Entertainment

भगवद्गीता के हर श्लोक को अलग राग में ढाला, लता-आशा के भाई ने यूं बनाई अपनी पहचान, गजब था संगीत के जादूगर का सफर

Last Updated:October 26, 2026, 04:01 IST

भारतीय संगीत को अपनी अनोखी धुनों से नई पहचान देने वाले हृदयनाथ मंगेशकर का नाम दिग्गज संगीतकारों में लिया जाता है. उन्होंने हिंदी और मराठी फिल्मों के साथ भक्ति संगीत में भी अपनी खास छाप छोड़ी. उनकी सबसे दिलचस्प उपलब्धियों में भगवद्गीता के हर श्लोक को अलग राग में स्वरबद्ध करना शामिल है. 26 अक्टूबर को उनके जन्मदिन के मौके पर आइए जानते हैं संगीत के इस जादूगर की जिंदगी, उनके संघर्ष और उन उपलब्धियों के बारे में, जिन्होंने उन्हें खास पहचान दिलाई.

ख़बरें फटाफट

भगवद्गीता के हर श्लोक को अलग राग में ढाला, लता-आशा के भाई ने यूं बनाई पहचान Zoom संगीत के जादूगर

नई दिल्ली. भारतीय संगीत की दुनिया में हृदयनाथ मंगेशकर का नाम उन कलाकारों में शामिल है, जिन्होंने अपनी धुनों से भक्ति, भावनाओं और शास्त्रीय संगीत को एक अलग पहचान दी. मराठी भावगीतों से लेकर हिंदी फिल्मों तक, उन्होंने हर जगह अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. उनकी सबसे खास उपलब्धियों में श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों को अलग-अलग रागों में स्वरबद्ध करना भी शामिल है. संगीत के प्रति उनका यही अनोखा नजरिया उन्हें दूसरे संगीतकारों से अलग बनाता है.

26 अक्टूबर को हृदयनाथ मंगेशकर का जन्मदिन है. इस खास मौके पर आइए जानते हैं उनके जीवन, संगीत के सफर और उन उपलब्धियों के बारे में, जिन्होंने उन्हें भारतीय संगीत जगत का खास नाम बनाया.

संगीत के माहौल में बीता बचपन

हृदयनाथ मंगेशकर का जन्म 26 अक्टूबर 1937 को महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था. वह मशहूर संगीतकार और रंगमंच कलाकार दीनानाथ मंगेशकर के बेटे हैं. उनके परिवार में संगीत की मजबूत परंपरा रही है. उनकी बड़ी बहनों में लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसी दिग्गज गायिकाएं शामिल हैं. बचपन से ही संगीत के बीच रहने के कारण उनकी दिलचस्पी इस कला में बढ़ती गई. हालांकि, परिवार की बड़ी पहचान के बीच अपनी अलग जगह बनाना आसान नहीं था. हृदयनाथ ने अपनी मेहनत और संगीत की समझ के दम पर एक अलग शैली विकसित की. आगे चलकर उनकी धुनों में शास्त्रीय संगीत की गहराई के साथ भावनाओं की खूबसूरत झलक भी देखने को मिली.

उस्ताद अमीर खान से सीखा संगीत का हुनर

हृदयनाथ मंगेशकर ने शास्त्रीय संगीत की बारीकियां सीखने के लिए महान गायक उस्ताद अमीर खान से प्रशिक्षण लिया. संगीत की इस शिक्षा ने उनके नजरिए को और मजबूत बनाया. अपने करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने फिल्मों और स्टेज शो में गायन भी किया, लेकिन धीरे-धीरे संगीत निर्देशन उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गया. उन्होंने मराठी और हिंदी फिल्मों के लिए धुनें तैयार करने के साथ भजन, अभंग और भावगीत जैसी विधाओं में भी काम किया. उनके संगीत की खास बात यह रही कि उन्होंने पारंपरिक रचनाओं को आधुनिक श्रोताओं तक पहुंचाने की कोशिश की. यही वजह है कि उनका काम सिर्फ फिल्मी गानों तक सीमित नहीं रहा.

भगवद्गीता के हर श्लोक के लिए चुना अलग राग

हृदयनाथ मंगेशकर के संगीत सफर की सबसे अनोखी उपलब्धियों में श्रीमद्भगवद्गीता की रिकॉर्डिंग का जिक्र खास तौर पर किया जाता है. उन्होंने भगवद्गीता के हर श्लोक को अलग राग में स्वरबद्ध करने का प्रयोग किया. यह काम उनकी शास्त्रीय संगीत पर पकड़ और आध्यात्मिक रचनाओं के प्रति उनके लगाव को दिखाता है. इस प्रयास के जरिए उन्होंने धार्मिक ग्रंथ के श्लोकों को संगीत के माध्यम से पेश करने की कोशिश की. इससे श्रोताओं को भगवद्गीता की रचनाओं को एक अलग अंदाज में सुनने का मौका मिला. उनका यह प्रयोग भारतीय संगीत की विविधता और उसकी आध्यात्मिक ताकत को भी सामने लाता है.

फिल्म ‘लेकिन’ के संगीत को मिली खास पहचान

फिल्मी दुनिया में भी हृदयनाथ मंगेशकर ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया. उन्होंने हिंदी और मराठी फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया और अपनी अलग शैली से दर्शकों का ध्यान खींचा. उनकी बनाई और निर्मित फिल्म ‘लेकिन’ के संगीत को खास सराहना मिली. इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिया गया. यह सम्मान उनके करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है.हृदयनाथ की खासियत यह रही कि उन्होंने फिल्मों में भी संगीत की गुणवत्ता और भावनात्मक गहराई से समझौता नहीं किया. उनकी धुनों में शास्त्रीय संगीत का असर साफ महसूस किया जा सकता है.भारतीय संगीत में उनके योगदान को देखते हुए हृदयनाथ मंगेशकर को कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया. साल 2009 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया. इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार भी मिला.

About the AuthorMunish KumarSenior sub editor

न्यूज 18 हिंदी में एंटरटेनमेंट सेक्शन में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार दिल्ली के रहने वाले हैं. डिजिटल मीडिया में उन्हें 10 साल का अनुभव है.राजधानी कॉलेज (DU) से पॉलिटिकल साइंस (ऑनर्स) की पढ…

और पढ़ेंLocation :

New Delhi,New Delhi,Delhi

First Published :

October 26, 2026, 04:01 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj