतरा हो सकता है. इसलिए गर्भवती महिलाओं को प्रदूषण से बचाव के साथ नियमित जांच भी करानी चाहिए.
N95 मास्क और एयर प्यूरीफायर से मिल सकती है मदद
डॉ. गार्गी अग्रवाल बताती हैं कि गर्भवती महिलाओं को प्रदूषण के संपर्क में आने से जितना संभव हो बचना चाहिए. N95 मास्क हवा में मौजूद कुछ बारीक कणों को सांस के जरिए शरीर में जाने से रोकने में मदद कर सकता है, लेकिन यह सभी हानिकारक गैसों से सुरक्षा नहीं देता. घर में कमरे के आकार के अनुसार HEPA फिल्टर वाला एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं को समय पर अल्ट्रासाउंड, नियमित जांच और बच्चे के विकास की निगरानी करानी चाहिए. संतुलित खानपान पर ध्यान देना भी जरूरी है. प्रदूषण से पूरी तरह बचना हमेशा संभव नहीं है, लेकिन सावधानी बरतकर इसके संपर्क को कम किया जा सकता है.
About the AuthorVivek Kumar
विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…
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Faridabad,Faridabad,Haryana
First Published :
October 17, 2026, 06:52 IST



