नवरात्रि के 9 दिन अंगाई माता मंदिर के पास दिखता है तेंदुआ, भक्तों की मान्यता माता के शेर करते हैं पहरा

Last Updated:October 15, 2026, 18:19 IST
Angai Mata Mandir Leopard: जवाई क्षेत्र में स्थित अंगाई माता मंदिर नवरात्रि के दौरान अपनी अनोखी मान्यता को लेकर चर्चा में रहता है. स्थानीय मान्यता के अनुसार, नवरात्रि के नौ दिनों में मंदिर की गुफा के पास तेंदुआ रोजाना नजर आता है. इसे श्रद्धालु माता के शेर के पहरे से जोड़कर देखते हैं.
ख़बरें फटाफट
पाली. पाली जिले में आने वाले बिसलपुर और जीवदा के बीच स्थित प्रसिद्ध अंगाई माता मंदिर और ‘त्रिशूल वाली गुफा’ के आसपास एक पैंथर दिखाई दिया है. लेकिन हैरानी की बात यह है कि यह सिर्फ एक दिन की घटना नहीं है. स्थानीय मान्यताओं और इतिहास के अनुसार, नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक यह तेंदुआ रोज़ाना मंदिर के आसपास और पहाड़ियों पर देखा जाता है. माना जाता है कि इंसानों के साथ-साथ यह पैंथर भी माता के शेर के रूप में इस पवित्र स्थान की रक्षा करता है.
इसे महज एक वन्यजीव की सामान्य गतिविधि मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक यह तेंदुआ रोजाना मंदिर परिसर और आसपास की पहाड़ियों पर देखा जाता है.
आस्था और प्रकृति का अद्भूत चमत्कारआस्था और अरावली की विशाल पहाड़ियों के बीच जब प्रकृति और अध्यात्म का अद्भुत मिलन होता है, तो वह चमत्कार बन जाता है. राजस्थान के पाली जिले में स्थित जवाई क्षेत्र एक बार फिर एक ऐसे ही अलौकिक दृश्य का गवाह बना है. जवाई की पहाड़ियों में बिसलपुर और जीवदा गांव के बीच स्थित प्रसिद्ध अंगाई माता मंदिर और ‘त्रिशूल वाली गुफा’ के आसपास इन दिनों एक तेंदुए (पैंथर) की आवाजाही हर किसी को हैरान कर रही है.
इंसानों के साथ पैंथर भी करता है माता की सेवास्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं का मानना है कि नवरात्रि के पावन पर्व पर इंसानों के साथ-साथ यह पैंथर भी ‘माता के शेर’ का रूप धारण कर इस पवित्र स्थल की रक्षा और पहरेदारी करता है. नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु जब पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचते हैं, तो अरावली की चट्टानों पर शांति से बैठा यह पैंथर बिना किसी को नुकसान पहुंचाए दूर से मंदिर की ओर देखता नजर आता है. तेंदुए की यह शांत और संयमित उपस्थिति श्रद्धालुओं के मन में भय के बजाय एक अगाध श्रद्धा और भक्ति का भाव जगाती है.
‘शक्तिद्वार की नींव’ और अटूट आस्थाअरावली पर्वतमाला की गोद में बसा यह प्रसिद्ध अंगाई माता मंदिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के लिए पूरे राजस्थान में जाना जाता है. इस मंदिर को क्षेत्र में ‘शक्तिद्वार की नींव’ के रूप में भी माना जाता है. मंदिर के गर्भगृह में स्थापित माता की मनमोहक प्रतिमा के दर्शन मात्र से ही भक्तों के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं. इस मंदिर की एक विशेष परंपरा यह भी है कि क्षेत्र के नवविवाहित जोड़े शादी के बाद अपने दांपत्य जीवन की सुख-समृद्धि की कामना लेकर सबसे पहले अंगाई माता के दर्शन करने और उनका आशीर्वाद लेने आते हैं.
नवरात्रि में उमड़ता है जनसैलाबनवरात्रि के नौ दिनों तक मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, अनुष्ठान और आरती का आयोजन किया जाता है. अरावली की घनी पहाड़ियों के बीच गूंजते माता के जयकारों और दूर पहाड़ियों पर बैठे तेंदुए की मौजूदगी ने इस स्थान को एक अद्भुत और दिव्य रूप दे दिया है. जवाई का यह अंगाई माता मंदिर आज इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जहां माता रानी की कृपा होती है, वहां हिंसक वन्यजीव भी भक्ति के भाव में लीन होकर रक्षक की भूमिका निभाने लगते हैं. ‘माता के इस शेर’ को देखने और अंगाई माता के दर्शन करने के लिए इन दिनों दूर-दूर से श्रद्धालु भारी संख्या में पहुंच रहे हैं.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
और पढ़ेंFirst Published :
October 15, 2026, 18:19 IST



