ब्रह्मा जी के यज्ञ से जुड़ी है खोबरा नाथ भैरव मंदिर की कहानी, दीपावली पर लगता है भक्तों का सैलाब; जानें मान्यता

Last Updated:October 03, 2026, 13:14 IST
Anoothe Mandir: खोबरा नाथ भैरव मंदिर का इतिहास ब्रह्मा जी के यज्ञ से जुड़ा बताया जाता है. यह मंदिर धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है और दीपावली के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के कारण कुंवारे युवक-युवतियां भी यहां आने का इंतजार करते हैं. दीपावली के दौरान मंदिर में विशेष धार्मिक माहौल देखने को मिलता है और श्रद्धालु दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की कामना करते हैं.
ख़बरें फटाफट
अजमेर. राजस्थान के अजमेर जिले में कई ऐसे प्राचीन धार्मिक स्थल हैं, जिनसे लोगों की गहरी आस्था और मान्यताएं जुड़ी हुई हैं. इन्हीं में से एक है रामप्रसाद घाट के पास पहाड़ी पर स्थित खोबरा नाथ भैरव मंदिर. यहां मंदिर में विराजमान खोबरा नाथ भैरव को शादी देव के नाम से भी जाता है. मान्यता है कि खोबरा नाथ भैरव के दर्शन और पूजन करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है. खासकर कुंवारों को खोबरा भैरवनाथ शादी का आशीर्वाद देते हैं.
मंदिर के पुजारी ललित मोहन बताते है कि जिन कुंवारों की शादी नहीं हो रही होती है तो अगर वह खोबरानाथ मंदिर में दीपावली से 7 दिन पहले आकर 7 दिन लगातार तेल के दीपक जलाते है, तो जल्द ही उनको अपनी शादी की खुशखबरी मिल जाती है. रविवार के दिन भक्तों का मंदिर में तांता लगा रहता है, लेकिन दिवाली पर हर साल यहां मेला लगता है.
बेसब्री से करते हैं दीपावली का इंतजारपूरे वर्ष कुंवारे युवक-युवतियां दीपावली के दिन का बेसब्री से इंतजार करते हैं. कई लोग विवाह के बाद मन्नत पूरी होने पर प्रसाद चढ़ाने और वितरण करने आते हैं. हर साल यहां बड़ी संख्या में कुंवारे दर्शन करने पहुंचते हैं. पुजारी आगे बताते है कि खोबरा नाथ भैरव मंदिर 5000 साल से भी अधिक पुराना है और इसकी प्राचीनता राजा अजयपाल से भी पहले की है.
यज्ञ के समय भैरव बाबा ने यहां किया था विश्राममान्यता है कि जब भगवान ब्रह्मा ने पुष्कर में यज्ञ का आयोजन किया था उस समय भैरव बाबा काशी से यहां आए थे। यात्रा के दौरान उन्होंने रात में इसी पहाड़ी पर विश्राम किया था।इसके बाद भैरव बाबा पुष्कर चले गए और यज्ञ में शामिल हुए । पुष्कर से वापस लौटने के दौरान उन्होंने इसी स्थान को अपना स्थान बनाया। तभी से यहां भैरव बाबा की पूजा-अर्चना किए जाने की परंपरा चली आ रही है।
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
और पढ़ेंLocation :
Ajmer,Rajasthan
First Published :
October 03, 2026, 13:14 IST



