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‘ठंड-धूप और बारिश में काम करना पड़ता था, माधुरी दीक्षित ने बयां किया शूटिंग का दर्द, बोलीं- अब चीजें बदल बहुत गईं

Last Updated:January 01, 2026, 05:31 IST


आज के दौर में फिल्मी सेट पर वैनिटी वैन, आरामदायक कुर्सियां और हर तरह की सुविधाएं आम हो चुकी हैं, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब कलाकारों को बेहद मुश्किल हालात में काम करना पड़ता था. बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री माधुरी दीक्षित ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए उन दिनों की सच्चाई शेयर की है.Madhuri Dixit, Madhuri Dixit News, Madhuri Dixit shared her experiences with being body shamed, Madhuri Dixit on early on in her career, what Madhuri Dixit mothers advised her, Madhuri Dixit Hit Films, how things changed after Tezaab, माधुरी दीक्षित, माधुरी दीक्षित की फिल्में, माधुरी दीक्षित ने करियर के शुरुआत में सुनी कड़वी बात, माधुरी दीक्षित की मां ने क्या दी थी सलाह

नई दिल्ली. माधुरी दीक्षित ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि 80 और 90 के दशक में फिल्म इंडस्ट्री आज जैसी प्रोफेशनल और इतनी सुविधाए नहीं थी. उस दौर में न तो वैनिटी वैन होती थीं और न ही ढंग से तैयार होने की जगह. कलाकारों को कई बार खुले मैदान, जंगल या पहाड़ी इलाकों में ही मेकअप और हेयर करना पड़ता था.

माधुरी ने कहा कि तब शूटिंग करना बिल्कुल भी आसान नहीं था. ठंड, धूप और बारिश में काम करना पड़ता था. कई बार मौसम कितना भी खराब हो, शूटिंग रुकती नहीं थी. उन्होंने कहा कि वो दिन काफी मुश्किल थे और वह उन्हें ज्यादा याद भी नहीं करना चाहतीं.

अपनी बात आगे रखते हुए माधुरी ने कहा कि उस वक्त जो मेहनत की जाती थी, वो किसी मजबूरी में नहीं बल्कि काम के लिए जुनून की वजह से होती थी. उस समय किसी को यह महसूस नहीं होता था कि वे कोई बड़ा त्याग कर रहे हैं, क्योंकि वही जिंदगी का हिस्सा बन चुका था.

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अपने एक्सपीरियंस शेयर करते हुए माधुरी ने ऊटी की शूटिंग का किस्सा भी बताया. उन्होंने कहा कि वहां कलाकारों और पूरी टीम को जंगल या खुले इलाकों में जाकर तैयार होना पड़ता था. ठंड से बचने के लिए हेयरड्रेसर शॉल ओढ़कर खड़े रहते थे. आज पीछे मुड़कर देखने पर वो दिन बहुत कठिन लगते हैं, लेकिन उस वक्त पूरी टीम मिलकर बहुत एंजॉय किया करती थीं.

माधुरी ने कहा कि उस समय टीम वर्क बहुत मजबूत होता था. सभी लोग एक-दूसरे का साथ देते थे और सबका एक ही मकसद होता था कि फिल्म को बेहतर बनाया जाए.

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धक-धक गर्ल ने बातचीत में खुलासा किया कि 1980 के मध्य में करियर शुरू करने के दिनों में कई लोग उन्हें सलाह देते थे. उन्होंने कहा, ‘जब मैंने अभी-अभी शुरुआत की थी, तो बहुत सारे लोग मुझे कहते थे ‘ये करो, वो करो, तुम्हारी नाक कैसी है, ये वो… मैं जाकर अपनी मां से कहती थी, ‘मां, वो लोग ऐसा कह रहे हैं.’

80 और 90 के दशक के डायरेक्टर्स के बारे में बात करते हुए माधुरी ने कहा कि उस दौर में इंडस्ट्री काफी हद तक ऐसी नहीं थी जैसी आज है. हालांकि यश चोपड़ा, बी आर चोपड़ा, सुभाष घई और राजश्री प्रोडक्शंस जैसे कुछ निर्माता पहले भी बहुत प्लानिंग के साथ काम करते थे, लेकिन बाकी जगह हालात के भरोसे ही काम चलता था.

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माधुरी ने कहा कि पहले कलाकारों को कम समय में सीन शूट करना पड़ता था. आज किरदार की तैयारी के लिए पूरा वक्त दिया जाता है. अब स्क्रिप्ट पहले से मिल जाती है, शूटिंग शेड्यूल तय होता है और सेट पर वैनिटी वैन जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं. कलाकार हर शॉट के बाद आराम कर सकते हैं. जबकि पहले धूप में छाते के नीचे बैठकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता था.

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January 01, 2026, 05:31 IST

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