हाईकोर्ट की सख्ती के बावजूद न्यायिक कर्मचारियों की हड़ताल जारी, नहीं पहुंचे काम पर, अब होगी सख्त कार्यवाई

Last Updated:July 25, 2025, 11:23 IST
जयपुर में न्यायिक कर्मचारियों की हड़ताल सातवें दिन भी जारी है. हाईकोर्ट ने हड़ताल को ‘घोर अनुशासनहीनता’ बताते हुए कर्मचारियों को सुबह 10 बजे तक काम पर लौटने का आदेश दिया था, लेकिन कर्मचारी संघ ने संघर्ष जारी रख…और पढ़ें
सुबह 11 बजे तक भी कोई नहीं पहुंचा कार्यालय (इमेज- फाइल फोटो) राजस्थान में न्यायिक कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल और भूख हड़ताल सातवें दिन भी जारी है, जिसके चलते प्रदेश की करीब 1600 अधीनस्थ अदालतों में न्यायिक कार्य पूरी तरह ठप हो गया है. यह आंदोलन कैडर पुनर्गठन की मांग को लेकर शुरू हुआ था, जो मई 2023 से लंबित है. राजस्थान हाईकोर्ट ने गुरुवार को इस हड़ताल को ‘घोर अनुशासनहीनता’ करार देते हुए सभी कर्मचारियों को शुक्रवार सुबह 10 बजे तक काम पर लौटने का सख्त निर्देश दिया था. इसके बावजूद, कर्मचारियों ने हड़ताल वापस लेने से इनकार कर दिया है और संघर्ष को और तेज करने का ऐलान किया है.
राजस्थान न्यायिक कर्मचारी संघ के प्रवक्ता योगेश महर्षि ने बताया कि हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ ने दो साल पहले कैडर पुनर्गठन का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा था, लेकिन कार्मिक विभाग, न्याय विभाग और वित्त विभाग के बीच समन्वय की कमी के कारण यह मामला अटका हुआ है. कर्मचारियों का कहना है कि सरकार ने बार-बार आश्वासन दिए, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं की गई. इस कारण प्रदेशभर के करीब 21,000 न्यायिक कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर हैं, जिससे जमानत, दस्तावेज सत्यापन और अन्य न्यायिक प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही है.
नहीं वापस लेंगे हड़ताल
जयपुर जिला न्यायालय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष नरेंद्र यादव ने गुरुवार को आपात बैठक में सभी जिला अध्यक्षों के साथ विचार-विमर्श किया. देर रात तक चले इस संवाद में सभी जिलों के कर्मचारी संगठनों ने एकजुट होकर हड़ताल जारी रखने का फैसला लिया. उन्होंने कहा कि जब तक कैडर पुनर्गठन का ठोस आदेश जारी नहीं होता, तब तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा. कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर रही है, जिससे उनकी मांगों को अनसुना किया जा रहा है.
कोर्ट ने दिया था अल्टीमेटमहाईकोर्ट ने हड़ताल को अवैध घोषित करते हुए रजिस्ट्रार जनरल को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रेस्मा) के तहत कार्रवाई करने की चेतावनी दी है. कोर्ट ने कहा कि यह हड़ताल ना केवल अनुशासनहीनता है, बल्कि आम जनता और वादकारियों को न्याय प्राप्त करने में बाधा उत्पन्न कर रही है. इसके बावजूद, कर्मचारी संघ ने स्पष्ट किया कि वे रेस्मा की धमकी से डरने वाले नहीं हैं और अपनी जायज मांगों के लिए लड़ाई जारी रखेंगे. जोधपुर में राजस्थान न्यायिक कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष अनिल जोशी ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार की हठधर्मिता के कारण ही यह स्थिति उत्पन्न हुई है. उन्होंने बताया कि हड़ताल के कारण अदालतों में सुनवाई टल रही है, जिससे वकीलों और वादकारियों को परेशानी हो रही है. हालांकि, कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगें पूरी होने तक वे पीछे नहीं हटेंगे. जोशी ने यह भी कहा कि यदि अनशनरत कर्मचारियों की तबीयत बिगड़ती है या कोई अनहोनी होती है, तो इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार और न्याय प्रशासन की होगी.
Sandhya Kumari
न्यूज 18 में बतौर सीनियर सब एडिटर काम कर रही हूं. रीजनल सेक्शन के तहत राज्यों में हो रही उन घटनाओं से आपको रूबरू करवाना मकसद है, जिसे सोशल मीडिया पर पसंद किया जा रहा है. ताकि कोई वायरल कंटेंट आपसे छूट ना जाए.
न्यूज 18 में बतौर सीनियर सब एडिटर काम कर रही हूं. रीजनल सेक्शन के तहत राज्यों में हो रही उन घटनाओं से आपको रूबरू करवाना मकसद है, जिसे सोशल मीडिया पर पसंद किया जा रहा है. ताकि कोई वायरल कंटेंट आपसे छूट ना जाए.
Location :
Jaipur,Rajasthan
homerajasthan
सख्ती के बावजूद न्यायिक कर्मचारियों की हड़ताल जारी, नहीं पहुंचे काम पर



