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10 लाख में 100 ग्राम मधुमक्खियों का जहर, डंक है या अमृत? क्या होता है इसमें, किस बीमारी का होता है इलाज, जानें सब कुछ

Last Updated:October 26, 2026, 19:23 IST

What is Bee Venom: क्या आपको पता है कि मधुमक्खियों का डंक अमृत से कम नहीं है, इसलिए 100 ग्राम मधुमक्खियों का डंक 10 लाख रुपये में आसानी से बिक जाता है. मधुमक्खियों के डंक में कई तरह की रासायनिक संरचना पाई जाती है जो औषधीय गुणों से भरपूर है. दुनिया भर में इसे लेकर कई रिसर्च चल रही है जिनमें कैंसर का इलाज भी सामने आ रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि मधुमक्खियों के डंक में ऐसा क्या होता है जो जहर होते हुए भी इतना महंगा है.10 लाख में 100 ग्राम मधुमक्खियों का जहर, डंक है या अमृत? क्या होता है इसमें Zoomमधुमक्खियों का जहर इतना बेशकीमती क्यों. Photo : AI

What is Bee Venom: मधुमक्खी अगर एक जगह भी डंक मार दे तो बुखार लगना तय है. फिर दो-तीन दिनों तक वह जगह सूजी रहती है और भयंकर दर्द होता है लेकिन यही दर्द इंसान के लिए अमृत भी बन जाता है. आपको जानकर हैरानी होगी मधुमक्खी के डंक की कीमत हजारों, लाखों में नहीं बल्कि करोड़ों में है. 100 ग्राम मधुमक्खी के विष की कीमत 10 लाख रुपये है. यानी एक करोड़ रुपये में एक किलो मधुमक्खी का विष मिलता है. मधुमक्खी के विष को वैज्ञानिक भाषा में एपीटॉक्सिन कहा जाता है. रासायनिक रूप से एपिटॉक्सिन में बेहद समृद्धशाली तत्व पाए जाते हैं. इसका सबसे महत्वपूर्ण भाग मेलिटिन है जो पूरे विष में 40 से 60 प्रतिशत तक होता है. ऐसा माना जाता है कि इससे कई असाध्य बीमारियों का इलाज हो सकता है. हालांकि वर्तमान में मधुमक्खी के विष से सबसे ज्यादा एंटी एजिंग क्रीम बनाई जाती है. आखिर मधुमक्खी का विष इतना महंगा क्यों है और इसका किन-किन बीमारियों में यूज किया जाता है, इसके लिए हमने कुछ एक्सपर्ट से बात की है.

मधुमक्खी के जहर में क्या होता है

मधुमक्खी का विष एसिडिक होता है. इसका गंध तीखा और कलर रंगहीन होता है. जब भी मधुमक्खियों को अपने उपर खतरा महसूस होता है वह अपने डंक को लक्ष्य पर छोड़ती है. मधुमक्खी के विष में मुख्य रूप कई तरह के प्रोटीन, पेप्टाइड्स और छोटे-छोटे अणुओं का एक जटिल मिश्रण होता है. यह दुर्लभ मिश्रण है. इसका सबसे बेशकीमती चीज है मेलिटिन. इसके बाद इसमें फास्फोलिपेज A2 होता है जो इंसानों में एलर्जी पैदा करता है. यह कोशिकाओं की झिल्ली को तोड़कर उन्हें नष्ट कर देता है. इसके अलावा इसमें एडोलैपिन नामक तत्व होता है. फिर इसमें न्यूरोटॉक्सिन एपामिन भी होता है जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है. फिर हाइअलुरोनिडेज, डिग्रैन्युलेटिंग पेप्टाइड, टर्टियापिन और सेकापिन जैसे पेप्टाइड्स पाए जाते हैं. इसमें बहुत कम मात्रा में हिस्टामाइन, डोपामाइन और नोराड्रेनालाईन जैसे रसायन भी शामिल होते हैं.

क्या यह कैंसर को ठीक करता है

अध्ययनों के अनुसार मधुमक्खी के जहर में एंटी-इंफ्लामेटरी गुण होता है. सबसे बड़ी बात यह है कि मधुमक्खी के जहर में जो मेलिटिन नाम का तत्व होता है, जिसमें 26 एमिनो एसिड पाए जाते है. इसमें एंटी-कैंसर गुण होता है. इस विषय पर हमने नारायणा हेल्थकेयर में गाइनेकोलॉजी ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट की कंसल्टेंट डॉ. शालू कुमारी से बात की तो उन्होंने बताया कि 2023 में इस विषय को लेकर एक रिसर्च पेपर प्रकाशित हुई थी. इसमें प्री-क्लीनिकल ट्रायल के परिणामों का उल्लेख किया गया है. इस रिसर्च के आधार पर मैं इतना कह सकती हूं कि यह एक प्री-क्लीनिकल ट्रायल है. यानी अभी सिर्फ चूहों पर इसका प्रयोग किया गया है जिनमें ब्रेस्ट कैंसर को लेकर उत्साहजनक परिणाम सामने आए थे. ब्रेन कैंसर वाले ट्यूमर पर किसी तरह का असर नहीं दिखा.  हालांकि अन्य कैंसरों के ट्यूमर को खत्म करने पर इसकी क्या प्रतिक्रिया होती है, इसका अभी पता नहीं चला है. इसलिए अभी इसके संबंध में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा. इससे कोई अब तक दवा नहीं बनी है. इसलिए लोगों को मधुमक्खियों के विष को लेने की भूल कतई नहीं करनी चाहिए.  हां, इसके कुछ उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं. अगर आगे की रिसर्च में सब कुछ सही रहता है तो अगले कुछ सालों में इसके परिणाम बेहतर आ सकते हैं लेकिन इसमें अभी लंबा वक्त लगेगा.

