बीकानेर में वैज्ञानिकों को बड़ी कामयाबी, ऊंट के खून से तैयार किया जहरीले सांप का एंटी वेनम, इंसानों पर ट्रायल जल्द

Last Updated:December 28, 2025, 12:42 IST
Anti Snake Venom: बीकानेर के वैज्ञानिकों ने बांडी (स्नेक) के ज़हर के इलाज में बड़ी सफलता हासिल की है। सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज की एमआरयू और राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र ने ऊंट के खून से एंटी स्नेक वेनम तैयार किया है। चूहों पर किए गए प्रयोग के नतीजे उत्साहजनक रहे हैं। अब मानव पर ट्रायल की तैयारी चल रही है। यह शोध सर्पदंश से होने वाली मौतों को कम करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
बीकानेर. राजस्थान में पाए जाने वाले स्नेक यानी बांडी से हर साल हजारों लोगों की मौत हो रही है. ऐसे में बीकानेर के वैज्ञानिकों को एक बड़ी सफलता हासिल की है. जिसमें सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज की मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (एमआरयू) और राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र ने मिलकर बांडी यानी स्नेक का एंटी स्नेक वेनम तैयार किया है. जिससे बांडी के काटने से मरने वाले लोगों की मृत्यु दर कम हो सके. ऐसे में राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र में ऊंट के खून से एंटी स्नेक वेनम तैयार किया गया है. जिससे लोगों को स्नेक के काटने से बड़ी राहत मिलेगी.
हालांकि ऊंट के खून का प्रयोग चूहे पर सफल होने के बाद अब मानव पर ट्रायल शुरू करने की तैयारी हो रही है. सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज की मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट और एनआरसीसी संयुक्त रूप से करीब 15 साल से ऊंट के खून से सांप के जहर के इलाज पर शोध कार्य कर थे. कोरोना के कारण शोध कार्य तीन साल तक बंद रहा. वर्ष 2023 से यूनिट वापस सक्रिय हुई है.
उत्साहजनक रहा चूहों पर किया गया प्रयोग
यूनिट के नोडल अधिकारी डॉ. संजय कोचर ने बताया कि सांप का जहर केंट के शरीर में इंजेक्ट करने से उसमें एंटीबॉडी बनती है. फिर ऊंट का रक्त लेकर उससे एंटी स्नेक वेनम तैयार कर चूहों में इंजेक्ट कर देखा गया है. शोध के परिणाम उत्साहजनक मिले हैं. अब यह शोध मानव पर आजमाया जाएगा. इसके लिए भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, आईसीएमआर, ड्रग विभाग सहित विभिन्न एजेंसियों से संपर्क साधा गया है. एसपी मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ डॉ. पीडी तंवर इस शोध पर लंबे समय से काम कर रहे हैं. वर्तमान में एंटी स्नेक वेनम धोड़ों के खून से तैयार हो रहे हैं. सांप के काटे के इलाज की वैक्सीन 1895 में आई थी, जो घोड़ों के खून से तैयार हुई थी.
जल्द इंसानों पर ट्रायल किया जाएगा शुरू
राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एस के घोरेई ने बताया कि पश्चिमी राजस्थान और बॉर्डर इलाकों में यह स्नेक यानी बांडी मिलती है. जिससे प्रभाव काफी ज्यादा है और इसके काटने का असर भी ज्यादा रहता है. यहां मेडिकल कॉलेज के साथ कुछ सालों से काम कर रहे हैं. इसके कुछ अच्छे रिजल्ट मिले हैं और अब इसके मानव पर प्रयोग करने की तैयारी चल रही है. जल्द ही मानव पर ट्रायल शुरू करेंगे. इसके बांडी को पकड़ने के लिए भी परमिशन ली गई है और इसको बाद में जंगल में छोड़ देते है.
सांप के काटने से हर साल 50 हजार मौतें होती है
इंडियन काउंसिल मेडिकल रिसर्च सर्वे और विश्व स्वास्थ्य संगठन के सर्वे के अनुसार सांप के काटने से देश में हर साल 50 हजार लोगों की मौत हो जाती है. इसके अलावा सांप के काटने से बचने वाले लोग भी शारीरिक रूप से अक्षम हो जाते हैं. ये मौतें ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में होती है. जहां किसान खेत में कृषि कार्य करते समय सर्प दंश के शिकार हो जाते हैं.
About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
Location :
Bikaner,Rajasthan
First Published :
December 28, 2025, 12:42 IST
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बीकानेर में वैज्ञानिकों को मिली बड़ी सफलता, ऊंट के खून से तैयार किया एंटी वेनम



