भरतपुर: बांस-पॉलिथीन तकनीक से सर्दियों में सब्जी की पौध सुरक्षित

Last Updated:December 07, 2025, 17:05 IST
भरतपुर के किसान सर्दियों में टमाटर, बैंगन, मूली और पालक जैसी सब्जियों की पौधों को ओस और ठंड से बचाने के लिए बांस-पॉलिथीन कवर तकनीक का इस्तेमाल करते हैं. यह देसी तरीका पौधों को सुरक्षित रखता है, उनकी बढ़वार को तेज करता है और रोपाई के लिए समय पर तैयार करता है. सस्ता, असरदार और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल यह तरीका दशकों से भरतपुर के किसानों की पहली पसंद बना हुआ है.
भरतपुर. सर्दियों का मौसम जैसे-जैसे गहराता है, रात और सुबह के समय गिरने वाली ओस और बढ़ती ठंड किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है. भरतपुर जिले में सब्जियों की खेती करने वाले किसान विशेष रूप से इस मौसम में टमाटर, बैंगन, मूली, पालक, मिर्च और धनिया की पौध तैयार करते हैं. लेकिन तापमान गिरने और ओस की बूंदों के सीधे पौधों पर गिरने से नाजुक पौधों के खराब होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. इसी खतरे से निपटने के लिए यहां के किसान आज भी वर्षों से चले आ रहे एक पारंपरिक देसी तरीके का इस्तेमाल करते हैं.
जिसे स्थानीय भाषा में बांस-पॉलिथीन कवर तकनीक कहा जाता है, किसान पौधों की क्यारियों पर बांस को इस तरह लगाते हैं कि वह लटकी हुई आकृति बना ले. इसके बाद इन बांसों पर पारदर्शी पॉलिथीन अच्छी तरह से चढ़ा दी जाती है और किनारों को मिट्टी से दबा दिया जाता है. इससे नीचे एक छोटी सी सुरंगनुमा ढंकी हुई संरचना तैयार हो जाती है, जो पौधों को ओस, ठंड और तेज हवाओं से पूरी तरह सुरक्षित रखती है. पॉलिथीन की वजह से सूरज की हल्की गर्माहट भी अंदर आसानी से पहुंच जाती है.
ये तरीका सबसे आसान और असरदार
इससे पौधे दिन में गर्म रहते हैं और रात में तापमान तेजी से नहीं गिरता, किसान बताते हैं कि पॉलिथीन ढकने से पौधों पर सीधे ओस की बूंदें नहीं गिरतीं, क्योंकि ओस पड़ने से पौधे सर्दी पकड़ लेते हैं और उनकी बढ़वार रुक जाती है. जबकि ढंककर रखने पर पौधे स्वस्थ रहते हैं, जल्दी बढ़ते हैं और रोपाई के लिए समय पर तैयार हो जाते हैं। इससे उनकी लागत भी कम होती है और फसल का उत्पादन बेहतर मिलता है. भरतपुर के कई क्षेत्रों जैसे रूपबास, बयाना, उचैन और आसपास के इलाकों में किसान इसे दशकों से अपनाते आ रहे हैं. आधुनिक तकनीकों के आने के बावजूद यह देसी तरीका आज भी उतना ही भरोसेमंद माना जाता है, क्योंकि यह सस्ता, असरदार और स्थानीय परिस्थितियों के बिल्कुल अनुकूल है.
किसान बताते हैं कि इस व्यवस्था पर बहुत अधिक खर्च नहीं होता और पॉलिथीन भी सीजनभर चल जाती है. अगर सर्दियों में पौधों की सही सुरक्षा नहीं की जाए तो पूरी नर्सरी खराब हो सकती है, जिससे पूरे सीजन की मेहनत पर असर पड़ता है. इसलिए वे इसे पौध बचाने का सबसे जरूरी और कारगर उपाय मानते हैं, भरतपुर में तैयार की गई इस पौध की सप्लाई आसपास के जिलों में भी की जाती है. इसलिए किसान इसकी गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देते हैं.
About the AuthorMonali Paul
Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें
Location :
Bharatpur,Rajasthan
First Published :
December 07, 2025, 17:03 IST
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जानिए क्या है भरतपुर के किसानों की पारंपरिक बांस-पॉलिथीन तकनीक



