जाफराबादी भैंस क्यों है पशुपालकों की पसंद? भारी कद-काठी के साथ दूध की भी खासियत, जान लें ये जरूरी बातें

Last Updated:October 07, 2026, 13:23 IST
सुल्तानपुर. जाफराबादी भैंस अपनी मजबूत कद-काठी, भारी शरीर और दूध उत्पादन के लिए पशुपालकों के बीच खास पहचान रखती है. इसके दूध में फैट की मात्रा भी अच्छी मानी जाती है, जिससे घी और मक्खन जैसे डेयरी उत्पाद तैयार किए जाते हैं. हालांकि इस नस्ल की भैंस खरीदने से पहले उसकी उम्र, स्वास्थ्य, दूध देने की क्षमता और पालन-पोषण के खर्च जैसी जरूरी बातों की जानकारी लेना बेहद जरूरी है.
सुल्तानपुर. जाफराबादी भैंस अपनी मजबूत कद-काठी, भारी शरीर और अच्छे दूध उत्पादन के लिए जानी जाती है. इस नस्ल के दूध में फैट की मात्रा भी अच्छी मानी जाती है, जिसके चलते पशुपालक दूध के साथ घी, मक्खन और दूसरे डेयरी उत्पादों से बेहतर आमदनी की उम्मीद कर सकते हैं. सुल्तानपुर के एक किसान ने भी जाफराबादी नस्ल की भैंस पाल रखी है. किसान ने बताया कि इस भैंस की देखभाल, खानपान और दूध की क्या खासियत है.
कृषि विज्ञान केंद्र सुलतानपुर में कार्यरत पशु चिकित्सा वैज्ञानिक डॉ. दिवाकर कुमार के मुताबिक जाफराबादी भारत की प्रमुख भैंस नस्लों में शामिल है. इसकी सबसे बड़ी पहचान इसका विशाल और मजबूत शरीर है.
आईसीएआर के अनुसार जाफराबादी को भारत की सबसे भारी भैंस नस्ल के रूप में दर्ज किया गया है. इसका चौड़ा शरीर, मजबूत बनावट और लंबे, मुड़े हुए सींग इसे दूसरी नस्लों से अलग पहचान देते हैं. इसकी बड़ी कद-काठी को देखकर ही इसकी मजबूती का अंदाजा लगाया जा सकता है.
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किसान और एक्सपर्ट हरिनाथ ने लोकल 18 को बताया कि जाफराबादी की खासियत सिर्फ इसके भारी शरीर तक सीमित नहीं है. यह दूध उत्पादन के लिए भी जानी जाती है. इसके दूध में फैट की मात्रा अच्छी होने के कारण इसका इस्तेमाल घी, मक्खन और अन्य डेयरी उत्पाद बनाने में किया जा सकता है. हालांकि हर जाफराबादी भैंस का दूध उत्पादन और फैट एक जैसा नहीं होता. उम्र, खानपान, स्वास्थ्य, मौसम और पशु की देखभाल जैसे कई कारकों का असर दूध की मात्रा और गुणवत्ता पर पड़ता है.
अगर कोई किसान जाफराबादी भैंस पालने की योजना बना रहा है तो केवल नस्ल देखकर पशु खरीदना सही नहीं होगा. भैंस खरीदने से पहले उसकी उम्र, स्वास्थ्य, दूध देने की क्षमता, गर्भधारण की स्थिति और नस्ल की शुद्धता की जांच करनी चाहिए. इसके साथ पशु के रोजाना चारे, दवा और देखभाल पर आने वाले खर्च का भी हिसाब लगाना जरूरी है.
स्थानीय बाजार में दूध का भाव कितना है, यह भी पशुपालक की कमाई पर सीधा असर डालता है. ऐसे में स्वस्थ और अच्छी नस्ल का पशु डेयरी के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन वास्तविक मुनाफा दूध की बिक्री और कुल खर्च के हिसाब से ही तय होगा.
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October 07, 2026, 13:23 IST



