पाली के काजरी वैज्ञानिकों का अनोखा नवाचार, ‘ब्रह्मास्त्र’ और ‘अग्न्यास्त्र’ जैसे जैविक अस्त्रों से हो रही फसलों की कीटों से सुरक्षा

Last Updated:October 14, 2026, 06:53 IST
Pali CAZRI Organic Farming: पाली के काजरी वैज्ञानिकों ने जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए अनोखा नवाचार किया है. अब किसान महंगे केमिकल्स की जगह ‘ब्रह्मास्त्र’, ‘अग्न्यास्त्र’, ‘नीमास्त्र’ और ‘दसपर्णी अर्क’ जैसे जैविक अस्त्रों से फसलों की रक्षा कर रहे हैं. 2 से 5 बीघा से इसकी शुरुआत कर किसान अपनी जेब और सेहत दोनों बचा रहे हैं. पाली के सैकड़ों किसानों ने इसकी ट्रेनिंग ली है, जिससे खेती की लागत शून्य हो रही है और लोगों को केमिकल-फ्री शुद्ध सब्जियां मिल रही हैं.
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Pali: रामायण और महाभारत काल में दुश्मनों का संहार करने वाले ‘ब्रह्मास्त्र’ और ‘अग्न्यास्त्र’ जैसे पौराणिक अस्त्रों के बारे में तो आपने कई बार सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि अब यही नाम आधुनिक कृषि में फसलों के दुश्मनों यानी कीड़ों और बीमारियों का खात्मा कर रहे हैं? जी हां, राजस्थान के पाली जिले में काजरी (CAZRI) के वैज्ञानिकों ने जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक क्रांतिकारी पहल की है. अब किसान बिना किसी महंगे और जहरीले केमिकल कीटनाशक के घर पर ही प्राकृतिक तरीकों से जैविक अस्त्र बनाकर अपनी फसलों को सुरक्षित रख रहे हैं, जिससे उनकी लागत भी शून्य हो रही है.
काजरी के पौधा संरक्षण विषय विशेषज्ञ अरविंद सिंह तेतरवाल के अनुसार, लंबे समय से धड़ल्ले से हो रहे रासायनिक उर्वरकों और जहरीले कीटनाशकों के इस्तेमाल से न केवल खेतों की उपजाऊ मिट्टी की शक्ति लगातार कम हो रही है, बल्कि मानव स्वास्थ्य पर भी इसका बहुत बुरा असर पड़ रहा है. इसी गंभीर समस्या से निजात पाने के लिए काजरी पाली ने किसानों को प्राकृतिक और पूरी तरह ऑर्गेनिक कीटनाशक बनाने की विशेष ट्रेनिंग देना शुरू किया है. विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसान शुरुआत में 2 से 5 बीघा जमीन से इस जैविक खेती की शुरुआत कर सकते हैं, जिससे उनकी सेहत और जेब दोनों बचेगी.
किसानों में बढ़ रहा उत्साह, 150 से ज्यादा ले चुके ट्रेनिंगपाली के कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा चलाई जा रही इस अनूठी पहल से अब तक सैकड़ों किसान जुड़ चुके हैं. किसानों में इसे लेकर भारी उत्साह देखने को मिल रहा है, और वर्तमान में लगभग 100 से 150 किसान इन जैविक अस्त्रों को अपनी खेती में सफलतापूर्वक अपना रहे हैं. इनमें से 20 से अधिक प्रगतिशील किसानों ने तो रासायनिक खेती को पूरी तरह से अलविदा कहकर 100% ऑर्गेनिक फार्मिंग यानी जैविक खेती अपना ली है, जो अन्य किसानों के लिए एक बड़ी मिसाल बन चुकी है.
घर पर ऐसे तैयार होते हैं ये चमत्कारी जैविक अस्त्रवैज्ञानिकों द्वारा किसानों को जिन प्राकृतिक अस्त्रों को बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है, वे बेहद किफायती और असरदार हैं:
नीमास्त्र (Neemastra): नीम की ताजी पत्तियों, गोमूत्र और गोबर के मिश्रण से तैयार यह अस्त्र फसलों के रस चूसने वाले कीटों जैसे माहू (एफिड), हरा तेला और थ्रिप्स को पूरी तरह खत्म कर देता है.
दसपर्णी अर्क (Dasparni Ark): इसमें नीम, धतूरा, बेलपत्र, आकड़ा, करंज और अरंडी जैसी 10 विभिन्न औषधीय पौधों की पत्तियों का इस्तेमाल किया जाता है, जो फसलों में लगने वाले फंगल इन्फेक्शन और फफूंद से रक्षा करता है.
ब्रह्मास्त्र (Brahmastra): नीम, धतूरा, पपीता और अमरूद के पत्तों को उबालकर बनाया जाने वाला यह अस्त्र बड़ी सुंडियों, इल्लियों और फल व तना छेदक कीटों का जड़ से सफाया करता है.
अग्न्यास्त्र (Agnyastra): तंबाकू, तीखी हरी मिर्च, लहसुन और नीम का यह तेज मिश्रण फसलों को चट करने वाली जिद्दी इल्लियों पर अग्नि की तरह प्रहार करता है.
जीरो बजट फार्मिंग और शुद्ध खान-पान की दिशा में क्रांतिकाजरी पाली का यह नवाचार आज के समय में किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है. इससे किसानों की खेती की लागत लगभग शून्य हो जाती है, क्योंकि इन्हें घर पर ही आसानी से उपलब्ध सामग्रियों से तैयार किया जा सकता है. यह तकनीक न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है, बल्कि आम जनता तक केमिकल-फ्री और शुद्ध खान-पान पहुंचाने की दिशा में एक ऐतिहासिक क्रांति भी साबित हो रही है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Bharatpur,Bharatpur,Rajasthan
First Published :
October 14, 2026, 06:53 IST



