700 Year old Hidden city found: Underground City| 700 साल से पाताल में छिपी दूसरी दुनिया, नमक से बना शहर, इमारतें-झील-चर्च देख वैज्ञानिक दंग

Last Updated:November 03, 2026, 06:16 IST
Underground Mysterious Salt Mine: कल्पना कीजिए कि आप जमीन के नीचे उतरें और वहां आपको एक खूबसूरत चर्च, चमचमाती झील, शानदार मूर्तियां और रोशनी से जगमगाते बड़े-बड़े हॉल दिखाई दें. वैसे सिर्फ जादुई दुनिया नहीं है बल्कि पोलैंड में ये सब हकीकत में है. यहां की विएलिज्का नमक खदान में सदियों की मेहनत ने जमीन के नीचे एक ऐसी दुनिया तैयार कर दी है, जिसे देखने के लिए दुनियाभर से पर्यटक पहुंचते हैं. दिलचस्प बात यह है कि यहां की दीवारों से लेकर कलाकृतियों तक में नमक का इस्तेमाल हुआ है.
पोलैंड के दक्षिणी हिस्से में क्राको शहर के पास स्थित विएलिज्का नाम की खदान किसी रहस्यमयी दुनिया से कम नहीं है. बाहर से देखने पर यह एक सामान्य ऐतिहासिक खदान लगती है लेकिन जमीन के नीचे उतरते ही नजारा पूरी तरह बदल जाता है. यहां लंबे गलियारे, विशाल कमरे, मूर्तियां और धार्मिक स्थल मौजूद हैं. सदियों तक यहां नमक निकाला जाता रहा और इसी काम ने धीरे-धीरे एक अद्भुत भूमिगत दुनिया का निर्माण कर दिया.
एक वक्त में इस खदान में मजदूर दिन-रात नमक निकालने का काम करते थे. अंधेरे में भारी औजारों के साथ काम करना आसान नहीं था. खदान के कई हिस्सों में पुराने उपकरण और मशीनें आज भी सुरक्षित रखी गई हैं. ये चीजें बताती हैं कि पुराने समय में नमक निकालने का काम कितना कठिन होता था. फिलहाल ये जगह पर्यटन और ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए जानी जाती है. यहां म्यूजियम और अंडरग्राउंड रास्ते भी बनाए गए हैं.
विएलिज्का में नमक निकालने का काम 13वीं शताब्दी में शुरू हुआ था. उस दौर में नमक केवल खाने का स्वाद बढ़ाने की चीज नहीं था, बल्कि भोजन को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए इसका इस्तेमाल होता था. इसी वजह से नमक की इस खदान का पोलैंड की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान रहा. यहां पीढ़ियों तक मजदूरों ने मेहनत की और जमीन के अंदर सैकड़ों साल पुरानी विरासत छोड़ गए. साल 1978 में इस जगह को यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल किया गया.
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इस खदान की सबसे बड़ी खासियत सेंट किंगा चैपल है. जमीन से करीब 101 मीटर नीचे मौजूद यह विशाल धार्मिक स्थल देखने वालों को हैरान कर देता है. इसकी दीवारें, फर्श और सारी सजावट नमक से तैयार की गई हैं. यहां तक कि इसके खूबसूरत झूमर भी नमक से बने हुए हैं. यहां बने चैपल को बनाने में खदान में काम करने वाले खनिकों ने ही अपनी कला और हुनर का इस्तेमाल किया था. आज भी यहां धार्मिक कार्यक्रम और संगीत समारोह आयोजित किए जाते हैं.
आमतौर पर नमक का इस्तेमाल खाने में किया जाता है, लेकिन यहां के खनिकों ने इसे अपनी कला का माध्यम बना दिया. खदान की दीवारों पर धार्मिक कहानियों, ऐतिहासिक घटनाओं और अलग-अलग आकृतियों की नक्काशी की गई है. कई जगह नमक को तराशकर मूर्तियां भी बनाई गई हैं. इन कलाकृतियों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि खनिकों के लिए यह जगह सिर्फ काम करने का स्थान नहीं, बल्कि कला को दिखाने का भी जरिया था.
इस खदान में केवल अंधेरे गलियारे और पत्थर की दीवारें ही नहीं हैं. पाताल के अंदर नमकीन पानी से बनी झीलें दिखाई देती हैं. रोशनी पड़ने पर इनका पानी बेहद खूबसूरत नजर आता है और आसपास की चट्टानों और दीवारों की परछाई इसमें दिखती है. प्रकृति और इंसानी मेहनत का यह मेल इस जगह को और खास बना देता है.
विएलिज्का खदान का आकार जानकर कोई भी हैरान हो सकता है. इसके अंडरग्राउंड गलियारों की कुल लंबाई करीब 300 किलोमीटर बताई जाती है. यहां लगभग 3000 अंडरग्राउंड कमरे और कई मंजिलें बनी हुई हैं. खदान की सबसे गहरी जगह करीब 327 मीटर तक जाती है. हालांकि पर्यटकों को इसका पूरा हिस्सा नहीं दिखाया जाता. उनके लिए करीब 3.5 किलोमीटरका रास्ता बनाया गया है, जो जमीन से 64 से 135 मीटर नीचे तक ले जाता है.
आपको जानकर हैरानी होगी कि विएलिज्का की पाताल वाली दुनिया सिर्फ केवल घूमने-फिरने तक सीमित नहीं है. यहां के विशाल कमरों में संगीत कार्यक्रम, सांस्कृतिक आयोजन, प्रदर्शनियां और खास समारोह भी आयोजित किए जाते हैं. सेंट किंगा चैपल की शानदार बनावट और बेहतरीन ध्वनि व्यवस्था इसे संगीत कार्यक्रमों के लिए खास बनाती है. कुछ भूमिगत कक्षों में खास आयोजन और उत्सव भी होते हैं यानी जिस जगह कभी मजदूर नमक निकालने में पसीना बहाते थे, आज वही जगह दुनिया भर के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुकी है. (सभी फोटो क्रेडिट- रॉयटर्स)
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November 03, 2026, 06:16 IST



