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बिहार विधानसभा का अध्यक्ष कौन? पेपरलेस असेंबली और डिजिटल एमएलए, शीतकालीन सत्र का पांच दिन का एजेंडा जानिए

पटना. 18वीं बिहार विधानसभा का पहला सत्र सोमवार 1 दिसंबर से शुरू हो रहा है. इस शीतकालीन सत्र से बिहार विधानसभा में एक नया युग शुरू होने जा रहा है और इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि पहली बार पूरी कार्यवाही डिजिटल माध्यम में संचालित होगी. सरकार ने सभी विधायकों को टैबलेट उपलब्ध कराए हैं, जिनका उपयोग सवाल पूछने, कार्यसूची देखने और नोटिंग के लिए किया जाएगा. यह कदम विधानसभा को पेपरलेस बनाने और प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और परफेक्ट बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है. सत्र के पहले दिन यानी 1 दिसंबर को नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाई जाएगी. इसके बाद 2 दिसंबर को विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव होगा, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की नजरें इस प्रक्रिया पर होंगी. माना जा रहा है कि यह चुनाव भविष्य की राजनीतिक गतिविधियों की दिशा तय करेगा.

बता दें कि बिहार चुनाव परिणामों के अनुसार, एनडीए ने 202 सीटें हासिल कर तीन-चौथाई बहुमत प्राप्त किया है, जिसमें भाजपा को 89 और जदयू को 85 सीटें मिलीं. वहीं, महागठबंधन को महज 35 सीटों पर ही जीत मिल पाई. अब सभी 243 सदस्यों के शपथ ग्रहण के साथ ही विधानसभा का सत्र शुरू हो जाएगा. उम्मीद की जा रही है कि यह सत्र नितीश कुमार सरकार की ‘सुशासन’ एजेंडे को मजबूत करने का अवसर साबित होगा और डिजिटल पहल और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था इसे और खास बनाएगी.सत्र की शुरुआत में प्रोटेम स्पीकर नरेंद्र नारायण यादव नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाएंगे. बता दें यादव आठ बार विधायक रह चुके हैं और वह इस समारोह की अगुवाई करेंगे.

राज्यपाल का अभिभाषण और सरकार की प्राथमिकताएं

शपथ ग्रहण के बाद 2 दिसंबर को विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव होगा सूत्रों के अनुसार, भाजपा के वरिष्ठ विधायक प्रेम कुमार इस पद के मजबूत दावेदार हैं जो गठबंधन की आपसी सहमति के आधार पर चुने जाएंगे. 3 दिसंबर को दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राज्यपाल अभिभाषण देंगे. इसमें सरकार अगले पांच वर्षों की विकास प्राथमिकताओं, बजट अनुमान, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक सुधारों का खाका पेश करेगी. खास तौर पर डिजिटल विधानसभा को लेकर उठाए गए कदमों और आगामी योजनाओं का उल्लेख होने की संभावना है. 4 दिसंबर को राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होगी. इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहसबाजी और गर्मागर्मी की उम्मीद है. चर्चाओं के बाद सरकार सदन के सवालों के जवाब देगी.

विधानसभा सत्र का मुख्य एजेंडा

इस सत्र में सरकार द्वारा द्वितीय अनुपूरक बजट (Second Supplementary Budget) पेश किए जाने की योजना है.
4 दिसंबर को राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होगी और सरकार जवाब देगी.
5 दिसंबर को सत्र के आखिरी दिन अनुपूरक व्यय विवरणी पर बहस होगी, जिसके बाद विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) पेश किया जाएगा.

अनुपूरक बजट और विनियोग विधेयक पर गहमागहमी की उम्मीद

5 दिसंबर को सत्र के आखिरी दिन द्वितीय अनुपूरक व्यय विवरणी पर बहस होगी और इसके बाद संबंधित विनियोग विधेयक पेश किया जाएगा. माना जा रहा है कि वित्तीय प्रावधानों पर चर्चा के दौरान विपक्ष सरकार को बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर कटघरे में खड़ा करने की कोशिश करेगा.

महागठबंधन की तैयारी, विपक्ष दिखा सकता है तेवर

जहां सरकार डिजिटल और विधायी एजेंडा के साथ तैयार दिख रही है, वहीं महागठबंधन ने भी अपनी रणनीति बनाने में देर नहीं की है. राजद ने 25 नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक बुलाई, जिसके बाद कांग्रेस और वामपंथी दलों के विधायकों की संयुक्त बैठक तेजस्वी यादव को नेता प्रतिपक्ष चुना गया. माना जा रहा है कि विपक्ष इस सत्र को सरकार के खिलाफ राजनीतिक मोर्चा खोलने के पहले मंच के रूप में देख रहा है.

बिहार विधानसभा सत्र में क्या है खास?

यह पहला मौका है जब 18वीं विधानसभा डिजिटल-पेपरलेस मोड में चलेगी. टैबलेट बेस्ड सिस्टम, इंटरनेट-डिस्प्ले स्क्रीन-ऐसी आधुनिक व्यवस्थाएं पारदर्शिता के साथ परफेक्शन और बिहार के लिए यह एक अहम परिवर्तन है.
धारा 163 जैसे कड़े प्रतिबंध-प्रदर्शन, धरना, लोकतांत्रिक गतिविधियों और विरोध-प्रदर्शन की आजादी पर सवाल खड़े कर सकता है. विशेष रूप से विपक्ष या नागरिक समाज के लिए ये नियम चुनौती बन सकते हैं.
नीतीश कुमार की अगुवाई वाली सरकार यानी एनडीए के पास असाधारण बहुमत (202/243) है. इस स्थिति में सरकार को विधायी मंजूरी पाने में कोई मुश्किल नहीं होगी.
विपक्ष के लिए सीमित सीटों (35) पर रणनीति तय करना और महागठबंधन को संगठित रखना भी बड़ी चुनौती है जो सत्र को सुचारू या विवाद-मुक्त बनाए रखने के लिए महत्त्वपूर्ण है.

विधानसभा परिसर सुरक्षा के घेरे में

इस बार का विधानसभा सत्र सुरक्षा के मायने में भी खास है क्योंकि सत्र के दौरान विधानसभा परिसर और आसपास के इलाकों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए BNSS की धारा 163 लागू कर दी गई है. इसके तहत प्रदर्शन, जुलूस और पांच या उससे अधिक लोगों के एक साथ जमा होने पर रोक रहेगी. इसे सरकार की एहतियाती नीति माना जा रहा है, जबकि विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति पर रोक का कदम बता सकता है.

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