राजस्थान में कट गए 41 लाख वोटर? एसआईआर 2026 ने बदला चुनावी गुणा-गणित,अब आगे क्या होगा?

अरबाज अहमद/जयपुर. राजस्थान में विशेष गहन पुनरीक्षण SIR–2026 अब सिर्फ मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे तौर पर सियासी बहस और चुनावी गणित से जुड़ चुका है. आंकड़ों पर नजर डालें तो राज्य में कुल 5.46 करोड़ से अधिक मतदाता पंजीकृत थे, जिनमें से 41.84 लाख नाम विभिन्न कारणों से चिन्हित किए गए हैं. यानी कुल मतदाताओं का करीब 7.66 प्रतिशत हिस्सा या तो सूची से हटाया गया है, या नोटिस और सत्यापन की श्रेणी में रखा गया है. प्रतिशत के लिहाज से देखें तो यह कटौती और संशोधन राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि चुनाव कई बार हजारों नहीं बल्कि सैकड़ों वोटों से तय होते हैं.
पहले की स्थिति देखें तो राजस्थान की मतदाता सूची में करीब 5.46 करोड़ नाम दर्ज थे. SIR–2026 के प्रारूप के बाद करीब 40 से 42 लाख नामों पर सवाल खड़े हुए हैं. संख्या के लिहाज से यह बहुत बड़ा आंकड़ा है, क्योंकि यह कई विधानसभा क्षेत्रों की कुल मतदाता संख्या के बराबर या उससे भी अधिक है. निर्वाचन विभाग इसे सूची की शुद्धता का जरूरी कदम बता रहा है, लेकिन राजनीतिक दल इसे संभावित वोट बैंक में बदलाव के रूप में देख रहे हैं.
स्थायी स्थानांतरण और मृत मतदाता, सबसे बड़ा हिस्साकटौती के पीछे सबसे बड़ा कारण स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाता हैं. करीब 24.80 लाख नाम इस श्रेणी में आए हैं, जो कुल चिन्हित मामलों का लगभग 59 प्रतिशत है. इसके बाद 8.75 लाख मृत मतदाताओं के नाम सामने आए हैं. लंबे समय से अपडेट न होने के कारण ये नाम सूची में बने हुए थे. इसके अलावा 4.57 लाख मतदाता अनुपस्थित या अप्राप्य पाए गए, जबकि 3.44 लाख मामलों में एक से अधिक स्थानों पर नाम दर्ज होने की स्थिति सामने आई. 2002 से पहले के दस्तावेज नहीं दे पाने वाले मतदाता भी बड़ी संख्या में नोटिस की श्रेणी में हैं.
जयपुर और शहरी सीटें सबसे ज्यादा प्रभावित
विधानसभा–वार तस्वीर देखें तो सबसे ज्यादा असर जयपुर जिले में दिख रहा है. यहां करीब 7 लाख नाम प्रारूप सूची में घटे या जांच के दायरे में आए हैं. झोटवाड़ा में लगभग 68,994, सांगानेर में करीब 63,000 और विद्याधर नगर में लगभग 57,000 वोटों पर असर पड़ा है. सिविल लाइंस, बगरू, आदर्श नगर और हवा महल जैसी सीटों में भी हजारों नाम घटे हैं. ये वही क्षेत्र हैं जहां शहरी पलायन, किरायेदार आबादी और रोजगार के कारण मतदाता सूची सबसे ज्यादा अस्थिर रहती है.
प्रमुख नेताओं की सीटों पर भी असर
SIR–2026 के आंकड़े बताते हैं कि कटौती ने बड़े नेताओं के क्षेत्रों को भी नहीं छोड़ा. झोटवाड़ा, सांगानेर, सरदारपुरा, झालरापाटन और दूदू जैसी सीटों में हजारों नाम चिन्हित हुए हैं. इससे साफ है कि यह प्रक्रिया किसी एक दल या क्षेत्र तक सीमित नहीं है. जहां शहरी और हॉट सीटों पर भारी असर दिखा है, वहीं सबसे कम कटौती बाड़मेर जिले की गुड़ामालानी विधानसभा में दर्ज की गई है, जहां करीब 8,018 नाम ही कटौती या नोटिस की श्रेणी में आए हैं. यह ग्रामीण क्षेत्रों में कम पलायन और स्थिर आबादी की ओर इशारा करता है.
अभी अंतिम नहीं हैं ये आंकड़ेनिर्वाचन आयोग स्पष्ट कर चुका है कि यह केवल प्रारूप सूची है. 15 जनवरी 2026 तक दावे और आपत्तियां ली जाएंगी और 14 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची जारी होगी. बावजूद इसके, प्रतिशत और संख्या दोनों के लिहाज से सामने आए ये आंकड़े यह साफ कर रहे हैं कि SIR–2026 राजस्थान की सियासत में आने वाले महीनों तक चर्चा और रणनीति का बड़ा आधार बनेगा.



