Dholpur Rani Guru Temple History & Architecture

Last Updated:November 17, 2025, 08:22 IST
Dholpur Rani Guru Temple History: रानी विदोखरनी द्वारा 1899 में निर्मित धौलपुर का रानी गुरु मंदिर स्थापत्य कला और धार्मिक आस्था का अनोखा संगम है. मचकुंड धाम के 108 मंदिरों में विशेष स्थान रखने वाला यह स्थल लाल बलुआ पत्थर से बना है. रानी ने अपने गुरु को यहाँ पुजारी बनाया था, इसलिए इसे रानी गुरु मंदिर कहा जाता है.
धौलपुर. धौलपुर रियासत के महाराजा भगवंत सिंह की रानी विदोखरनी द्वारा निर्मित यह प्राचीन ऐतिहासिक मंदिर आज भी जिले की संस्कृति और वास्तुकला का जीवंत प्रतीक है. मदन मोहन जी (रानी गुरु मंदिर) अपनी अनोखी स्थापत्य कला और धार्मिक महत्व के कारण धौलपुरवासियों के लिए विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है. प्रतिदिन यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचते हैं. यह मंदिर धौलपुर के गौरवशाली इतिहास को दर्शाता है.
मचकुंड धाम 108 प्राचीन मंदिरों वाला तीर्थ स्थलराजस्थान के धौलपुर जिले में स्थित मचकुंड धाम को “तीर्थों का भांजा” कहा जाता है. इस पवित्र तीर्थ स्थल पर कुल 108 प्राचीन मंदिर बने हुए हैं, जिनमें से प्रमुख हैं:
जगन्नाथ जी मंदिर
लाडली जगमोहन जी मंदिर
मदन मोहन जी (रानी गुरु मंदिर)
मचकुंड सरोवर का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की अनेक लीलाओं से माना जाता है, और मथुरा के समीप होने के कारण इसकी धार्मिक महत्ता और अधिक बढ़ जाती है.
1899 में रानी विदोखरनी ने करवाया था निर्माणमदन मोहन जी (रानी गुरु) मंदिर का निर्माण 1899 ई. में महारानी विदोखरनी द्वारा करवाया गया था. यह मंदिर मचकुंड सरोवर के अग्नि कोण (दक्षिण–पूर्व) दिशा में स्थित है. मंदिर निर्माण में धौलपुर के प्रसिद्ध लाल बलुआ पत्थर का उपयोग किया गया है, जो इसे एक विशिष्ट स्थापत्य पहचान देता है.
मंदिर की दीवारें, स्तंभ और मेहराबें राजस्थानी शिल्पकला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जिन्हें देखने भर से मन मंत्रमुग्ध हो जाता है.
रानी विदोखरनी भगवान श्रीकृष्ण की महान भक्त थीं. उन्होंने अपने गुरु को इस मंदिर में पुजारी के रूप में नियुक्त किया था, इसी वजह से मंदिर को “रानी गुरु मंदिर” कहा जाने लगा.
भगवान श्रीकृष्ण–राधा की दिव्य मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठामंदिर के गर्भगृह में भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की सुंदर प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा रियासत काल में संपन्न हुई थी.
मंदिर के महंत बताते हैं—
प्रतिदिन भगवान को पंचामृत स्नान कराया जाता है.
इसके बाद मधुवनी वस्त्रों से उनका श्रृंगार किया जाता है.
फिर भव्य आरती का आयोजन होता है.
यह परंपरा वर्षों से अविच्छिन्न रूप से चली आ रही है और मंदिर की जीवंत संस्कृति को दर्शाती है.
रियासतकाल की जागीरें और 1954 की सरकारी जब्तीमहंत बताते हैं कि रियासत काल में मंदिरों के महंतों और पुजारियों को मंदिर की व्यवस्था चलाने के लिए जागीरें प्रदान की जाती थीं. लेकिन 1954 में राजस्थान सरकार ने इन जागीरों को जप्त कर लिया और उनकी जगह एन्यूटी राशि देने की घोषणा की थी.
Location :
Dhaulpur,Dhaulpur,Rajasthan
First Published :
November 17, 2025, 08:22 IST
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महारानी विदोखरनी ने करवाया था रानी गुरु मंदिर का निर्माण, क्यों है इतना खास?



