17 दिन की मेहनत और 21 युवाओं का कमाल, थर्माकॉल और टेंट के सामान से तैयार किया गिरनार पर्वत का शानदार मॉडल

पाली. जैन धर्म में सहजानंदी गिरनार भाव नव्वाणु यात्रा का बेहद खास महत्व है. लेकिन गिरनार पर्वत की लगभग 4 हजार सीढ़ियां चढ़ना और 4 हजार सीढ़ियां उतरना हर किसी के बस की बात नहीं होती—खासकर हमारे घर के बुजुर्गों के लिए. बुजुर्गों की इसी तकलीफ और अधूरी रह जाने वाली आस्था को पूरा करने के लिए पाली के 21 युवाओं ने दिन-रात एक करके महज 17 दिनों में ‘मिनी गिरनार’ का एक आकर्षक और जीवंत मॉडल तैयार कर दिया है. 27 अक्टूबर से शुरू हुई यह यात्रा 23 नवंबर तक चलेगी. जहां हर दिन करीब 350 श्रद्धालु पहुँच रहे हैं और सिर्फ 2 घंटे में पूरे भाव और भक्ति के साथ मिनी गिरनार जी की यात्रा का लाभ उठा रहे हैं.
पाली शहर के महावीर नगर स्थित श्री जिन कुशल कांति आराधना भवन में जैन धर्म के प्रमुख तीर्थस्थल ‘गिरनार’ का एक भव्य मिनी मॉडल तैयार किया गया है. कठिन चढ़ाई के कारण मूल यात्रा से वंचित रह जाने वाले उम्रदराज और अशक्त श्रद्धालुओं के लिए यह मॉडल एक वरदान साबित हो रहा है. यहाँ श्रद्धालु अपने सहज और निर्मल भावों से ‘सहजानंदी गिरनार भाव नव्वाणु यात्रा’ का भरपूर लाभ ले रहे हैं.
17 दिनों में बनकर तैयार हुआ भव्य मॉडलयह धार्मिक यात्रा 27 अक्टूबर से शुरू हुई है जो आगामी 23 नवंबर तक चलेगी. इस मिनी मॉडल को तैयार करने के लिए 21 युवाओं की टीम ने लगातार 17 दिन (10 अक्टूबर से 26 अक्टूबर) तक दिन-रात मेहनत की. थर्माकॉल, लकड़ी और टेंट सामग्री का उपयोग कर तैयार किए गए इस मॉडल में गिरनार तीर्थ के मुख्य स्थलों—तलेटी आदेश्वर भगवान, जय तलेटी, दादा गुरुदेव, अम्बिका माता, नेम दरबार, राजूल की गुफा, समवशरण मंदिर, दीक्षा व केवलज्ञान कल्याणक—को हुबहु उकेरा गया है.
मुनि प्रशम सागर जी की प्रेरणा से साकार हुई परिकल्पनामुनि प्रशम सागर जी महाराज ने बताया कि जैन दर्शन में ‘भावों’ (श्रद्धा) का सर्वोपरि महत्व है. मूल गिरनार यात्रा में लगभग 4,000 सीढ़ियां चढ़नी और 4,000 सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं, जिससे बुजुर्गों के लिए पूरी यात्रा करना अत्यंत कठिन हो जाता है. इसी समस्या के समाधान और बुजुर्गों के भावों की पूर्ति के लिए पाली में ‘मिनी गिरनार’ बनाने का विचार आया, जिसे समाज के सहयोग से साकार किया गया.
अधूरी यात्रा पूरी कर खिले बुजुर्गों के चेहरे68 वर्षीय श्रद्धालु जगदीश छाजेड़ ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे गिरनार तीर्थ गए थे, लेकिन शारीरिक कमजोरी के कारण यात्रा अधूरी छोड़नी पड़ी थी. अब पाली के इस मिनी गिरनार मॉडल में आकर वे अपनी अधूरी यात्रा की साधना पूरी कर रहे हैं. गौरतलब है कि जैन मान्यता के अनुसार प्रभु नेमीनाथ जी को गिरनार में मोक्ष प्राप्त हुआ था और चौबीसों तीर्थंकरों का भी यहाँ जुड़ाव रहा है.
रोजाना पहुँच रहे सैकड़ों आराधकप्रतिदिन उपस्थिति: रोजाना करीब 350 श्रद्धालु दर्शन व साधना के लिए पहुँच रहे हैं.समय अवधि: श्रद्धालु लगभग 2 घंटे में मिनी गिरनार की पूरी यात्रा सम्पन्न कर रहे हैं.संकल्प: प्रत्येक आराधक द्वारा 108 यात्राएं पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है.
सहयोग का रहा मुख्य योगदानइस मॉडल के निर्माण और व्यवस्था में रंकित धारिवाल, बंशीधर, बाबूलाल, जगदीशचंद, प्रेम प्रकाश, रतनलाल, सोहनलाल, भूरचंद, पवनकुमार, समस्त ट्रस्ट मंडल, ललित, अक्षय, विनय, अक्षत, प्रथम, राजू, प्रदीप, प्रवीण, आकाश एवं समस्त क्यू.पी. (Kyup) मंडल का विशेष योगदान रहा.



