इतिहास की धरोहर या दबा खजाना! टोंक में डेग मिलने से इलाके में हलचल, पुरातत्व विभाग की जांच से उठेगा राज

टोंक. जिले की निवाई तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत सिंदड़ा के देवरी गांव में उस समय हलचल मच गई जब चरागाह भूमि पर खुदाई के दौरान करीब 10 फीट की गहराई से एक पुरानी मिट्टी की डेग (घड़ा) निकली. ग्रामीणों के बीच यह अफवाह फैल गई कि डेग में कोई प्राचीन खजाना या मूल्यवान वस्तुएं हो सकती हैं, जिससे क्षेत्र में उत्साह और चर्चा का माहौल बन गया. वहीं पुलिस की मौजूदगी में ही ग्रामीणों में लूट की होड़ मच गई. हालांकि, स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए डेग को सील कर ट्रेजरी के स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रखवा दिया है. तहसीलदार नरेश गुजर ने स्पष्ट किया कि यह कोई पुरातात्विक महत्व की वस्तु हो सकती है और पुरातत्व विभाग की टीम जांच के लिए बुलाई गई है.
दरअसल, जब देवरी गांव के कुछ ग्रामीण चरागाह भूमि पर सामान्य खुदाई कर रहे थे. अचानक एक बड़ा मिट्टी का घड़ा दिखाई दिया, जो करीब 10 फीट गहराई में दबा हुआ था. ग्रामीणों ने उसे बाहर निकाला तो आस-पास के लोग इकट्ठा हो गए. कुछ लोगों ने अनुमान लगाया कि यह प्राचीन काल का खजाना हो सकता है, जिसमें सोने-चांदी के सिक्के या अन्य कीमती सामान दबा हो. अन्यों का कहना था कि यह किसी पुराने शव दाह स्थल से संबंधित हो सकता है. देखते ही देखते भीड़ बढ़ गई और सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल होने लगी. ग्रामीणों ने तुरंत सरपंच रामसमय मीणा को सूचना दी, जिन्होंने पुलिस और प्रशासन को अलर्ट किया.
डेग को सील कर ट्रेजरी के स्ट्रांग रूम में रखा गया है
सूचना मिलते ही तहसीलदार नरेश गुजर, थानाधिकारी चंदीराम, भू अभिलेख निरीक्षक और पुलिस टीम मौके पर पहुंची. उन्होंने जेसीबी मशीन की मदद से सावधानीपूर्वक खुदाई करवाई और डेग को बाहर निकाला. डेग सिल्वर कलर का था, लेकिन अंदर क्या है, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी. तहसीलदार गुजर ने बताया कि डेग को सील कर दिया गया है और इसे ट्रेजरी के स्ट्रांग रूम में रखा गया है. पुरातत्व विभाग को सूचित कर दिया गया है. उनके विशेषज्ञ आने के बाद ही डेग खोला जाएगा और सामग्री की जांच होगी. यदि यह खजाना साबित होता है तो कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी.
ग्रामीण इलाकों में डेग बनी चर्चा का विषय
ग्रामीणों में इस घटना को लेकर उत्सुकता चरम पर है. एक स्थानीय निवासी ने कहा कि हमारे गांव में पहले भी ऐसी अफवाहें उड़ी हैं, लेकिन इस बार डेग मिलने से उम्मीद बढ़ गई है. यदि खजाना मिलता है तो गांव के विकास में मदद मिल सकती है. वहीं, कुछ बुजुर्गों का मानना है कि यह क्षेत्र राजपूत और मुगल काल से जुड़ा हुआ है, जहां प्राचीन वस्तुएं दबी हो सकती हैं. राजस्थान में टोंक जिला ऐतिहासिक रूप से समृद्ध है, जहां नवाबी दौर की कई कहानियां जुड़ी हैं. हाल के वर्षों में राज्य के विभिन्न जिलों जैसे जयपुर, अलवर और उदयपुर में भी ऐसी खुदाई में प्राचीन सिक्के और कलाकृतियां मिल चुकी हैं, जो पुरातत्व विभाग के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई है.
पुरातत्व विभाग की टीम का हो रहा है इंतजार
प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि बिना अनुमति कोई खुदाई न करें और यदि कोई संदिग्ध वस्तु मिले तो तुरंत अधिकारियों को सूचित करें. पुलिस ने क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है ताकि अवैध खुदाई या लूटपाट की घटनाएं न हों. पुरातत्व विभाग की टीम जल्द ही मौके का निरीक्षण करेगी और डेग की सामग्री की वैज्ञानिक जांच करेगी. यदि यह वाकई कोई ऐतिहासिक खजाना साबित होता है तो यह टोंक जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी, जो पर्यटन और शोध को बढ़ावा दे सकता है. फिलहाल, गांव में शांति है लेकिन हर कोई पुरातत्व टीम के आने का इंतजार कर रहा है. क्या यह डेग कोई बड़ा राज खोलेगी या सिर्फ एक सामान्य पुरानी वस्तु निकलेगी? इसका फैसला आने वाले दिनों में होगा.



