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4 भारतीय बल्लेबाज, जिन्होंने एक कैलेंडर ईयर में ठोक दिए सबसे ज्यादा शतक

नई दिल्ली. इंटरनेशनल क्रिकेट के इतिहास में 22 गज की पिच पर बल्लेबाजों के कई यादगार दौर आए, लेकिन किसी एक साल में अपनी फॉर्म के चरम पर रहकर लगातार शतक ठोकना एक अलग ही स्तर की महारत मांगता है. भारतीय क्रिकेट की गाथा ऐसे ही सुनहरे अध्यायों से भरी पड़ी है, जहां दिग्गजों ने पूरे 12 महीने विपक्षी गेंदबाजों पर इस कदर दबदबा बनाया कि साल का अंत होते-होते आंकड़े इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों से दर्ज हो गए.

क्रिकेट के इतिहास में जब भी किसी बल्लेबाज के सबसे विध्वंसक और निरंतर फॉर्म की बात होती है, तो साल 1998 का जिक्र सबसे पहले आता है. यह वह दौर था जब सचिन तेंदुलकर अपने करियर के सबसे जादुई मुकाम पर थे. शारजाह के मैदान पर रेत के तूफान के बीच उठी उनकी पारी हो या दुनिया की सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी लाइन-अप के खिलाफ उनका काउंटर अटैक, 1998 पूरी तरह से सचिन के नाम रहा.

उस साल सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) ने कुल 39 इंटरनेशनल मुकाबलों की 42 पारियों में क्रीज पर कदम रखा और देखते ही देखते 12 शतक ठोक डाले. पूरे साल में उन्होंने 68.67 के जबरदस्त औसत से 2,541 रन बटोरे. विरोधी कप्तान फील्डिंग सजाते रह जाते और सचिन गैप ढूंढकर गेंद को सीमा रेखा के पार पहुंचाते रहते. 1998 में स्थापित हुआ यह कीर्तिमान केवल रनों का अंबार नहीं था, बल्कि भारतीय बल्लेबाजी का वह शिखर था, जिसे छूने के लिए आने वाली पीढ़ियों को अपने खेल को नए स्तर पर ले जाना था.

विराट कोहली का लगातार दो साल चला महा अभियानसचिन के इस अविश्वसनीय रिकॉर्ड के करीब अगर कोई सबसे मजबूती से पहुंचा, तो वह थे विराट कोहली (Virat Kohli) . विराट ने अपनी रन-मशीन वाली छवि को 2017 और 2018 में नए आयाम दिए. इन दो सालों में विराट ने जो किया, वह मॉडर्न क्रिकेट में अनुशासन और निरंतरता की सबसे बड़ी मिसाल बन गया.

साल 2017 में विराट ने 46 मैचों की 47 पारियों में बल्लेबाजी करते हुए 2,735 रन बनाए और 11 बार शतकीय आंकड़े को पार किया. मैदान चाहे भारत का हो या विदेशी धरती का, विराट की रन बनाने की भूख शांत नहीं हुई. अगले ही साल, यानी 2018 में जब चुनौतियां और कठिन थीं, तब भी विराट का बल्ला उसी रवानगी से चला. उन्होंने सिर्फ 37 मुकाबलों की 47 पारियों में फिर से ठीक 2,735 रन जड़ दिए और एक बार फिर 11 शतक अपने नाम किए.

लगातार दो अलग-अलग कैलेंडर वर्षों में 11-11 अंतरराष्ट्रीय शतक जड़ना अपने आप में एक अनोखा कारनामा था. विराट सचिन के 12 शतकों के ऐतिहासिक शिखर से केवल एक कदम की दूरी पर ठिठक गए, लेकिन उन्होंने यह साबित कर दिया कि निरंतरता के मामले में वे आधुनिक युग के सबसे बड़े ध्वजवाहक हैं.

1999 में द्रविड़ की दीवार और क्लासिकल पारियांसचिन के जादुई 1998 के ठीक एक साल बाद भारतीय क्रिकेट को राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) का स्वर्णिम दौर देखने को मिला. साल 1999 द्रविड़ के करियर का ऐसा पड़ाव था जहां तकनीक, धैर्य और रनों की भूख का अद्भुत संगम दिखा. इंग्लैंड में खेले गए विश्व कप से लेकर द्विपक्षीय सीरीज तक, द्रविड़ हर परिस्थिति में टीम का मजबूत सहारा बने.

1999 के पूरे कैलेंडर ईयर में द्रविड़ ने 53 मैचों की 62 पारियों में क्रीज संभाली. इस दौरान उन्होंने तकनीक के दम पर 2,626 रन बनाए, जिसमें 10 लाजवाब शतक शामिल रहे. द्रविड़ ने उस साल यह साबित किया कि बिना किसी आक्रामकता का दिखावा किए भी, क्लासिकल टाइमिंग और ठोस डिफेंस के दम पर दुनिया के किसी भी गेंदबाजी आक्रमण को थकाया जा सकता है.

2019 में ‘हिटमैन’ का नया अवतारइस ऐतिहासिक कड़ी का अगला बड़ा मोड़ साल 2019 में आया, जब रोहित शर्मा (Rohit Sharma) ने सफेद गेंद के खेल में नए प्रतिमान स्थापित किए. 2019 रोहित के करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. इंग्लैंड में हुए वनडे विश्व कप में एक के बाद एक पांच शतक जड़कर उन्होंने दुनिया को हैरान कर दिया, वहीं साल के अंत में टेस्ट क्रिकेट में बतौर ओपनर उतरकर उन्होंने अपनी इस नई भूमिका को भी यादगार बना दिया. रोहित ने 2019 के दौरान कुल 47 मैच खेले और 2,442 रन जुटाए. इस सफर में उनके बल्ले से कुल 10 शतक निकले. रोहित का पुल शॉट, उनका सहज टाइमिंग और बड़े शतकों को दोहरे शतक में बदलने की कला उस साल अपने पूरे शबाब पर थी.

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