बिना हीरो-हीरोइन को क्रेडिट दिए बनीं 4 फिल्में, 1 ब्लॉकबस्टर-3 सुपरहिट, मेकर्स हुए मालामाल – Amitabh bachchan Muqaddar Ka Sikandar Laawaris Sharaabi 4 bollywood movies never had actors names credited all turn superhit Prakash mehra amusing story

Last Updated:January 06, 2026, 21:40 IST
Bollywood Superhit Movies without Actors Credit : बॉलीवुड हो या हॉलीवुड, हर फिल्म की शुरुआत या लास्ट में स्क्रीन पर क्रेडिट दिए जाते हैं. हीरो-हीरोइन-विलेन, गीतकार-संगीतकार के नाम दिखाए जाते हैं. ऐसा बहुत ही कम होता है जब फिल्म में क्रेडिट ना दिए जाए. बॉलीवुड में कुछ फिल्में ऐसी भी बनी हैं जिसमें हीरो-हीरोइन-विलेन को कोई क्रेडिट नहीं दिया गया. फिल्म के लास्ट में प्रोड्यूसर का नाम दिखाया गया. 70-80 के दशक में पांच ऐसी फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज हुईं, जिनमें स्टार्स का जिक्र नहीं था. दिलचस्प बात यह है कि इन चार फिल्मों में से एक ब्लॉकबस्टर, तीन सुपरहिट रहीं. सभी फिल्में एक ही डायरेक्टर-प्रोड्यूसर की थीं. ये फिल्में कौन सी थीं और वो डायरेक्टर-प्रोड्यूसर कौन था, आइये जानते हैं……… 
बॉलीवुड के सफल फिल्ममेकर में शुमार रहे प्रकाश मेहरा धुन के पक्के थे. 13 जुलाई 1939 को यूपी के बिजनौर में जन्मे प्रकाश मेहरा की मां बचपन में ही गुजर गई थी. पिता वैरागी हो गए थे. फिल्मों के शौकीन के चलते मुंबई पहुंचे. संघर्ष किया. दो रुपये-तीन रुपये की दिहाड़ी पर काम किया. किस्मत को कुछ और ही मंजूर था तो फिल्म लाइन में आ गए. 1968 में ‘हसीना मान जाएगी’ से अपना फिल्मी करियर शुरू किया. फिर ‘मेला’, समाधि और ‘हाथ की सफाई’ जैसी सफल फिल्में बनाईं. शुरुआती चार फिल्मों की सफलता के बाद उन्होंने अपनी प्रोडक्शन कंपनी खोली. 1973 की जंजीर और 1976 की हेराफेरी फिल्म के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. प्रकाश मेहरा ने अपने नाम को ही ब्रांड बना लिया. जंजीर फिल्म से अमिताभ बच्चन को रातोंरात स्टार बनाया.

हेराफेरी (1976) फिल्म प्रकाश मेहरा की अंतिम फिल्म थी जिसमें हीरो-हीरोइन को क्रेडिट दिया गया. इसके बाद उन्होंने मुकद्दर का सिकंदर (1978), लावारिस (1981), नमक हलाल (1982), शराबी (1984) और जादूगर (1989) जैसी फिल्में बनाईं. इन सभी फिल्मों को उन्होंने अपने नाम से बेचा. फिल्म के लास्ट में सिर्फ इनका नाम स्क्रीन पर नजर आया. अमिताभ बच्चन-विनोद खन्ना का स्टारडम अपनी जगह पर था लेकिन प्रकाश मेहरा अपनी फिल्मों के जरिये यह जताने में जरा भी संकोच नहीं करते थे कि उनका दबदबा इन सितारों से भी ज्यादा है.

सबसे पहले बात करते हैं 27 अक्टूबर 1978 को रिलीज हुई ‘मुकद्दर का सिकंदर’ फिल्म की. फिल्म में अमिताभ बच्चन, रेखा , विनोद खन्ना, राखी, अमजद खान, श्रीराम लागू जैसे सितारे लीड रोल में थे. इस फिल्म की शुरुआत में किसी स्टार को कोई क्रेडिट नहीं दिया गया था. फिल्म की शुरुआत में सिर्फ पीएमपी (प्रकाश मेहरा प्रोडक्शंस) लिखा नजर आता है. फिल्म के लास्ट में क्रेडिट्स देखने को मिलते हैं लेकिन उसमें भी एक्टर-एक्टर्स के नाम नहीं दिखाए जाते. स्क्रीन पर स्टोरी : विजयकांत शर्मा, स्क्रीनप्ले : विजय कौल, डायलॉग : कादर खान नजर आता है. सबसे ऊपर प्रजेंटेंशन में प्रकाश मेहरा का नाम लिखा हुआ नजर आता है. मुकद्दर का सिकंदर फिल्म का म्यूजिक कल्याणजी – आनंद जी ने दिया था. प्रकाश मेहरा की सबसे बेस्ट फिल्म में शुमार इस फिल्म में रेखा ने जोहरा बाई नाम की तवायफ का रोल निभाया था.
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‘मुकद्द का सिकंदर’ फिल्म के गीतकार अनजान-प्रकाश मेहरा थे. प्रकाश मेहरा ने यह फिल्म ‘संगम’ और ‘देवदास’ मूवी से इंस्प्यार्ड होकर बनाई थी. फिल्म के सदाबहार गानों में ‘सलाम-ए-इश्क मेरी जां, जरा कबूल कर लो’ ‘ओ साथी रे…’, ‘रोते हुए आते हैं सब…वो मुकद्दर का सिकंदर, जानेमन कहलाएगा’, और ‘दिल तो दिल है, दिल का ऐतवार क्या कीजे’. फिल्म की कहानी ट्विस्ट से भरपूर थी. फिल्म में अमजद खान रेखा को एकतरफा प्यार करते हैं, वहीं रेखा तन-मन से अमिताभ बच्चन पर फिदा हैं. अमिताभ बचपन की बचपन की फ्रेंड राखी से दिल ही दिल में प्यार करते हैं लेकिन अपने जज्बात बयां नहीं कर पाते हैं, वहीं राखी विनोद खन्ना को दिल दे बैठती हैं. फिल्म दिखाती है कि किसी को भी सच्चा प्यार जिंदगी में नसीब नहीं होता. 1 करोड़ के बजट में बनी इस मूवी ने 8.5 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह मूवी बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी. 1978 का साल अमिताभ बच्चन का था. इसी साल उनकी डॉन फिल्म रिलीज हुई थी जिसके लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था .

