मोबाइल की फोटो दिखाकर आजमगढ़ में दुर्गापूजा के लिए मूर्ति बनवा रहे लोग, महाराष्ट्र व कोलकाता के कलाकार बना रहे जीवंत प्रतिमा

Last Updated:October 04, 2026, 14:33 IST
आजमगढ़ के रानी की सराय में दुर्गा पूजा के लिए अनोखी मूर्तियां बनती हैं. कोलकाता और महाराष्ट्र के कारीगर मिलकर मिट्टी, पुआल व रंगों से जीवंत प्रतिमाएं बनाते हैं, जिनकी बुकिंग दूर-दूर से होती है. इसमें सबसे खास बात ये है कि यहां के लोग मोबाइल में देवी की फोटो को दिखाकर मनपसंद मूर्तियों को दुर्गापूजा और नवरात्रि के लिए बनवा रहे हैं.
नवरात्रि और दुर्गा पूजा का त्योहार शुरू होते ही आजमगढ़ शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक एक अलग ही उत्साह और माहौल देखने को मिलता है. नवरात्रि के दिनों में जगह-जगह बेहद खूबसूरत और बड़े पूजा पंडाल तैयार किए जाते हैं. इन पंडालों में स्थापित होने वाली मां दुर्गा की अनोखी मूर्तियां लोगों के बीच सबसे बड़ा आकर्षण बनती हैं.
पूरे शहर में लगने वाले दुर्गा पूजा पंडालून में भक्तों को दिखाने वाली माता की भाव मूर्तियां आजमगढ़ के एक बेहद खास बाजार में तैयार की जाती है जो अपने आप में मूर्तियों की सबसे बड़ी मार्केट भी कही जाती है. आजमगढ़ के रानी की सराय में इन दिनों गजब की चहल-पहल रहती है. इस मार्केट की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहां देश के कई अलग-अलग राज्यों से आए कुशल मूर्तिकार काम करते हैं.
यहां के हुनरमंद कलाकारों के द्वारा मिट्टी, पुआल और रंगों के तालमेल से ऐसी मूर्तियां तैयार की जाती हैं जिसे देखने वाले बस देखते ही रह जाते हैं. यहां की दुकानों में सजी ये प्रतिमाएं पहली नजर में ही दिल जीत लेती हैं. इस मशहूर बाजार में पश्चिम बंगाल के कोलकाता से लेकर महाराष्ट्र तक के दिग्गज कारीगर महीनों पहले ही मूर्तियों को भव्य रूप देने में लग जाते हैं.
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कोलकाता के कारीगर अपने पारंपरिक बंगाली अंदाज और बारीक नक्काशी के लिए पूरे देश में जाने जाते हैं. वहीं महाराष्ट्र के कलाकार मूर्तियों को आधुनिक रूप और शानदार रंग देने में माहिर होते हैं. अलग-अलग संस्कृति और कला के इस अनूठे संगम की वजह से यहां बनने वाली हर मूर्ति जीवंत दिखती है.
सबसे खास बात यह है कि यहां पर बनने वाली मूर्तियों का डंका सिर्फ आजमगढ़ जिले में ही नहीं बल्कि आसपास के कई अन्य पड़ोसी जिलों में भी बजता है. मऊ, जौनपुर, गाजीपुर और बलिया जैसे सीमावर्ती इलाकों से पूजा समितियों के सदस्य महीनों पहले यहां आकर बुकिंग कराने लगते हैं. हर किसी की यही चाहत होती है कि उनके इलाके के पूजा पंडाल में लगने वाली मूर्ति सबसे हटकर और मनमोहक हो.
इस मार्केट की एक और सबसे बड़ी खासियत यहां की कस्टमाइज्ड मूर्तियां है. लोग इंटरनेट या सोशल मीडिया से अपनी पसंद की मूर्तियों के फोटो लेकर यहां के मूर्तिकारों के पास पहुंचते हैं. अनुभवी कलाकार उस फोटो को देखकर बिल्कुल हूबहू वैसी ही प्रतिमा मिट्टी पर उतार देते हैं. चेहरे के भाव से लेकर वस्त्रों और आभूषणों की बनावट तक में कोई फर्क नहीं दिखता.
बाजार में यह रौनक केवल नवरात्रि या दुर्गा पूजा तक ही सीमित नहीं रहती है. जैसे ही दुर्गा पूजा खत्म होती है, कारीगर तुरंत दीपावली के लिए मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाएं बनाने में जुट जाते हैं. इसके फौरन बाद लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं. इस तरह दुर्गा पूजा से लेकर छठ तक लगभग दो महीने यह बाजार खरीदारों की भीड़ से पूरी तरह गुलजार रहता है.
कीमतों की बात करें तो आजमगढ़ का यह बाजार हर किसी की जेब के पूरी तरह अनुकूल है. यहां आम लोगों और छोटे पंडालों के लिए पांच हजार रुपये से मूर्तियां मिलना शुरू हो जाती हैं. वहीं बड़े आयोजकों और भव्य पंडालों के लिए एक लाख रुपये तक की विशाल मूर्तियां तैयार की जाती हैं. मूर्तियों के आकार और उनमें इस्तेमाल सजावट के आधार पर दाम तय होते हैं, जिससे हर ग्राहक आसानी से खरीदारी कर पाता है.
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October 04, 2026, 14:33 IST



