नागौर में किसान लिखमाराम की ताइवान पिंक अमरुद की सफल जैविक खेती.

Last Updated:October 29, 2025, 18:37 IST
राजस्थान के मध्यवर्ती जिले नागौर में विभिन्न प्रकार की मिट्टी मिलने के कारण हर तरह की खेती संभव है. खींवसर क्षेत्र, जो रेतीली जमीन के लिए जाना जाता है, वहां किसान लिखमाराम ने ताइवान पिंक अमरुद की खेती शुरू की, जो पूरी तरह सफल रही. लॉकडाउन के दौरान किसान ने यूट्यूब और कृषि विशेषज्ञों की मदद से जैविक खेती अपनाई. पानी की सुविधा के लिए फार्मपॉन्ड बनाया और बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति का उपयोग किया.
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नागौर. राजस्थान का मध्यवर्ती जिला नागौर, जो रेगिस्तान के नजदीकी क्षेत्र में आता है, यहां पर हर प्रकार की भौगोलिक परिस्थितियां बनी हुई हैं. यहां पर तरह-तरह की खेती की जाती है. नागौर की खास बात यह है कि नागौर में देश में विभिन्न प्रकार की पाई जाने वाली मिट्टी यहां एक ही जगह पाई जाती है. कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि यहां पर हर प्रकार की मिट्टी उपलब्ध है. इस कारण से यहां पर हर प्रकार की खेती सफल होने लगी है. वैसे ही खींवसर क्षेत्र, जो रेतीली जमीन के लिए जाना जाता है, वहां पर किसान लिखमाराम ने ताइवान पिंक अमरुद की खेती की है, जो पूर्ण रूप से सफल हुई है और आज क्षेत्र में मिसाल कायम की है.
आज से लगभग 5 साल पहले कोरोना महामारी आई और उसके दौरान लॉकडाउन लगा, जो कि किसी के लिए मुसीबत बन तो किसी के लिए कुछ करने का अवसर मिला. इसी दौरान किसान लिखमाराम ने यह काम लॉकडाउन के दौरान शुरू किया. यूट्यूब के माध्यम से किसान ने ताइवान पिंक अमरुद की खेती के बारे में जानकारी प्राप्त की और यहां पर पौधों को सफल करने के लिए जैविक खेती का सहारा लिया. किसान लिखमाराम बताते हैं कि “मैंने पानी के लिए खेत में फार्मपॉन्ड बनाया, वहीं बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति से पानी दिया गया.”
लिखमाराम बताते हैं कि ताइवान पिंक अमरूद के पौधे लखनऊ से खरीदे गए। प्रति पौधा कीमत 140 रुपये पड़ी, जिसमें लगाने और लाने का खर्च शामिल था. वहीं 2020 में इनका यहाँ प्रत्यारोपण किया गया. इसके बाद इन्हें सफल करने के लिए जैविक खाद का उपयोग किया गया. इसमें पौधों में केचुआ से निर्मित खाद और वर्मी कम्पोस्ट दिया गया. इसके बाद समय-समय पर कृषि विशेषज्ञों से सलाह ली गई.
किसान ने बताया कि पौधे से पौधे की दूरी 5 से 6 फीट रखी गई, ताकि जब पौधा बड़ा हो तो आपस में एक दूसरे के अंदर न पसरे. खेत में कुल 150 पौधे लगाए गए हैं. किसान ने बताया कि पहली फसल हमेशा कम लेनी चाहिए, वहीं पौधे की सही वृद्धि के लिए समय-समय पर टहनियों को काटना चाहिए. किसान ने बताया कि जैसे-जैसे पौधों की वृद्धि होती है, वैसे ही फल अधिक मात्रा में प्राप्त होने लगते हैं और यह उत्पादन हर साल बढ़ता रहता है.
Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें
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Location :
Nagaur,Rajasthan
First Published :
October 29, 2025, 18:37 IST
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नागौर में किसान ने की ताइवान पिंक अमरुद की सफल जैविक खेती, जानिए कैसे