प्रकाश मेहरा ने ‘मुकद्दर का सिकंदर’ से जो ट्रेंड शुरू किया, उसे 22 मई 1981 को रिलीज हुई ‘लावारिस’ में जारी रखा. ‘लावारिस’ फिल्म की शुरुआत में भी स्क्रीन पर सिर्फ ‘प्रकाश मेहरा प्रोडक्शंस’ लिखा आता है. इसके अलावा स्क्रीन पर सिनेमेटोग्राफी एन. सत्येन, स्टोरी : दीनदयाल शर्म, स्क्रीनप्ले : प्रकाश मेहरा, दीन दयाल शर्मा, शशि भूषण, डायलॉग : कादर खान, गीतकार : अनजान – प्रकाश मेहरा, म्यूजिक : कल्याण जी – आनंद जी, निर्माता-निर्देशक : प्रकाश मेहरा लिखा नजर आता है. यह ताकत एक फिल्मकार की थी. किसी हीरो-हीरोइन को फिल्म में कोई क्रेडिट नहीं दिया गया. लावारिस फिल्म में अमिताभ बच्चन, जीनत अमान, राखी गुलजार, अमजद खान लीड रोल में नजर आए थे.

‘लावारिस’ फिल्म के दो गाने ‘मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है’ और ‘अपनी जो जैसे-तैसे कट जाएगी, आपका क्या होगा जनाबे अली’ बहुत पॉप्युलर हुआ था. ‘मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है’ यूपी का एक फॉक सॉन्ग है जिसे अमिताभ बच्चन के पिता हरिवंश राय बच्चन ने लिखा था. जया बच्चन इस गाने पर अमिताभ से बहुत नाराज हुई थीं. लावारिस फिल्म ‘मिलने-बिछुड़ने’ के फॉर्मूले पर थी. ऐसी फिल्में मनमोहद देसाई बनाते थे. उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि मेरे फॉर्मूले का प्रकाश मेहरा मजाक उड़ाया करते थे लेकिन अब उन्होंने इसी पर फिल्म बनाई है.

‘मुकद्दर का सिकंदर’ की शूटिंग के दौरान ही प्रकाश मेहरा ने अपनी अगली फिल्म की प्लानिंग शुरू कर दी थी. यह फिल्म थी : नमक हलाल. प्रकाश मेहरा यह फिल्म अमिताभ बच्चन और विनोद खन्ना को लेकर बनाना चाहते थे. विनोद खन्ना ने फिल्म करने से इनकार कर दिया. प्रकाश मेहरा ने उनकी जगह शशि कपूर को साइन कर लिया. यह फिल्म 30 अप्रैल 1982 को रिलीज हुई. इस फिल्म में भी प्रकाश मेहरा ने वही ट्रेंड जारी रखा. फिल्म की शुरुआत में स्क्रीन पर ‘प्रकाश मेहरा फिल्म’ लिखा नजर आता है. इसके बाद म्यूजिक : बप्पी लाहिरी, निर्माता : सत्येंद्र पाल, निर्देशक : प्रकाश मेहरा. नमक हलाल का एक गाना ‘पग घुंघरू बांध मीरा नाची थी..’ के लिए किशोर कुमार बेस्ट प्लेबैक सिंगर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था. बप्पी लहरी की मां ने क्लासिकल अंदाज में इस गाने के मुखड़ा की धुन बनाई थी. मूवी में 37:13 मिनट के कुल 5 गाने थे. हर गाना सुपरहिट था. फिल्म का बजट करीब 2.6 करोड़ का बताया जाता है. मूवी ने करीब 12 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई थी.

नमक हलाल के बाद प्रकाश मेहरा ने अमिताभ बच्चन के साथ एक और फिल्म ‘शराबी’ बनाई थी जो कि 18 मई 1984 में रिलीज हुई थी. फिल्म में अमिताभ बच्चन-जय प्रदा, प्राण-ओम प्रकाश लीड रोल में थे. यह जया प्रदा की अमिताभ बच्चन के साथ पहली मूवी थी. फिल्म का म्यूजिक बप्पी लाहिरी ने दिया था. शराबी फिल्म की स्टोरी-स्क्रीनप्ले कादर खान को सबसे पहले दिया गया था. उन्हें अच्छे से अच्छे डायलॉग लिखने के लिए समय दिया गया था. 1973 में आई जंजीर के बाद यह दूसरा मौका था अमिताभ बच्चन-प्राण एकसाथ प्रकाश मेहरा की फिल्म में थे. फिल्म का एक डायलॉग ‘मूंछे हो तो नत्थूलाल जैसी’ बहुत फेमस हुआ था. फिल्म के दो गाने ‘दे दे प्यार दे’ और ‘मुझे नौ लखा मंगवा दे’ बहुत पॉप्युलर हुए थे. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई थी.
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January 06, 2026, 21:40 IST
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बिना हीरो-हीरोइन को क्रेडिट दिए बनीं 4 फिल्में, 1 ब्लॉकबस्टर-3 सुपरहिट



