Rajasthan

सिकंदरा अस्पताल की असलियत चौंकाने वाली! दरारें, झुकी छतें और गिरता प्लास्टर, मरीजों की जिंदगी दांव पर

Last Updated:November 28, 2025, 21:22 IST

Dausa News : सिकंदरा स्थित राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की जर्जर हालत से मरीज और स्टाफ खतरे में हैं, डॉ. जगराम मीणा ने कई बार शिकायत की लेकिन मरम्मत या पुनर्निर्माण नहीं हुआ है.

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दौसा. जिले में सरकारी भवनों की जर्जर होती स्थिति लगातार चिंता बढ़ा रही है, लेकिन सिकंदरा स्थित राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इस समय सबसे खतरनाक हाल में पहुंच चुका है. करीब 50 वर्ष पुराना यह अस्पताल भवन अब इतना खराब हो चुका है कि उपचार कराने पहुंचे मरीजों पर हर पल हादसे का खतरा मंडरा रहा है. छत का प्लास्टर लगातार झड़ रहा है, दीवारों में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं और बरसात के दिनों में हालात और भी भयावह हो जाते हैं. इसके बावजूद मरीजों को इसी जर्जर भवन के नीचे बेड पर लिटाकर इलाज दिया जा रहा है.

अस्पताल में स्थिति कितनी खतरनाक है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई बार भीतर बड़े हिस्सों में प्लास्टर गिर जाता है. अस्पताल प्रभारी डॉ. जगराम मीणा बताते हैं कि वरिष्ठ अधिकारियों को कई बार लिखित में स्थिति से अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक न मरम्मत हुई है न पुनर्निर्माण की कोई ठोस कार्यवाही हुई है. उन्होंने बताया कि महत्वपूर्ण कक्षों में भी प्लास्टर गिरने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और बरसात में छत से पानी टपकता रहता है जिससे मरीज और स्टाफ हमेशा जोखिम में रहते हैं.

अस्पताल परिसर के आवासीय क्वार्टर भी जर्जरहमारे संवाददाता पुष्पेंद्र मीना से बातचीत में अस्पताल प्रभारी ने बताया कि अस्पताल के पास बने आवासीय क्वार्टर भी अब रहने योग्य नहीं बचे हैं. दीवारें टूट रही हैं, सीलन भर चुकी है और छत से बड़े हिस्सों में प्लास्टर गिर रहा है. डॉक्टरों और कर्मचारियों के ठहरने के लिए बनाए गए ये क्वार्टर अब गंभीर खतरे की स्थिति में पहुंच चुके हैं. पीडब्ल्यूडी विभाग को कई बार पत्र लिखे जाने और निरीक्षण होने के बाद भी बजट का हवाला देकर भवन निर्माण को टाल दिया गया है.

खतरे के बीच चलते वार्ड और इलाजअस्पताल के कई वार्ड और कमरे ऐसे हैं जहां मरीज भर्ती किए जाते हैं, लेकिन इन कमरों की छत भी हर समय गिरने के खतरे में रहती है. कई जगहों पर छत से खुले लोहे तक दिखाई देने लगे हैं. प्लास्टर गिरने के डर से कई बार स्टाफ को बेड इधर-उधर खिसकाने पड़ते हैं, लेकिन सीमित जगह के कारण हमेशा ऐसा संभव नहीं हो पाता.

दवाइयों से भरा भंडार कक्ष भी खस्ताहालएंबुलेंस चालक हरदयाल बताते हैं कि एंबुलेंस चालकों के रहने वाले कमरे भी अब पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं. उन्होंने एक हादसे का ज़िक्र करते हुए बताया कि एक बार उनका साथी कमरे में सो रहा था तभी अचानक छत का बड़ा प्लास्टर गिरा. सौभाग्य से गंभीर घायल नहीं हुआ, लेकिन जान जाने का खतरा था. अस्पताल का भंडार कक्ष जहां दवाइयां और जरूरी सामान रखा जाता है वह भी खतरनाक स्थिति में है. छत से लगातार प्लास्टर झड़ने की वजह से कर्मचारियों को अपनी सुरक्षा की चिंता बनी रहती है. स्टाफ दिनभर इसी कक्ष में आता-जाता है जिससे उनके लिए काम करना और भी जोखिम भरा है.

मरीजों में बढ़ रही दहशतअस्पताल भवन के अंदर प्रवेश करते ही डर महसूस होता है. बड़ी-बड़ी दरारें, गिरी दीवारें, सीलन और झुकी छतें साफ संकेत देती हैं कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. मरीजों और परिजनों का कहना है कि इलाज कराना मजबूरी है लेकिन भवन की हालत जान जोखिम में डाल रही है. कई लोग कहते दिखे कि जहां राहत मिलनी चाहिए वहां अब डर पैदा हो रहा है.

मरम्मत या नए भवन की मांग तेजसिकंदरा का यह स्वास्थ्य केंद्र पूरे क्षेत्र का मुख्य चिकित्सा केंद्र है. क्षेत्रवासियों और अस्पताल प्रशासन की यही मांग है कि या तो पुराने भवन को तुरंत बदलकर नया भवन बनाया जाए या उसकी मजबूती की मरम्मत की जाए. यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो किसी बड़े हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता. स्वास्थ्य विभाग और पीडब्ल्यूडी को तत्काल संज्ञान लेकर पुनर्निर्माण की दिशा में कार्यवाही करनी चाहिए.

About the AuthorAnand Pandey

नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें

Location :

Dausa,Rajasthan

First Published :

November 28, 2025, 21:22 IST

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दरारें, झुकी छतें और गिरता प्लास्टर; सिकंदरा अस्पताल की असलियत चौंकाने वाली!

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