वोटिंग में शहरी निकायों के मुकाबले पीछे रह गए गांव, घरों से ज्यादा नहीं निकले वोटर

जयपुर. राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव के पहले चरण में गांवों की सरकार चुनने के लिए मतदाताओं में उतना उत्साह नहीं दिखा, जितना हाल ही में हुए शहरी निकायों के चुनाव में नजर आया था. 22 अक्टूबर को प्रदेश के 16 जिलों में जिला परिषद और पंचायत समितियों के सदस्यों के लिए मतदान हुआ. शाम 6 बजे तक कुल मतदान का औसत 62.90 फीसदी रहा. इसके मुकाबले शहरी निकायों के पहले चरण में 76.41 फीसदी मतदान हुआ था. यानी ग्रामीण इलाकों में मतदान का आंकड़ा शहरी निकायों से करीब 13.5 प्रतिशत कम रहा. पहले चरण में 16 जिला परिषदों की 293 सीटों और 104 पंचायत समितियों की 1,788 सीटों के लिए वोट डाले गए. कुल 2,081 पदों के लिए 6,926 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे.
मतदान ईवीएम के जरिए कराया गया. हालांकि, कई इलाकों में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, वहीं कुछ जगहों पर कम मतदान और बहिष्कार की घटनाएं भी सामने आई. पहले चरण का मतदान प्रतिशत पिछले पंचायत चुनावों के आंकड़ों से भी कम रहा. वर्ष 2020 में कोरोना के दौरान हुए पंचायत चुनावों में चार चरणों का औसत मतदान 63.15 फीसदी था. वहीं, वर्ष 2021 में तीन चरणों में हुए चुनावों का औसत 64.40 फीसदी रहा था. इस बार पहले चरण में 62.90 फीसदी मतदान दर्ज किया गया, जो वर्ष 2020 के औसत से 0.25 प्रतिशत और वर्ष 2021 के औसत से 1.50 प्रतिशत कम है.
बीकानेर में सबसे ज्यादा, पाली में सबसे कम वोटिंग
जिलावार आंकड़ों में बीकानेर 71.42 फीसदी मतदान के साथ सबसे आगे रहा. इसके बाद झालावाड़ में 68.35 फीसदी, बाड़मेर में 67.37 फीसदी, फलोदी में 66.74 फीसदी और अलवर में 64.97 फीसदी मतदान दर्ज किया गया. उदयपुर में 64.42 फीसदी, कोटा में 64.15 फीसदी, नागौर में 64.84 फीसदी और अजमेर में 62.49 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाले. वहीं, पाली जिले में सबसे कम 48.27 फीसदी मतदान हुआ. सिरोही में 55.66 फीसदी और राजसमंद में 56.30 फीसदी मतदान दर्ज किया गया. पंचायत समिति स्तर पर बाड़मेर की मंगता पंचायत समिति में 79.55 फीसदी मतदान हुआ, जबकि पाली की रानी स्टेशन पंचायत समिति में यह आंकड़ा महज 40.02 फीसदी रहा. मारवाड़ जंक्शन में 45.67 फीसदी और सिरोही की कालंद्री पंचायत समिति में 46.51 फीसदी मतदान हुआ.
कई गांवों में वोट बहिष्कार, ईवीएम खराब होने से रुका मतदान
कम मतदान के बीच कुछ गांवों में स्थानीय मुद्दों को लेकर लोगों ने चुनाव का बहिष्कार भी किया. राजसमंद जिले की शिशवी की ढाणी में ग्राम पंचायत बदलने के विरोध में 400 मतदाताओं में से केवल तीन लोगों ने वोट डाला. ग्रामीणों का कहना था कि पहले उनकी ढाणी शिशवी से जुड़ी थी, जो करीब दो किलोमीटर दूर है. अब इसे करीब साढ़े चार किलोमीटर दूर सोडावास पंचायत में जोड़ दिया गया है. कोटा जिले के चक टोडी गांव में भी ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार किया. यहां 371 मतदाताओं ने वोट नहीं डाले.
ग्रामीणों की मानें तो पहले डिप्टी चंबल पंचायत करीब दो किलोमीटर दूर थी, जबकि अब उन्हें आठ किलोमीटर दूर सिनोता से जोड़ दिया गया है. पाली जिले के डुठारिया गांव में भी बहिष्कार की स्थिति रही. अधिकारियों ने ग्रामीणों को मनाने की कोशिश की, लेकिन वे मतदान के लिए तैयार नहीं हुए. वहीं, अयाना के बूथ संख्या दो पर ईवीएम खराब होने से करीब एक घंटे तक मतदान रुका रहा. दूसरी ओर, पाली के शक्ति चौधरी की ढाणी में एक बुजुर्ग महिला लाठियों के सहारे मतदान केंद्र पहुंचीं और अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया.
अगले चरण की तैयारी के साथ उम्मीदवारों पर रहेगी नजर
पहले चरण का मतदान पूरा होने के साथ ही राजनीतिक दलों ने अपने समर्थित उम्मीदवारों से संपर्क बनाए रखने की तैयारी शुरू कर दी. भाजपा और कांग्रेस के स्थानीय प्रभारियों को उम्मीदवारों के संपर्क में रहने की जिम्मेदारी दी गई है. हालांकि, गुरुवार देर शाम तक उम्मीदवारों की बाड़ेबंदी शुरू होने की पुष्टि नहीं हुई थी. अब पंचायत चुनाव के अगले चरण पर नजर रहेगी. 23 अक्टूबर यानी आज 16 जिलों की 3,314 ग्राम पंचायतों में सरपंच और 28,422 वार्ड पंच पदों के लिए नामांकन भरे जाने हैं. इसी दिन तीसरे चरण के लिए 17 जिला परिषदों और 116 पंचायत समितियों में नामांकन का अंतिम दिन भी है. ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी हलचल आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है.



