बच्चे को किस उम्र में क्या खिलाएं? डाइटिशियन ने बताया 6 महीने से 1 साल तक का डाइट चार्ट

अंबाला: हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा बचपन से ही स्वस्थ रहे, उसकी ग्रोथ अच्छी हो और आगे चलकर उसे खाने-पीने से जुड़ी परेशानियों का सामना न करना पड़े. लेकिन बच्चे के जन्म के बाद सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि आखिर किस उम्र में उसे क्या खिलाना शुरू करें. दरअसल, कई माता-पिता जानकारी के अभाव में बच्चे को समय से पहले पानी, जूस या दूसरी चीजें देना शुरू कर देते हैं. वहीं, कुछ लोग कम उम्र में ही चिप्स, नमकीन और बाहर का खाना चखा देते हैं. बता दें कि अब अंबाला नागरिक अस्पताल की डाइटिशियन ने बच्चों की उम्र के हिसाब से डाइट को लेकर जरूरी जानकारी साझा की है.
6 महीने तक सिर्फ मां का दूध सबसे जरूरी
अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में कार्यरत डाइटिशियन रेनू बाला ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि बच्चे के जन्म से लेकर 6 महीने की उम्र तक मां का दूध ही सबसे अहम आहार है. उन्होंने कहा कि कई बार माता-पिता साढ़े पांच महीने या उससे पहले ही बच्चे को पानी या दूसरी लिक्विड चीजें देना शुरू कर देते हैं, लेकिन ऐसा करने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए. शुरुआती 6 महीने में बच्चे को मां के दूध से ही जरूरी पोषण मिलता है.
6 महीने बाद ऐसे शुरू करें पूरक आहार
उन्होंने बताया कि जब बच्चा 6 महीने पूरे कर ले, तब धीरे-धीरे घर के बने पूरक आहार की शुरुआत की जा सकती है. शुरुआत में बच्चे को बहुत ज्यादा या भारी खाना देने के बजाय कम मात्रा में नरम और आसानी से निगलने वाला भोजन देना चाहिए. इसमें दाल का पानी, नरम चावल या अच्छी तरह मैश किया हुआ भोजन शुरुआत में दिया जा सकता है. उन्होंने बताया कि बच्चे की क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे मात्रा और खाने की विविधता बढ़ाई जा सकती है.
8 से 9 महीने में डाइट में शामिल करें रोटी और दलिया
वहीं, रेनू बाला के अनुसार, जब बच्चा करीब 8 से 9 महीने का हो जाए, तो उसकी डाइट में दलिया, नरम रोटी और घर के दूसरे खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं. रोटी को अच्छी तरह मैश करके या नरम बनाकर देना चाहिए, ताकि बच्चा उसे आसानी से खा सके. इस उम्र में बच्चे की खाने की क्षमता धीरे-धीरे विकसित होती है, इसलिए भोजन की बनावट भी उसकी क्षमता के अनुसार बदलनी चाहिए.
एक साल बाद बच्चे को घर के सामान्य खाने की डालें आदत
उन्होंने बताया कि एक साल की उम्र के बाद बच्चे को घर के सामान्य खाने की आदत डालनी शुरू की जा सकती है. रोटी, दाल और सब्जियां छोटे और नरम टुकड़ों में दी जा सकती हैं. उन्होंने बताया कि आलू की सब्जी या दूसरी हल्की सब्जियों को रोटी के साथ मैश करके भी दिया जा सकता है. फल भी बच्चे की डाइट में शामिल किए जा सकते हैं, लेकिन उन्हें छोटे और सुरक्षित टुकड़ों में देना जरूरी है, क्योंकि बड़े टुकड़े गले में फंसने का खतरा पैदा कर सकते हैं.
चिप्स और पैकेज्ड फूड से बच्चों को रखें दूर
डाइटिशियन ने माता-पिता को सबसे बड़ी सावधानी बाहर के खाने को लेकर बरतने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि अक्सर माता-पिता खुद चिप्स, नमकीन और दूसरी पैकेज्ड चीजें खाते हैं और बच्चे को भी कम उम्र में उनका स्वाद चखा देते हैं. इसके बाद बच्चे को घर के खाने की तुलना में ऐसी चीजें ज्यादा पसंद आने लग सकती हैं. इसलिए छोटी उम्र से ही बच्चे को घर के बने पौष्टिक भोजन की आदत डालनी चाहिए.
हरी सब्जियों को डाइट में करें शामिल
उन्होंने कहा कि बच्चों की डाइट में हरी सब्जियों से तैयार अलग-अलग व्यंजन शामिल किए जा सकते हैं, जबकि चिप्स, नमकीन, मैगी और चाउमिन जैसी चीजों को छोटे बच्चों की नियमित डाइट का हिस्सा नहीं बनाना चाहिए. बच्चे को स्वाद के लिए बाहर की चीजें देने के बजाय शुरुआत से ही घर के पौष्टिक भोजन का स्वाद विकसित करना ज्यादा बेहतर है.
उम्र के हिसाब से धीरे-धीरे बढ़ाएं भोजन
डाइटिशियन रेनू बाला के मुताबिक, बच्चे की डाइट में सबसे जरूरी बात यह है कि उम्र के साथ भोजन को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया जाए और बच्चे की खाने की क्षमता का ध्यान रखा जाए. बचपन में सही खानपान की आदत न केवल शारीरिक विकास के लिए जरूरी है, बल्कि आगे चलकर बच्चे की स्वस्थ जीवनशैली की नींव भी तैयार करती है.



