Rajasthan

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर उमड़ता है भक्तों का सैलाब, मेवाड़ से बड़ी संख्या में पहुंचते हैं भक्त, जानें परंपरा

Last Updated:September 06, 2026, 23:03 IST

Shri Krishna Janmashtami: श्री दूधाधारी गोपाल मंदिर के मुख्य पुजारी कल्याण शर्मा ने बताया कि दूधाधारी गोपाल मंदिर में जन्माष्टमी के दूसरे दिन नंदोत्सव के दौरान मटकी फोड़ और मल्लखंभ लीला आयोजित करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है. यह परंपरा कई दशकों से मंदिर में उत्साह के साथ निभाई जा रही है. मंदिर की परंपरा में नंदोत्सव को विशेष महत्व दिया जाता है.

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भीलवाड़ा – मेवाड़ के प्रवेश द्वार वस्त्र नगरी भीलवाड़ा में कृष्ण जन्माष्टमी की धूम अभी तक खत्म नहीं हुई है. भीलवाड़ा में कृष्ण जन्म के दूसरे दिन बाद नंदू महोत्सव की परंपरा निभाई जाती है. भीलवाड़ा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के तहत सांगानेरी गेट स्थित ऐतिहासिक श्री दूधाधारी गोपाल मंदिर में नंदोत्सव के अवसर पर पारंपरिक मटकी फोड़ लीला का आयोजन किया गया. यह परंपरा पिछले 51 वर्षों से इस मंदिर में निभाई जा रही है. इस महोत्सव के दौरान दही हांडी लीला, बधाई गान, और मलखम्भ लीला का आयोजन होता है. भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़े इस आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में पहुंचे. मंदिर परिसर में उत्सव का माहौल उस समय और रंगीन हो गया जब ग्वाल-बालों ने मटकी फोड़ लीला प्रस्तुत की गई.

श्री दूधाधारी गोपाल मंदिर के मुख्य पुजारी कल्याण शर्मा ने बताया कि दूधाधारी गोपाल मंदिर में जन्माष्टमी के दूसरे दिन नंदोत्सव के दौरान मटकी फोड़ और मल्लखंभ लीला आयोजित करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है. यह परंपरा कई दशकों से मंदिर में उत्साह के साथ निभाई जा रही है। मंदिर की परंपरा में नंदोत्सव को विशेष महत्व दिया जाता है. मटकी फोड़ के साथ मल्लखंभ जैसे पारंपरिक कार्यक्रम भी यहां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहते हैं. हर साल बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन को देखने पहुंचते हैं. आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति और उल्लास का माहौल नजर आया हैं. श्रद्धालुओं ने भगवान गोपाल के दर्शन किए और जन्माष्टमी महोत्सव की खुशियां मनाईं. दूधाधारी गोपाल मंदिर में जन्माष्टमी और नंदोत्सव के आयोजन निंबार्क परंपरा के अनुसार किए जाते हैं.

इस तरह होती हैं मलखम्भ प्रतियोगितामंदिर मुख्य पुजारी कल्याण शर्मा ने बताया कि इस प्रतियोगिता में ग्वाले रूप में युवा मलखम्भ पर चढ़ने का प्रयास करते हैं. जहां 25 फीट ऊंचे मलखम्भ पर मुल्तानी मिट्टी और तेल लगाया जाता है. प्रतियोगिता के दौरान पानी की बौछार के बीच सिक्के, मेवा और अन्य सामग्री लूटने की लीला भी की जाती है और उन्हें रोकने के लिए उन पर पानी की बौछार की जाती है. अब यह आयोजन केवल धार्मिक उत्सव ना रहकर भीलवाड़ा के लोगों के लिए एक सांस्कृतिक धरोहर बन चुका है.

मंदिर की वास्तुकला और विशेषताभीलवाड़ा के सांगानेरी गेट पर स्थित श्री दूधाधारी गोपाल मंदिर वृंदावन के प्रेम मंदिर की तर्ज पर बना हुआ है. यहाँ पर जन्माष्टमी भी एक दिन बाद मनाई जाती है और उसी क्रम में नंद महोत्सव का आयोजन होता है. मंदिर की वास्तुकला और आयोजन शैली वृंदावन की तर्ज पर होती है जिससे यह मंदिर और भी खास बन जाता है.

About the AuthorJagriti Dubey

मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…

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Bhilwara,Rajasthan

First Published :

September 06, 2026, 23:03 IST

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