Rajasthan

शुक्ल पक्ष नहीं…अमावस्या के दिन प्रजनन, एक-दो नहीं दर्जनभर से ज्यादा बच्चों का बाप बना नंदी

नरेश पारीक/चूरू:- भारत के कोने-कोने में आज लाखों गौपालक मिल जाएंगे, जो गोपालन के साथ ही गौ संवर्धन की दिशा में भी काम कर रहे हैं. उन्ही गौपालको में से एक राजस्थान के चूरू जिले के छोटे से गांव कागड़ के दंपति बाबूलाल ढाका और उनकी पत्नी छोटू देवी हैं, जो गौ पालन के साथ ही गौ संवर्धन की दिशा में काम कर रहे हैं. कागड़ निवासी इस दंपति के पास आज पांच दर्जन से अधिक शाईवाल नस्ल की गाये हैं और आधा दर्जन से अधिक शाईवाल नस्ल के नंदी और सांड हैं.

दिलचस्प बात तो यह है कि 17 से अधिक बछड़े और बछड़ी तो ढाका दंपति के पास मौजूद महादेव नाम के इस सांड के प्रजनन से पैदा हुए हैं. बाबूलाल ढाका लोकल 18 को बताते हैं कि उनका मुख्य उद्देश्य गौ संवर्धन है और उसी के चलते उन्होंने इस विशेष सांड को कोडमदेसर से एक लाख 65 हजार रूपए में खरीदा था.

सीमन का किया स्टॉक
बाबूलाल ढाका Local 18 को आगे बताते हैं कि उनका बचपन का शौक उन्होंने शादी के बाद पत्नी के साथ पूरा करने का संकल्प लिया और उसी दिशा में आज वह पत्नी के साथ गौ संवर्धन की दिशा में काम कर रहे हैं. ढाका बताते हैं महादेव की उम्र करीब आठ साल है और इसकी डाइट का वह विशेष ख्याल रखते हैं, जिसे सुबह शाम हरा चारा और पिसा हुआ लूंग (खेजड़ी) की पत्तियां, तिल की खल और मोठ, बाजरा दिए जाते हैं.

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इस समय कराते हैं प्रजनन
ढाका ने बताया की शुक्ल पक्ष में वह गायों का प्रजनन नहीं करवाते हैं, बल्कि कृष्ण पक्ष में गायों का प्रजनन करवाते हैं, ताकि बछड़िया ज्यादा मिले. ढाका कहते हैं कि महादेव उनके लिए उम्दा अनमोल रत्न है. उन्होंने महादेव के सीमन को बीज के रूप में नाइट्रोजन गैस में स्टोक करके रखा है, ताकि महादेव बूढ़ा भी हो जाए, तो उसका बीज बचा रहे और नस्ल चलती रहे.

Tags: Animal husbandry, Churu news, Local18, Rajasthan news

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