बैंक खाते में जमा करवाई 16.16 लाख की साइबर फ्रॉड रकम, अब दूसरा आरोपी अमजद खान भी गिरफ्तार

Last Updated:October 04, 2026, 20:53 IST
Ajmer Cyber Fraud Money: अजमेर के सिविल लाइन थाना पुलिस ने साइबर फ्रॉड की रकम दूसरे बैंक खाते में जमा करवाने के मामले में दूसरे आरोपी अमजद खान उर्फ अम्मू को गिरफ्तार किया है. पुलिस के अनुसार, इससे पहले दीपेंद्र उर्फ दीपू रावत को पकड़ा गया था. मामले में 16 लाख 16 हजार 500 रुपये की साइबर फ्रॉड राशि खाते में जमा करवाई गई थी. पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर आगे जांच कर रही है.
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16.16 लाख की साइबर फ्रॉड रकम खाते में जमा, अकाउंट फ्रीज होने पर खुला राज
अजमेर: अजमेर जिले में सिविल लाइन थाना पुलिस ने साइबर ठगी और फ्रॉड के मामलों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. पुलिस ने साइबर फ्रॉड की अवैध राशि को अलग-अलग बैंक खातों में जमा करवाने और हेराफेरी करने के इस सनसनीखेज मामले में दूसरे मुख्य आरोपी को पकड़ लिया है. इससे पहले पुलिस इस प्रकरण के पहले आरोपी दीपेंद्र उर्फ दीपू रावत को गिरफ्तार कर चुकी है, जिससे पूछताछ के बाद मिले जरूरी सुरागों के आधार पर अब इस दूसरे आरोपी तक पहुंच बनाई गई है. इस कार्रवाई से साइबर अपराधियों के बीच हड़कंप मच गया है और पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहराई से छानबीन में जुटी हुई है.
इस पूरे आपराधिक षड्यंत्र का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित मुकेश रावत ने माननीय न्यायालय के इस्तखासे के जरिए सिविल लाइन थाने में एक विस्तृत रिपोर्ट दर्ज कराई. पीड़ित ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि उसने ‘अखिल भारतीय राजनीतिक’ के नाम से एक बैंक खाता खुलवा रखा था, जिसमें विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों से संबंधित फंड की राशि जमा होती थी. पीड़ित के अनुसार, उसके ही गांव लाडपुरा के रहने वाले आरोपी दीपेंद्र उर्फ दीपू रावत ने उसे अपने जाल में फंसाया और झांसे में लेकर उसके इसी बैंक खाते में कुल 16 लाख 16 हजार 500 रुपए की साइबर फ्रॉड से जुड़ी अवैध राशि जमा करवा ली. आरोपी ने चालाकी से उससे सेल्फ का चेक ले लिया और फरार हो गया. इतना ही नहीं, आरोपी ने पीड़ित को यह झूठा भरोसा भी दिलाया था कि इस खाते में आगे जितनी भी रकम आएगी, वह उसे पूरी की पूरी दे देगा, जिससे पीड़ित को शुरुआत में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी का शक नहीं हुआ.
बैंक खाता फ्रीज होने पर खुला साइबर ठगी का बड़ा राजइस मामले का खुलासा तब हुआ जब अचानक पीड़ित मुकेश रावत का बैंक खाता संबंधित बैंक द्वारा फ्रीज कर दिया गया. जब पीड़ित ने बैंक जाकर इस अचानक हुई कार्रवाई के पीछे की वजह जानी, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई. उसे पता चला कि उसके जिस बैंक खाते का इस्तेमाल राजनीतिक फंड के लिए किया जा रहा था, उसमें जमा कराई गई लाखों रुपए की रकम साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी से जुड़ी हुई थी. इस गंभीर जानकारी के सामने आने के बाद पीड़ित ने तुरंत कानूनी मदद लेने का फैसला किया और अदालत का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद पुलिस हरकत में आई और आरोपियों की धरपकड़ शुरू की गई.
मुख्य आरोपी से पूछताछ के बाद पुलिस के हत्थे चढ़ा अमजद खानअदालत के निर्देश पर मामला दर्ज करने के बाद सिविल लाइन थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सबसे पहले मुख्य आरोपी दीपेंद्र उर्फ दीपू रावत को गिरफ्तार किया था. दीपेंद्र से की गई कड़ी पूछताछ और उसके मोबाइल कॉल डिटेल्स तथा बैंक ट्रांजैक्शन की तकनीकी जांच के दौरान पुलिस को यह पुख्ता सबूत मिले कि वह अकेला इस अवैध रैकेट को नहीं चला रहा था. जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ कि दीपेंद्र इस पूरे षड्यंत्र में अमजद खान उर्फ अम्मू (निवासी लोहाखान, अजमेर) के साथ मिलकर साझे तौर पर शामिल था. इन दोनों ने मिलकर भोले-भाले लोगों के खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए किया था.
कौन-कौन लोग शामिल हैइस अहम सुराग के आधार पर पुलिस ने जाल बिछाकर दूसरे आरोपी अमजद खान को भी गिरफ्तार कर लिया है. फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों को आमने-सामने बिठाकर गहन पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस सिंडिकेट के तार और कहां-कहां जुड़े हैं तथा इनके साथ और कौन-कौन से लोग शामिल हैं.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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Ajmer,Rajasthan
First Published :
October 04, 2026, 20:53 IST



