दिन में खुद बन रहे शिक्षक, रात में 35 बच्चों का भविष्य संवार रहे नागौर के हंसराज, हर बच्चे को शिक्षत देखना है सपना

Last Updated:October 19, 2026, 18:50 IST
Nagaur News: नागौर के नावां में हंसराज कुशलावा दिन में खुद शिक्षक बनने की तैयारी करते हैं और रात में जरूरतमंद परिवारों के 35 से अधिक बच्चों को निशुल्क पढ़ाते हैं. दो बच्चों से शुरू हुई उनकी यह पहल आज गरीब बच्चों के भविष्य को संवारने और शिक्षा की अलख जगाने की मिसाल बन गई है.
नागौर. कहते हैं कि अगर मन में कुछ अच्छा करने का जज्बा हो और नीयत में इंसानियत हो, तो सीमित संसाधन भी बड़े बदलाव की वजह बन सकते हैं. इसका उदाहरण नावां के हंसराज कुशलावा हैं, जो पिछले एक साल से जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को रात में निशुल्क पढ़ा रहे हैं. उनका उद्देश्य है कि आर्थिक तंगी के कारण किसी बच्चे की पढ़ाई न छूटे और हर बच्चे को आगे बढ़ने का अवसर मिले. दो बच्चों से शुरू हुआ उनका यह प्रयास आज 35 से अधिक बच्चों तक पहुंच चुका है.
हंसराज खुद अध्यापक लेवल-1 की परीक्षा पास कर शिक्षक बनने का सपना देख रहे हैं. दिन में अपनी पढ़ाई और तैयारी में जुटे रहने के बाद वे रात को जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाने के लिए समय निकालते हैं. उनके लिए यह केवल पढ़ाने का काम नहीं, बल्कि समाज के उन बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने की कोशिश है, जिन्हें आर्थिक परिस्थितियों के कारण पर्याप्त शैक्षणिक सहयोग नहीं मिल पाता. नावां में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार सहित विभिन्न राज्यों से अनेक परिवार रोजी-रोटी की तलाश में आते हैं. इनमें से कई परिवार झोपड़ियों और किराए के छोटे कमरों में रहते हैं. माता-पिता दिनभर मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं. ऐसे में उनके पास न तो बच्चों को निजी ट्यूशन दिलाने के लिए पर्याप्त पैसे होते हैं और न ही काम के बाद उन्हें पढ़ाने का समय मिल पाता है. इसका असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है. ऐसे ही बच्चों की मदद के उद्देश्य से हंसराज ने निशुल्क पढ़ाने की शुरुआत की.
दो बच्चों से शुरू हुआ सफर, अब 35 से अधिक बच्चे जुड़ चुकेहंसराज ने शुरुआत में केवल दो बच्चों को पढ़ाने का संकल्प लिया था. धीरे-धीरे उनकी पहल की जानकारी दूसरे परिवारों तक पहुंची और बच्चों की संख्या बढ़ती गई. आज 35 से अधिक बच्चे नियमित रूप से रात में उनके पास पढ़ने आते हैं. वे अलग-अलग कक्षाओं और शैक्षणिक स्तर के बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार पढ़ाते हैं, ताकि वे स्कूल की पढ़ाई को बेहतर ढंग से समझ सकें. हंसराज की पहल केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है. वे अपने सीमित संसाधनों के बावजूद बच्चों को कॉपी, पेन, पेंसिल और किताबें जैसी जरूरी शिक्षण सामग्री भी उपलब्ध कराने का प्रयास करते हैं. उनका मानना है कि पैसों की कमी किसी बच्चे की शिक्षा में बाधा नहीं बननी चाहिए. पढ़ाई के साथ वे बच्चों को अनुशासन, मेहनत और नियमित अध्ययन का महत्व भी समझाते हैं.
हर बच्चे को शिक्षित देखना है सपना
हंसराज का कहना है कि उनका सपना है कि कोई भी बच्चा केवल इसलिए अशिक्षित न रह जाए, क्योंकि उसके परिवार के पास पढ़ाई के लिए पैसे नहीं हैं. शिक्षा एक बच्चे के साथ पूरे परिवार का भविष्य बदलने की ताकत रखती है. उनका यह छोटा-सा प्रयास बताता है कि समाज में बदलाव लाने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती. जरूरत होती है तो केवल संवेदनशील सोच, समय देने की इच्छा और दूसरों के भविष्य को बेहतर बनाने के संकल्प की. हंसराज इसी सोच के साथ बच्चों के जीवन में शिक्षा का उजाला फैलाने में जुटे हैं.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Nagaur,Rajasthan
First Published :
October 19, 2026, 18:50 IST