इसके अन्य फायदे

गठिया में रामबाण-हेल्थलाइन की रिपोर्ट ने कुछ अध्ययनों का हवाला देते हुए बताया कि मधुमक्खी के जहर में एंटी-इंफ्लामेटरी गुण पाए गए हैं जो गठिया के दर्द को ठीक करने में रामबाण साबित हो सकता है. इसके मुख्य घटक मेलिटिन का इस्तेमाल यदि कम मात्रा में किया जाए तो यह सूजन पैदा करने वाले तत्वों को रोक देता है.2022 के अध्ययन के मुताबिक, यह जहर दर्द को चूसने वाला, एंटी-बैक्टीरियल और न्यूरोप्रोटेक्टिव गुणों से भरपूर है. 2018 के एक अध्ययन में 120 ऑर्थराइटिस मरीजों पर एक क्लीनिकल ट्रायल किया है. इन्हें हर दूसरे दिन 5 से 15 मधुमक्खी के डंक वाली बी-वेनम एक्यूपंचर थेरेपी दी गई. इसका परिणाम बेहद सकारात्मक आया है. इसमें मरीजों को पेन रिलीव दवा खाने जैसे ही राहत मिली.
पार्किंसन में फायदेमंद–2022 की एक रिपोर्ट के मुताबिक मधुमक्खी का जहर पार्किंसंस बीमारी में मरीजों को फायदा पहुंचा सकता है. अध्ययन में पाया गया कि इसके इस्तेमाल से मरीजों की मोटर कार्यप्रणाली बेहतर हुई, ऑक्सीडेटिव स्ट्रैस कम हुआ और एंटी-इंफ्लामेटरी प्रभाव बेहतर देखने को मिला. इसके बाद जब एलोपैथिक दवाओं के साथ दिया गया तो परिणाम और बेहतर आया.
एंटी-एजिंग क्रीम-मधुमक्खी के विष से कई तरह के एंटीएजिंग क्रीम बनाई जाती है. बाजार में कई ऐसी क्रीम आ गई है जिसमें बी वेनम शब्द का यूज किया जाता है.आजकल कई स्किन केयर कंपनियां सीरम और मॉइस्चराइजर जैसे उत्पादों में इसका यूज करने लगी हैं. 2021 की एक रिसर्च के अनुसार इसमें मौजूद बायो एक्टिव कंपाउड स्किन से इंफ्लामेशन को हटाता है और कोलेजन के प्रोडक्शन को बेहतर बनाता है. यह स्किन से फ्री रेडिकल्स को कम कर ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करता है. यह चेहरे की मांसपेशियों को आराम देता है और त्वचा में कसाव लाता है, जिससे महीन रेखाएं और झुर्रियां कम होती हैं. इसे बिना इंजेक्शन का प्राकृतिक बोटॉक्स माना जाता है. इतना ही नहीं इससे मुंहासे, एक्जिमा, एलोपेसिया और विटिलिगो जैसी स्किन संबंधी समस्याओं में भी सुधार देखा गया. यही कारण है कि आज कॉस्मेटिक कंपनियां बी-वेनम का उपयोग महंगे एंटी-एजिंग सीरम, नाइट क्रीम और फेस मास्क बनाने में करती हैं.

यह इतना महंगा क्यों बिकता है?

पहला तो यह मधुमक्खी के जहर से दुर्लभ औषधि बनाने में इस्तेमाल किया जाता है. दूसरा मधुमक्खियों के विष को निकालने में बहुत अधिक समय और कई तरह की तकनीक की जरूरत होती है. 1 ग्राम विष निकालने के लिए 10 हजार मधुमक्खियों की जरूरत होती है और कई महीनों का समय लगता है. इसके अलावा मधुमक्खियां एक ही जगह पर स्थायी होनी चाहिए और खास प्रजाति एपिस मेलिफेरा ही होनी चाहिए. जहर निकालने के लिए कांच की एक खास इलेक्ट्रॉनिक प्लेट का इस्तेमाल किया जाता है. इसपर हल्का करंट दिया जाता है. मक्खियां गुस्सा होकर कांच पर डंक मारती हैं. इससे उनका डंक टूटता नहीं और जहर कांच पर सूख जाता है.इतना होने के बाद भी जहर को कलेक्ट करना आसान नहीं होता. विष निकालने के लिए एक्सट्रैक्टर सहित अन्य कई तकनीकियों की जरूरत होती है, जिसके लिए मधुमक्खियों का जमीन पर स्थाई रूप से ठहरना अनिवार्य है. थोड़ी सी गलती से सब काम चौपट हो जाता है. इसलिए यह काम सब नहीं कर सकता है और इसमें गहन प्रशिक्षण की जरूरत होती है.

महत्वपूर्ण चेतावनी

बेशक मधुमक्खियों का विष फायदेमंद हो लेकिन इस पर अभी रिसर्च चल रही है. ऐसे में किसी भी परिस्थिति में आप इसका इस्तेमाल किसी भी तरह से नहीं करें. यह जहर ही होता है. बिना अपने डॉक्टरों की सलाह से इसका इस्तेमाल न करें. न्यूज 18 हिन्दी इसकी जिम्मेदारी नहीं लेगा. चाहे वह एंटी-एजिंग क्रीम ही क्यों न हो, बिना डॉक्टरों की सलाह इसका इस्तेमाल न करें.

About the AuthorLakshmi Narayan

With 20 years of extensive experience in Hindi journalism, Lakshmi Narayan is a distinguished media professional and digital team leader at Network18, managing edit…

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October 26, 2026, 19:03 IST

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