राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा बांध, अंग्रेज भी थे जिसके मुरीद, सरदार समंद की अनसुनी कहानी जानकर रह जाएंगे हैरान

पाली. इतिहास के पन्नों को टटोलें तो राजस्थान का हर कोना किसी न किसी नायाब कलाकृति और दूरदर्शिता की कहानी बयां करता है. बात जब मरुधरा में पानी के संरक्षण और शाही ठाठ-बाठ की हो, तो पाली जिले के ‘सरदार समंद बांध’ का नाम सबसे पहले ज़हन में आता है. पश्चिमी राजस्थान का यह दूसरा सबसे बड़ा बांध सिर्फ जल भंडारण का ज़रिया नहीं है, बल्कि यह करीब 119 साल पुराना एक ऐसा ऐतिहासिक दस्तावेज़ है, जो आज भी अपनी प्राकृतिक खूबसूरती से हर पर्यटक का दिल जीत लेता है. अंग्रेजी हुकूमत के समय ‘वाटर टैंक’ के नाम से जाना जाने वाला यह जल निकाय आज ऐतिहासिक गौरव, कृषकों की जीवनरेखा और पर्यटन के अनूठे संगम के रूप में पूरे राजस्थान में प्रसिद्ध है.
सरदार समंद बांध का इतिहास ब्रिटिश भारत और मारवाड़ रियासत के दौर से गहराई से जुड़ा हुआ है. इस विशाल जल संरचना का निर्माण कार्य सन 1899 में शुरू कराया गया था, जो लगभग सात वर्षों के अथक प्रयासों के बाद सन 1906 में पूरी तरह बनकर तैयार हुआ. इस ऐतिहासिक बांध का निर्माण मारवाड़ के तत्कालीन महाराजा सरदार सिंह ने करवाया था, जिसके कारण इसका नाम ‘सरदार समंद’ पड़ा. जिस समय यह बांध बनकर तैयार हुआ, उस समय भारत अंग्रेजों की गुलामी का दौर झेल रहा था. मारवाड़ क्षेत्र में जल प्रबंधन और दूरदर्शिता की इस मिसाल को देखकर अंग्रेज अफसर भी अचंभित थे. बांध के विशाल जल विस्तार और इसकी उपयोगिता को देखते हुए ब्रिटिश शासन के दौरान अंग्रेज इसे ‘मारवाड़ का वाटर टैंक’ कहकर संबोधित करते थे
पाली से 20 किलोमीटर दूर है यह बांधभौगोलिक स्थिति और जल भराव क्षमतायह विशाल बांध पाली जिला मुख्यालय से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. पहाड़ी घाटियों और प्राकृतिक दृश्यों के बीच स्थित होने के कारण यह पूरे इलाके में जल आपूर्ति का मुख्य केंद्र रहा है. जल स्रोत: इस बांध में प्राकृतिक रूप से केवल बारिश का पानी (कैचमेंट एरिया से आने वाला जल) ही एकत्र होता है. भराव क्षमता: बांध की कुल भराव क्षमता 3,200 एमसीएफटी (MCFT) है.
25 फीट तक बांध की भराव क्षमताइसका अधिकतम भराव स्तर 25 फीट तक रहता है.यह बांध स्थानीय किसानों के लिए वरदान साबित होता रहा है. कृषि प्रधान मारवाड़ क्षेत्र में फसलों की सिंचाई, पशुओं के लिए पेयजल और आसपास के जल स्तर (वॉटर टेबल) को बनाए रखने में इस बांध की केंद्रीय भूमिका है.
पर्यटन, पैलेस और सनसेट का आकर्षणइतिहास और सिंचाई का जरिया होने के साथ-साथ आज सरदार समंद बांध एक प्रमुख टूरिस्ट स्पॉट के रूप में अपनी पहचान बना चुका है.
रॉयल हेरिटेज स्टे: बांध के ठीक समीप पहाड़ी पर स्थित ऐतिहासिक पैलेस को एक प्रिमियम हेरिटेज होटल के रूप में संचालित किया जाता है. इस होटल का रखरखाव और संचालन आज भी जोधपुर/मारवाड़ के राजघराने के सदस्यों द्वारा कुशलतापूर्वक देखा जाता है.
अद्भुत सनसेट पॉइंट: शाम के समय झील का नजारा देखने लायक होता है. अरावली की तलहटी और पानी की सतह पर ढलते सूरज की लालिमा (सनसेट) का नजारा बेहद मनमोहक होता है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से फोटोग्राफर और पर्यटक पहुंचते हैं.
नेचुरल वाइल्डलाइफ और बर्ड वॉचिंग: वर्षा ऋतु के दौरान बांध का पानी भरने पर यहां कई प्रजातियों के प्रवासी और स्थानीय पक्षी डेरा डालते हैं. शांत वातावरण और प्राकृतिक हरियाली के कारण यह वीकेंड पर घूमने के लिए पसंदीदा स्थल है.



